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जैसे रावण का दहन अंधकार और अहंकार के नाश का प्रतीक है, वैसे ही इस व्यापारी के ऊपर लगे आरोप वित्तीय और नैतिक भ्रष्टाचार की परतों को उजागर करते हैं। रावण दहन हमें यह याद दिलाता है कि चाहे कितनी भी ताकत या रसूख क्यों न हो, अन्याय और अत्याचार की सत्ता लंबे समय तक टिक नहीं सकती।

इस व्यापारी का साम्राज्य, जिसमें अवैध संबंध, यौन शोषण और सत्ता का दुरुपयोग शामिल था, उस अंधकार के समान था जिसे समाज ने अब उजागर किया है। रावण दहन की तरह, इस घोटाले का पर्दाफाश भी यह संदेश देता है कि अहंकार और भ्रष्टाचार की परतें चाहे कितनी भी गहरी हों, सत्य और न्याय की आग उन्हें अवश्य जला देती है।

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1987 की सुबह में ताज़ी हवा चारों ओर फैल रही थी, लेकिन उस हवा में वित्तीय और नैतिक घोटालों की गंध भी थी। यह वह समय था जब सहारा समूह का उदय शुरू हो रहा था और सुब्रत रॉय का साम्राज्य केवल ₹24,000 करोड़ की धांधली तक सीमित नहीं रहा। दस्तावेज़ और पुराने बयानों के अनुसार, यह साम्राज्य अवैध संबंधों, यौन दुराचार और सत्ता के गलियारों में रसूखदार लोगों के लिए ‘सेवा’ का एक नेटवर्क भी चला रहा था।

‘शिकारी’ सुब्रत रॉय:

प्राप्त दस्तावेज़ बताते हैं कि सुब्रत रॉय साधारण उद्यमी नहीं बल्कि अपने समय के एक शिकारी के रूप में सामने आते हैं। 1987 से 1995 के बीच के ये आरोप समूह के शुरुआती दिनों में उठे थे, जब सहारा ने अपना साम्राज्य मजबूत करना शुरू किया था।

व्यभिचारियों का अड्डा:

दस्तावेज़ों में मुख्यालय को भ्रष्टाचार और व्यभिचारियों का केंद्र बताया गया है।

यौन शोषण के गंभीर संकेत:

एक हस्तलिखित स्वीकारोक्ति में यह भी उल्लेख है कि कई लोगों के साथ शारीरिक संबंध बनाए गए। यह बताता है कि शोषण एक नियमित पैटर्न था।

‘सेवा’ के लिए गेस्ट हाउस:

सूत्रों के अनुसार, रॉय ने सत्ता में बैठे अधिकारियों और नेताओं के लिए विशेष व्यवस्था की, जिससे अवैध वित्तीय लेनदेन पर पर्दा डाला जा सके और कानूनी सुरक्षा मिल सके।

तिहाड़ जेल में विशेष सुविधा:

2014 से 2016 के बीच जब रॉय तिहाड़ जेल में थे, तब भी उन पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगा। पूर्व अधिकारी सुनील गुप्ता के अनुसार, ‘प्राइवेट सेक्रेटेरियल हेल्प’ के नाम पर मिलने वाली सुविधा का दुरुपयोग किया गया।

अवैध मुलाकातें और शराब:

गुप्ता ने दावा किया कि सहारा एयरलाइंस की एयर होस्टेस रॉय से मिलने आती थीं और उनके साथ घंटों रहती थीं। रॉय के सेल से शराब की बोतलें भी बरामद हुईं। यह दिखाता है कि जेल प्रशासन तक पर पैसे और रसूख का दबाव काम करता रहा।

सहारा शहर में कर्मचारी विरोध:

करीब 38 साल बाद, 10 फरवरी 2025 को लखनऊ में सहारा समूह के कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच टकराव गहराया। कर्मचारियों ने सहारा शहर के सातों गेटों को वेल्डिंग कर बंद कर दिया। बिजली और पानी की सप्लाई रोक दी गई। कर्मचारी धरने पर बैठ गए और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की।

पुलिस से कर्मचारियों की बहस:

पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन कर्मचारियों के गुस्से के आगे माहौल तनावपूर्ण हो गया। कर्मचारियों का कहना था कि प्रबंधन पीछे के दरवाजे से भाग चुका है और बकाया वेतन व अन्य मांगों का समाधान तत्काल किया जाए।

सहारा शहर की भव्यता:

लखनऊ का सहारा शहर अपनी भव्यता और विलासिता के लिए जाना जाता है। यहां संगमरमर के घर, मॉडर्न थिएटर, गोल्ड क्लास सीटें, 5,000 लोगों की क्षमता वाला सभागार और एयरपोर्ट जैसी सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है।

हस्तियों का जमावड़ा और नगर निगम की तैयारी:

कभी अमिताभ बच्चन और मुलायम सिंह यादव जैसी हस्तियां यहां आती थीं। अब नगर निगम पूरे परिसर को अपने कब्जे में लेने की तैयारी कर रहा है।

सुब्रतो कोठी और आलीशान सुविधाएं:

130 एकड़ में फैली संपत्तियों में महलनुमा बंगला, स्टेडियम, ऑडिटोरियम, गेस्ट हाउस, पेट्रोल पंप, फायर स्टेशन, स्विमिंग पूल, हेलीपैड, अस्पताल, क्लब और झील शामिल हैं।

सीलिंग से पहले का ड्रामा:

नगर निगम की टीम जब सीलिंग के लिए आई, सहारा प्रतिनिधि समय की मांग करने लगे। उन्हें तीन दिन की मोहलत दी गई। इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा।

नगर निगम की सख्त चेतावनी:

टीम ने साफ किया कि तीन दिन के भीतर परिसर खाली करना होगा। पांच ताले और जंजीरें तैयार रखी गई हैं। मोहलत मिलने के बाद वीआईपी गाड़ियों की आवाजाही बढ़ गई, और अब सभी की निगाहें अंतिम कार्रवाई पर टिकी हैं।

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“Documents reveal that Subrata Roy was not just an ordinary entrepreneur but acted like a predator during 1987-1995, the formative years of the Sahara Group. Allegations from this period expose the group’s early unethical practices, highlighting a network of power, corruption, and exploitation that shaped its controversial legacy.”

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