लखनऊ (Lucknow), 8 मार्च 2026। जगद्गुरु रामभद्राचार्य (Jagadguru Rambhadracharya) के शिष्य आशुतोष महाराज (Ashutosh Maharaj) ने दावा किया है कि उन पर किया गया हमला एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था। उनका कहना है कि 21 लाख रुपए के लालच में यह हमला कराया गया, ताकि उन्हें अदालत तक पहुंचने और साक्ष्य प्रस्तुत करने से रोका जा सके। आशुतोष महाराज रविवार को रीवा एक्सप्रेस (Rewa Express) से प्रयागराज (Prayagraj) जा रहे थे। इसी दौरान सुबह करीब 5 बजे कौशांबी (Kaushambi) जिले के सिराथू रेलवे स्टेशन के पास चलती ट्रेन में उन पर हमला हुआ। हमले में उनके नाक, चेहरे और हाथ पर चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें प्रयागराज स्थित कॉल्विन हॉस्पिटल (Colvin Hospital) में भर्ती कराया गया।
चलती ट्रेन में हुआ हमला:
बताया गया कि आशुतोष महाराज जब रीवा एक्सप्रेस (Rewa Express) से प्रयागराज जा रहे थे, उसी दौरान सिराथू रेलवे स्टेशन के पास एक हमलावर ने उन पर हमला कर दिया। हमलावर ने उनके नाक, चेहरे और हाथ पर वार किए, जिससे वह घायल हो गए। घटना के बाद उन्हें इलाज के लिए प्रयागराज के कॉल्विन हॉस्पिटल (Colvin Hospital) ले जाया गया, जहां उनका मेडिकल परीक्षण किया गया। बाद में वह सर्किट हाउस पहुंचे और वहां मीडिया से बातचीत में पूरी घटना की जानकारी दी।
हमले के पीछे साजिश का आरोप:
आशुतोष महाराज का आरोप है कि इस हमले के पीछे 21 लाख रुपए के इनाम की घोषणा का मामला जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि यह हमला उन्हें डराने और अदालत में साक्ष्य देने से रोकने के उद्देश्य से किया गया। उनके अनुसार, कुछ लोगों ने पहले से उनकी नाक काटने की योजना बनाई थी ताकि वह आगे कानूनी प्रक्रिया में शामिल न हो सकें। उन्होंने यह भी कहा कि हमलावर कथित तौर पर अपने गुरु के नाम का उल्लेख करते हुए वारदात को अंजाम दे रहा था।
इनाम की घोषणा का जिक्र:
आशुतोष महाराज ने कहा कि 24 फरवरी को श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास (Shri Krishna Janmabhoomi Sangharsh Nyas) के अध्यक्ष फलाहारी महाराज (Falahari Maharaj) की ओर से यह बयान दिया गया था कि आशुतोष ब्रह्मचारी की नाक काटने वाले व्यक्ति को 21 लाख रुपए का इनाम दिया जाएगा। इसी बयान के बाद से उनके खिलाफ माहौल बनाया गया और हमले की योजना बनाई गई। उनका कहना है कि पैसे के लालच में कोई भी व्यक्ति इस तरह की वारदात को अंजाम दे सकता है।
खुद को बचाने को लेकर कही बात:
घटना के बारे में बताते हुए आशुतोष महाराज ने कहा कि अगर ईश्वर की कृपा नहीं होती तो हमलावर उन्हें गंभीर नुकसान पहुंचा सकते थे। उन्होंने कहा कि जब तक भगवान चाहेंगे, वह जीवित रहेंगे और अपने पक्ष को अदालत में मजबूती से रखेंगे। उन्होंने कहा कि सच सामने लाने के लिए वह कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेते रहेंगे।
पुलिस कार्रवाई पर जताई नाराजगी:
आशुतोष महाराज ने यह भी कहा कि हमले के बाद उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उनका आरोप है कि पुलिस की ओर से उन्हें इधर-उधर ले जाया गया और पर्याप्त सहायता नहीं दी गई। उनका कहना है कि उनकी तबीयत खराब थी, लेकिन संबंधित अधिकारियों की ओर से समय पर मदद नहीं मिल सकी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अब तक यह जानकारी नहीं दी गई है कि पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई कर रही है।
कानूनी लड़ाई जारी रखने का दावा:
मीडिया से बातचीत में आशुतोष महाराज ने कहा कि वह इस मामले में कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि यदि अदालत का फैसला उनके पक्ष में नहीं आता है तो वह उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक जाने का विकल्प अपनाएंगे। उनका कहना है कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और न्याय प्रक्रिया के माध्यम से सच्चाई सामने आनी चाहिए।
शंकराचार्य की ओर से आरोपों का खंडन:
दूसरी ओर अविमुक्तेश्वरानंद (Avimukteshwaranand) की ओर से इन आरोपों को निराधार बताया गया है। उनके अनुसार यह मामला ध्यान भटकाने की कोशिश हो सकता है और घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति यात्रा कर रहा है तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
निष्पक्ष जांच की मांग:
पूरे घटनाक्रम को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। एक ओर जहां आशुतोष महाराज ने इसे साजिश बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर आरोपों को खारिज करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। ऐसे में मामले की वास्तविकता सामने आने के लिए संबंधित एजेंसियों द्वारा जांच की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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