रिपोर्टर- गुड़िया मद्धेशिया
देवरिया (Deoria) में पुलिस लाइन में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रशिक्षुओं की परेड का निरीक्षण किया गया। इस निरीक्षण का उद्देश्य प्रशिक्षण की गुणवत्ता, अनुशासन और समग्र दक्षता को परखना रहा। परेड मैदान में प्रशिक्षुओं की गतिविधियों को बारीकी से देखा गया और उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया। निरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि प्रशिक्षण प्रक्रिया निर्धारित मानकों के अनुरूप चल रही है और भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए प्रशिक्षु पूरी तरह तैयार हो सकें।

परेड की गुणवत्ता पर गहन समीक्षा:
पुलिस अधीक्षक देवरिया (Deoria) संजीव सुमन (Sanjeev Suman) ने परेड के दौरान कदम ताल, सलामी, पंक्ति गठन और एकरूपता पर विशेष ध्यान दिया। प्रशिक्षुओं की ड्रिल, टर्नआउट और अनुशासन को परखते हुए आवश्यक सुधार के निर्देश दिए गए। परेड के प्रत्येक चरण को ध्यानपूर्वक देखा गया ताकि किसी भी प्रकार की कमी को समय रहते दूर किया जा सके।

अनुशासन और एकरूपता पर जोर:
निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि परेड केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि अनुशासन और टीम भावना का प्रतीक होती है। प्रशिक्षुओं को निर्देशित किया गया कि वे अपने कदमों की लय, पंक्ति की समानता और सामूहिक समन्वय पर विशेष ध्यान दें। परेड के माध्यम से पुलिस बल में अनुशासन की नींव मजबूत होती है, जो आगे चलकर सेवा के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रशिक्षण काल का महत्व बताया:
प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहा गया कि प्रशिक्षण काल किसी भी पुलिसकर्मी के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। इस अवधि में सीखे गए अनुशासन, शारीरिक दक्षता और मानसिक मजबूती आगे चलकर सेवा के हर क्षेत्र में सहायक सिद्ध होती है। प्रशिक्षुओं को यह संदेश दिया गया कि प्रशिक्षण को गंभीरता से लेना ही भविष्य में सफल और जिम्मेदार पुलिसकर्मी बनने की कुंजी है।
शारीरिक और मानसिक मजबूती पर फोकस:
परेड के साथ-साथ शारीरिक व्यायाम, मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास विकसित करने पर भी जोर दिया गया। प्रशिक्षुओं को नियमित अभ्यास के माध्यम से अपनी क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए गए। यह भी बताया गया कि एक संतुलित और सशक्त पुलिसकर्मी ही कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय ले सकता है।
कानून और व्यवहार कुशलता की सीख:
निरीक्षण के दौरान प्रशिक्षुओं को कानून की बुनियादी जानकारी, व्यवहार कुशलता और आमजन के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। यह स्पष्ट किया गया कि पुलिस का कार्य केवल कानून लागू करना नहीं, बल्कि समाज के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित करना भी है। प्रशिक्षुओं को नागरिकों के साथ सम्मानजनक और सहयोगात्मक व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
प्रशिक्षण स्टाफ को दिए निर्देश:
प्रशिक्षण स्टाफ को निर्देशित किया गया कि प्रशिक्षुओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, टीम भावना और कर्तव्यनिष्ठा की शिक्षा दी जाए। यह भी कहा गया कि एक अनुशासित और प्रशिक्षित पुलिस बल ही कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने में सक्षम होता है। प्रशिक्षण प्रक्रिया में गुणवत्ता और निरंतरता बनाए रखने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।
स्वच्छता और समय पालन पर विशेष ध्यान:
प्रशिक्षुओं को स्वच्छ वर्दी, समय पालन और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों का पूर्ण निष्ठा से पालन करने के निर्देश दिए गए। यह बताया गया कि पुलिस बल की पहचान उसके अनुशासन, आचरण और प्रस्तुति से होती है। समय पर उपस्थित होना और आदेशों का पालन करना सेवा की मूल भावना का हिस्सा है।
उत्कृष्ट प्रदर्शन की अपेक्षा:
निरीक्षण के अंत में यह आशा व्यक्त की गई कि सभी प्रशिक्षु प्रशिक्षण को गंभीरता से लेते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे। यह भी कहा गया कि प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान और अनुभव ही भविष्य में सेवा की गुणवत्ता तय करेगा। इस अवसर पर आरटीसी प्रभारी एवं अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
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