लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party – BSP) प्रमुख मायावती एक्शन मोड में नजर आईं। बुधवार को उन्होंने पहली बार मुस्लिम नेताओं के साथ अहम बैठक की, जिसमें उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के 75 जिलों के जिलाध्यक्षों समेत लगभग 450 नेता मौजूद रहे। इस बैठक में आकाश आनंद (Aakash Anand) और सतीश मिश्रा (Satish Mishra) भी शामिल हुए। बैठक के दौरान आकाश आनंद ने मंच पर ही मायावती के पैर छूकर सम्मान प्रकट किया। यह बैठक बंद कमरे में हुई, जिसमें मायावती ने आगामी चुनावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। खास बात यह रही कि जिस हॉल में बैठक आयोजित की गई, वहां बसपा के वरिष्ठ नेता पीछे बैठे जबकि मुस्लिम नेता आगे की पंक्ति में मौजूद थे।
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लगातार बैठकों से बढ़ी मायावती की सक्रियता:
मायावती का यह एक महीने के भीतर चौथा बड़ा कार्यक्रम रहा। इससे पहले उन्होंने 9 अक्टूबर को एक विशाल रैली आयोजित की थी। 16 और 19 अक्टूबर को दो अलग-अलग बैठकों में करीब 400-400 नेताओं के साथ रणनीति पर चर्चा की थी। अब मुस्लिम नेताओं के साथ हुई इस बैठक को पार्टी की आगामी रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
‘मुस्लिम समाज भाईचारा संगठन’ के गठन के बाद बैठक:
बसपा प्रमुख ने 25 अक्टूबर को ‘मुस्लिम समाज भाईचारा संगठन (Muslim Samaj Bhaichara Sangathan)’ का गठन किया था। उसके महज चार दिन बाद ही यह बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान मायावती ने मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR – Summary Revision of Electoral Rolls) को लेकर विस्तृत चर्चा की। बैठक लगभग डेढ़ घंटे चली, जिसमें 75 जिलाध्यक्ष, 90 कोऑर्डिनेटर, 36 मुस्लिम भाईचारा कमेटी के अध्यक्ष और 36 बसपा की कोर कमेटी के पदाधिकारी मौजूद रहे।
समर्थकों में जोश, बोले—मायावती ही बेहतर विकल्प:
मायावती की ताबड़तोड़ बैठकों और बढ़ती सक्रियता से बसपा कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिला। जालौन (Jalaun) से आए एक कार्यकर्ता ने कहा कि प्रदेश की जनता अब एक बार फिर मायावती को मुख्यमंत्री बनाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि “प्रदेश ने सभी दलों की सरकारें देख ली हैं, लेकिन मायावती के कार्यकाल जैसी सुशासन वाली सरकार कोई और नहीं दे पाया।”
बैठक ऐतिहासिक क्यों मानी जा रही है?:
बसपा में मुस्लिम भाईचारा कमेटी का गठन वर्ष 2012 से 2017 के बीच हुआ था, लेकिन मायावती ने तब कभी इसकी बैठक नहीं ली। यह पहली बार हुआ है जब मायावती ने इस कमेटी की बैठक की अध्यक्षता की। साथ ही, यह भी पहली बार है जब भाईचारा कमेटी और पार्टी की मुख्य बॉडी के पदाधिकारी एक साथ किसी बैठक में शामिल हुए। यह कदम बसपा के संगठनात्मक ढांचे में नए समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
SIR पर दिए गए निर्देश:
सूत्रों के अनुसार, बैठक में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) पर विशेष चर्चा हुई। इस दौरान यह तय किया गया कि पुराने बसपा समर्थक वोटरों को फिर से कैसे जोड़ा जाए और नए मतदाताओं का नाम वोटर लिस्ट में कैसे शामिल कराया जाए। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश भी दिए गए।
सभी नेताओं को दी गई ‘पीली फाइल’:
सूत्रों के मुताबिक मायावती ने बैठक में मौजूद सभी नेताओं को एक पीले रंग की फाइल (Yellow File) सौंपी। इसमें SIR से जुड़ी पूरी जानकारी और दिशा-निर्देश शामिल हैं। साथ ही इसमें बसपा सरकार के दौरान मुस्लिम समाज के लिए किए गए कार्यों का विस्तृत विवरण दिया गया है। यही दस्तावेज मुस्लिम समाज के बीच पार्टी की उपलब्धियों को बताने और उन्हें संगठन से जोड़ने के लिए आधार बनेगा।
मायावती की यह रणनीतिक बैठक बसपा के लिए संगठनात्मक मजबूती और मुस्लिम समुदाय से नए सिरे से जुड़ाव की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है। लगातार बैठकों से मायावती की सक्रियता ने पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया है और आगामी विधानसभा चुनावों के लिए माहौल तैयार करने की प्रक्रिया को गति मिल गई है।
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