रिपोर्ट: अमित कुमार
बलिया। उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के एक बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। उन्होंने कहा कि अयोध्या से बाबरी मस्जिद का नामोनिशान समाप्त होने के बाद देश के किसी भी हिस्से में बाबरी मस्जिद नहीं बन सकती। यह टिप्पणी ददरी मेला के समापन समारोह के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान सामने आई, जहां मंत्री ने पश्चिम बंगाल से जुड़े एक सवाल का जवाब दिया। बयान के संदर्भ में उन्होंने इतिहास और समकालीन राजनीति दोनों पहलुओं का उल्लेख किया।
ददरी मेला समापन के बाद बयान:
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बलिया (Ballia) में ददरी मेला के समापन के उपरांत मीडिया से बातचीत की। इस दौरान उनसे पश्चिम बंगाल (West Bengal) में 6 दिसंबर को तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर (Humayun Kabir) से जुड़े एक मामले पर सवाल पूछा गया। सवाल बाबरी मस्जिद के शिलान्यास से संबंधित था, जिस पर मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में अपनी बात रखी।
अयोध्या और बाबरी मस्जिद पर टिप्पणी:
मंत्री ने कहा कि जब अयोध्या (Ayodhya) से बाबरी मस्जिद का नामोनिशान मिट चुका है, तब देश में कहीं भी बाबरी मस्जिद बनाए जाने का प्रश्न ही नहीं उठता। उनके अनुसार, बाबर एक आक्रमणकारी था और ऐसे व्यक्ति के नाम पर देश में कोई मस्जिद या अन्य निर्माण नहीं हो सकता। उन्होंने इसे ऐतिहासिक तथ्य बताते हुए कहा कि यह इतिहास में दर्ज है।
इतिहास और संस्कृति का हवाला:
दयाशंकर सिंह ने अपने बयान में कहा कि बाबर भारत में आकर सनातन धर्मावलंबियों के मंदिरों को नुकसान पहुंचाने का काम करता रहा। उनके अनुसार, ऐसे आक्रमणकारी ने देश की संस्कृति और सभ्यता को नष्ट करने का प्रयास किया था। मंत्री ने जोर देकर कहा कि जिस व्यक्ति का इतिहास इस प्रकार का रहा हो, उसके नाम पर आज के भारत में कोई निर्माण स्वीकार्य नहीं हो सकता।
मुस्लिम समाज और आदर्श की बात:
बयान के दौरान मंत्री ने यह भी कहा कि मुसलमानों का आदर्श बाबर नहीं हो सकता। उनका कहना था कि किसी भी समुदाय के लिए आदर्श वह होना चाहिए जो शांति, भाईचारे और देश की सभ्यता का सम्मान करे। मंत्री ने इस मुद्दे को केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से देखने की बात कही।
राजनीति और वोट बैंक का आरोप:
दयाशंकर सिंह ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस केवल वोट की राजनीति के लिए एक वर्ग विशेष को संगठित करने का प्रयास कर रही है। मंत्री के अनुसार, इस तरह के मुद्दों को उठाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इसी तरह से पूरे बांग्लादेशी नागरिकों को बंगाल में बसाए जाने की बात कही जा रही है, जो गंभीर विषय है।
राजनीतिक बयान पर प्रतिक्रियाएं संभावित:
मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में ऐतिहासिक और धार्मिक मुद्दों को लेकर संवेदनशीलता बनी रहती है। बयान के बाद राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से प्रतिक्रियाएं आना स्वाभाविक माना जा रहा है। हालांकि, इस पूरे मामले में मंत्री ने अपना पक्ष रखते हुए इसे ऐतिहासिक तथ्य और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से जोड़ा है।
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