लखनऊ/गाज़ीपुर। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में एक चौंकाने वाली घटना ने सियासी हलचल मचा दी है। आरोप है कि नोनहरा थाना क्षेत्र में पुलिस लाठीचार्ज के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ता सियाराम उपाध्याय की दुखद मौत हो गई। इस घटना ने न केवल पुलिस-प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि खुद भाजपा के कार्यकर्ताओं में अपनी ही सरकार के प्रति गहरा रोष पैदा कर दिया है। यह मामला अब एक राजनीतिक संकट का रूप ले चुका है, जहां पार्टी के भीतर ही अपने नेतृत्व के खिलाफ असंतोष पनप रहा है। सियाराम उपाध्याय के परिजनों और स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं का गुस्सा सड़कों पर उतर आया है, जिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई है।
पुलिस कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
सियाराम उपाध्याय की मौत के बाद, उनके भाई शशिकांत उपाध्याय ने सीधे तौर पर पुलिस और सरकार पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि पुलिस की बर्बरता के कारण सियाराम की जान गई। उन्होंने इस घटना को लेकर न्याय की मांग करते हुए पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी की। यह स्थिति भाजपा सरकार के लिए बेहद असहज थी, क्योंकि उनके अपने ही कार्यकर्ता और उनके परिजन पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ मुखर थे। इस मामले ने यह भी दर्शाया कि भाजपा के भीतर निचले स्तर पर कार्यकर्ताओं और शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद की कमी है, जो इस तरह के संकटों को और बढ़ा सकती है।
परिजनों का ‘यू-टर्न’ और सियासी समीकरण
हालांकि, इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब शशिकांत उपाध्याय ने अपने पहले के बयानों से यू-टर्न ले लिया। उन्होंने अचानक अपने तेवर ढीले कर दिए, जिसके बाद कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। इस बदलाव और गाज़ीपुर में सरकार के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच भरोसा पैदा करने की कोशिश के पीछे गाजीपुर से भाजपा एमएलसी विशाल सिंह चंचल की अहम भूमिका बताई जा रही है। सोमवार को दोपहर में करीब 2 बजे विशाल सिंह चंचल ने शशिकांत उपाध्याय की मुलाकात सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से करवाई। इस मुलाकात ने मामले को एक नया आयाम दे दिया है। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह यू-टर्न किसी समझौते का नतीजा है या सरकार की ओर से मामले को शांत करने की कोशिश? इस मुलाकात के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सियाराम के परिवार को न्याय मिलता है और क्या पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई की जाती है।
भाजपा कार्यकर्ताओं में बढ़ता असंतोष
सियाराम उपाध्याय की मौत के बाद से ही स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं में अपनी ही सरकार के प्रति भारी नाराजगी है। उनका मानना है कि जब पार्टी का एक समर्पित कार्यकर्ता ही पुलिस के अत्याचार का शिकार हो जाए और उसे न्याय न मिले तो आम लोगों का क्या होगा? यह घटना भाजपा के उन कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ा झटका है जो दिन-रात पार्टी के लिए काम करते हैं। वे अपने नेतृत्व से यह उम्मीद कर रहे थे कि इस दुखद घटना पर कड़ा रुख अपनाया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद भी कार्यकर्ताओं का गुस्सा पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। वे अभी भी यह देख रहे हैं कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है।
आगे की राह और सरकार की अग्निपरीक्षा
अब सबकी निगाहें सरकार पर टिकी हैं। यह मामला सिर्फ एक कार्यकर्ता की मौत का नहीं, बल्कि सरकार की विश्वसनीयता और कार्यकर्ताओं के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का भी है। अगर सरकार इस मामले में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई नहीं करती है, तो इसका असर पूरे प्रदेश में भाजपा के संगठन पर पड़ सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए यह एक बड़ी अग्निपरीक्षा है। उन्हें न सिर्फ न्याय सुनिश्चित करना है, बल्कि पार्टी के भीतर पनप रहे असंतोष को भी दूर करना है। देखना होगा कि क्या सरकार जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करती है, क्या सियाराम उपाध्याय के परिवार को उचित मुआवजा मिलता है और सबसे महत्वपूर्ण, क्या भाजपा कार्यकर्ता अपनी ही सरकार पर दोबारा विश्वास कर पाते हैं। यह मामला यह तय करेगा कि योगी सरकार अपने कार्यकर्ताओं के साथ किस तरह का व्यवहार करती है और संकट के समय में कैसे उनका भरोसा जीतती है।