बुर्के में वोटिंग पर सियासी घमासान, समाजवादी पार्टी ने Election Commission पर लगाए आरोप

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बुर्के में वोटिंग को लेकर नई सियासत शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने Election Commission पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि आयोग के नए नियम एक समुदाय विशेष को निशाना बनाने की साजिश हैं। पार्टी ने मांग की है कि इस आदेश को तुरंत वापस लिया जाए, क्योंकि यह न केवल संविधान की भावना के खिलाफ है बल्कि आयोग के अपने ही नियमों का भी उल्लंघन करता है।

नए नियमों पर समाजवादी पार्टी का विरोध:
समाजवादी पार्टी का कहना है कि Election Commission द्वारा जारी नए निर्देशों में बुर्काधारी मुस्लिम महिला मतदाताओं की पहचान के लिए आंगनबाड़ी सेविकाओं की मदद लेने की बात कही गई है। पार्टी ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह नियम धार्मिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता में दखल देने वाला है। सपा का तर्क है कि मतदान लोकतांत्रिक अधिकार है, और किसी महिला की पहचान के नाम पर ऐसी शर्तें लगाना भेदभावपूर्ण कदम है।

संविधान और आयोग के नियमों के विरुद्ध बताया:
सपा नेताओं का कहना है कि यह कदम न केवल भारतीय संविधान की धारा 14 और 21 का उल्लंघन है, बल्कि यह Election Commission के अपने ही निर्धारित आचार संहिता और मतदाता गोपनीयता नियमों के भी विपरीत है। पार्टी का आरोप है कि इस तरह के निर्णय से मतदाता स्वतंत्रता और समानता के सिद्धांतों पर आघात होता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह नियम एक समुदाय को अलग-थलग करने और राजनीतिक रूप से कमजोर करने की कोशिश है।

चुनाव से पहले बढ़ी सियासी गर्मी:
बुर्के में वोटिंग पर उठे इस विवाद ने प्रदेश की सियासत को और गर्मा दिया है। विपक्षी दलों ने Election Commission से स्पष्टीकरण की मांग की है कि आखिर इस तरह के नियम की जरूरत क्यों पड़ी। वहीं, सपा का कहना है कि ऐसे कदम से समाज में अनावश्यक तनाव पैदा होगा और लोकतंत्र की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होंगे। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि यह आदेश वापस नहीं लिया गया तो वे कानूनी और जन आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

आयोग की चुप्पी और संभावित प्रतिक्रिया:
अब तक Election Commission की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। हालांकि, राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नियम लागू होता है तो इससे कई जिलों में महिला मतदाताओं की संख्या पर असर पड़ सकता है। इस मामले ने न केवल राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है बल्कि चुनावी तैयारी में लगी पार्टियों को भी अपने रणनीतिक रुख पर पुनर्विचार करने को मजबूर कर दिया है।

निष्कर्ष:
बुर्के में वोटिंग पर सियासी विवाद आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना है। समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) इस मुद्दे को व्यापक रूप से उठाने की तैयारी में है, जबकि Election Commission पर अब दबाव है कि वह अपनी स्थिति स्पष्ट करे। यूपी (Uttar Pradesh) में 2027 का चुनाव नजदीक आते ही इस तरह के मुद्दे राजनीतिक समीकरणों को गहराई से प्रभावित कर सकते हैं।
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डिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

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