प्रयागराज में किन्नर अखाड़े में मचा हंगामा!

महाकुंभ (Mahakumbh) में सबसे अधिक चर्चा में रहने वाला किन्नर अखाड़ा अब दो हिस्सों में बंट गया है। उप्र किन्नर कल्याण बोर्ड (UP Kinnar Kalyan Board) की मेंबर और अखाड़े की महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरि उर्फ टीना मां ने अखाड़े से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे के साथ ही उन्होंने नया अखाड़ा गठित करने की घोषणा भी कर दी है, जिसका नाम ‘सनातनी किन्नर अखाड़ा’ रखा गया है।

टीना मां ने किया नया अखाड़ा घोषित:
टीना मां ने सोमवार को आधिकारिक रूप से अपने नए अखाड़े की घोषणा की। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ समय से किन्नर अखाड़ा अपने मूल उद्देश्य और सिद्धांतों से भटक गया था। इसी कारण उन्होंने अब एक नया मार्ग अपनाने का फैसला लिया है ताकि सनातन धर्म की परंपराओं और अखाड़ा संस्कृति को सही दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।

विचारधारा में असहमति बनी वजह:
टीना मां ने बताया कि वर्ष 2019 से वह किन्नर अखाड़े में महामंडलेश्वर के पद पर कार्यरत थीं। लेकिन हाल के दिनों में अखाड़े की विचारधारा और कार्यशैली में बड़ा बदलाव देखने को मिला, जिससे उनका मन विचलित हुआ। उन्होंने कहा कि “अखाड़े का गठन सनातन परंपराओं के संरक्षण और किन्नर समाज के उत्थान के लिए किया गया था, परंतु अब वह उस दिशा में कार्य नहीं कर रहा। इसलिए मैंने उससे अलग होकर नया अखाड़ा बनाने का निर्णय लिया।”

‘सनातनी किन्नर अखाड़ा’ का उद्देश्य:
टीना मां ने बताया कि ‘सनातनी किन्नर अखाड़ा’ का मुख्य उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक जागरूकता फैलाना, सनातन धर्म की मूल परंपराओं का संरक्षण करना और किन्नर समुदाय को सामाजिक सम्मान दिलाना है। उन्होंने कहा कि यह अखाड़ा धर्म, संस्कृति और समाज के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करेगा।

महाकुंभ में नए अखाड़े की भूमिका पर नजर:
महाकुंभ (Mahakumbh) जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में अब दो किन्नर अखाड़ों की मौजूदगी से हलचल तेज हो गई है। धार्मिक जगत में यह विषय चर्चा का केंद्र बना हुआ है कि आने वाले कुंभ में दोनों अखाड़े अपनी पहचान और परंपरा को कैसे बनाए रखेंगे।

धार्मिक जगत में बढ़ी चर्चा:
टीना मां के इस फैसले के बाद धार्मिक और सामाजिक हलकों में कई प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोग उनके इस निर्णय को साहसिक कदम बता रहे हैं तो कुछ इसे अखाड़ा परंपरा में विभाजन का संकेत मान रहे हैं। हालांकि टीना मां ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी से विरोध नहीं, बल्कि सनातन मूल्यों की रक्षा है।

निष्कर्ष:
किन्नर अखाड़े का यह विभाजन धार्मिक समाज में एक नई दिशा की ओर संकेत करता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ‘सनातनी किन्नर अखाड़ा’ आने वाले समय में किन्नर समाज और धर्म के क्षेत्र में क्या नई भूमिका निभाएगा।


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डिस्क्लेमर:यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

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