गाजीपुर (Ghazipur) के भांवरकोल ब्लाक मुख्यालय के समीप सहरमाडीह गांव में स्थित त्रिलोचन कीर्ति स्तंभ का चौथा स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोग, बुद्धिजीवी और विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत प्रतिनिधि शामिल हुए। आयोजन के दौरान परंपरा, इतिहास और सामाजिक एकता को केंद्र में रखते हुए कई महत्वपूर्ण संदेश दिए गए।

कार्यक्रम की शुरुआत परिसर में स्थापित कुलदेवी के पूजन से हुई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन और प्रार्थना कर आयोजन का शुभारंभ किया गया। इसके बाद समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे कार्यक्रम का वातावरण गौरवपूर्ण बन गया।
कश्यप गोत्रीय भू-ब्राह्मण सम्मेलन आयोजित:
सम्मान समारोह के उपरांत कश्यप गोत्रीय भू-ब्राह्मणों का सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में समाज के इतिहास, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर विचार-विमर्श किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य समाज के लोगों को एक मंच पर लाकर आपसी संवाद और सहयोग को मजबूत करना रहा।
किनवारिका पत्रिका का विमोचन:
मुख्य अतिथि राजगुरु मठ (Rajguru Math) के पीठाधीश्वर अनंतानंद सरस्वती ने किनवार कीर्ति स्तंभ की वार्षिक पत्रिका “किनवारिका” का विमोचन किया। इस अवसर पर समाज की ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित करने पर विशेष जोर दिया गया।
गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश:
किनवार समाज के संरक्षक इंजीनियर अरविंद कुमार राय ने कहा कि किनवार वंश का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। उन्होंने बताया कि त्रिलोचन दीक्षित गढ़वाल वंश के नवरत्नों में से एक थे। इतिहास के अनुसार काशी के दशाश्वमेध घाट पर हुए यज्ञ के पुरोहित भी त्रिलोचन दीक्षित ही थे। उन्होंने कहा कि कीर्ति स्तंभ समाज को जोड़ने का कार्य करेगा और वंश के कल्याण के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।
समाज को एकजुट होने का आह्वान:
इंजीनियर अरविंद कुमार राय ने समाज के लोगों से अपील की कि वे एकजुट होकर कमजोर, असहाय और जरूरतमंद परिवारों की हरसंभव मदद करें। उन्होंने कहा कि समाज का जो भी आदेश होगा, उसका पालन करने के लिए वे सदैव तत्पर रहेंगे।
वीरता और सेवा की परंपरा:
मुख्य अतिथि अनंतानंद सरस्वती ने कहा कि उनका समाज अपने अधिकारों को अपनी वीरता के बल पर प्राप्त करता रहा है। समाज वंशवाद या पद की लालसा से दूर रहा है और देश सेवा का उसका गौरवशाली इतिहास रहा है।
कुरीतियों पर आत्ममंथन की जरूरत:
डॉ. अविनाश प्रधान ने कहा कि समाज की प्रगति के लिए गरीब और असहाय लोगों की मदद अनिवार्य है। उन्होंने दहेज जैसी कुरीतियों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता बताई और सहकार के माध्यम से समाज के उत्थान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज के बौद्धिक वर्ग को आगे आकर दिशा देने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
त्रिलोचन दीक्षित की स्मृति का प्रतीक:
वक्ताओं ने बताया कि कीर्ति स्तंभ किनवार वंश की नींव डालने वाले त्रिलोचन दीक्षित की स्मृति में बनाया गया है। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार कर्नाटक क्षेत्र के ब्राह्मण वंशीय अमोघ दीक्षित के पुत्र त्रिलोचन दीक्षित उत्तर भारत आकर सहरमाडीह में बसे, जहां से कश्यप गोत्रीय किनवार वंश की नींव पड़ी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता किनवार समाज के अध्यक्ष संतोष राय ने की और सभी आगंतुकों के प्रति आभार जताया। संचालन डॉ. व्यासमुनी राय ने किया। इस अवसर पर साहित्यकार रामबदन राय, विजयशंकर राय, वीरेंद्र राय, दिनेश राय सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।
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