शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अयोध्या (Ayodhya) के GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह के इस्तीफा प्रकरण को लेकर तीखा तंज कसा। उन्होंने हंसते हुए कहा कि जिस तरह बरेली (Bareilly) के मजिस्ट्रेट के मामले में त्याग पत्र दिलवाया गया और बाद में वापस हो गया, ठीक उसी तरह यह इस्तीफा भी चार दिन में लौट आएगा, यह उन्होंने पहले ही कह दिया था। उनका कहना था कि अब वही हुआ, आदमी थूक कर चाट चुका है। यह टिप्पणी उस घटनाक्रम पर थी, जिसमें GST डिप्टी कमिश्नर ने 27 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में इस्तीफा दिया और चार दिन बाद निर्णय पलटते हुए पद पर बने रहने की बात कही।
इस्तीफा प्रकरण पर कटाक्ष:
शंकराचार्य ने कहा कि इस्तीफा देने और फिर वापस लेने की प्रक्रिया अपने आप में बहुत कुछ कहती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब पहले ही स्पष्ट था कि यह त्याग पत्र ज्यादा दिन नहीं टिकेगा, तो फिर इसे नाटकीय रूप क्यों दिया गया। उनके अनुसार, इस तरह के कदम प्रशासनिक गरिमा पर भी सवाल खड़े करते हैं।
मंत्री के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया:
पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि मंत्री जिस भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, वह उनकी सोच को दर्शाती है। उन्होंने ‘आका’ शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह अरबी शब्द है और इसका प्रयोग यह बताता है कि सोच किस दिशा में जा रही है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का पद सर्वोच्च है और उसके ऊपर कोई नहीं हो सकता। मंत्री अपने आका तय कर सकते हैं, लेकिन शंकराचार्य पर यह शब्द लागू नहीं होता।
‘जनता को गुमराह करने का आरोप’:
शंकराचार्य ने ओम प्रकाश राजभर और धर्मपाल सिंह सैनी के बयानों पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) से केवल भैंस, बकरे और सूअर का मांस निर्यात होता है, जबकि सूअर के मांस का निर्यात होता ही नहीं है। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि यह दावा किस आधार पर किया जा रहा है। यदि यह तथ्यहीन है, तो आगे किसी भी चर्चा का कोई अर्थ नहीं बचता।
भैंस के नाम पर गौमांस निर्यात का आरोप:
शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि भैंस के मांस की आड़ में लगातार गौमांस का निर्यात हो रहा है। उन्होंने नोएडा (Noida) और भोपाल (Bhopal) की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि शुरुआत में मांस को भैंस का बताया गया, लेकिन जांच में वह गाय का निकला। उनका कहना था कि जब हर बार लैब जांच में यही स्थिति सामने आती है, तो सरकारी दावों पर भरोसा कैसे किया जाए।
बूचड़खानों की संख्या पर सवाल:
उन्होंने योगी सरकार के उस दावे पर भी सवाल उठाए, जिसमें अवैध बूचड़खानों को बंद करने की बात कही जाती है। शंकराचार्य के अनुसार, जब मुख्यमंत्री ने कार्यभार संभाला था, तब प्रदेश में लगभग 40 प्रसंस्कृत मांस निर्यात करने वाले बूचड़खाने थे, जो नौ वर्षों में बढ़कर 70 से अधिक हो गए हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि अवैध बूचड़खाने बंद किए गए, तो इनकी संख्या कैसे बढ़ती चली गई।
वेतन और सन्यासी परंपरा पर टिप्पणी:
शंकराचार्य ने कहा कि कोई साधु, संन्यासी या मठाधीश मांस विक्रेता नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि मांस निर्यात से होने वाली आय जिस खजाने में जाती है, उसी से मुख्यमंत्री को वेतन मिलता है। उनके अनुसार, 106 महीनों में लगभग चार करोड़ रुपये वेतन के रूप में लिए जा चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह भगवा वस्त्र और सन्यासी परंपरा का अपमान नहीं है।
शंकराचार्य पद की वैधता पर जवाब:
मंत्रियों द्वारा शंकराचार्य पद को असंवैधानिक बताए जाने पर उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब शंकराचार्य परंपरा की स्थापना हुई थी, तब संविधान अस्तित्व में नहीं था, लेकिन राजा थे और उन्होंने यह सम्मान दिया। आज की सरकारें उसी व्यवस्था की उत्तराधिकारी हैं, ऐसे में इस पद की वैधता पर सवाल उठाना अज्ञानता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पद संविधान से हजारों वर्ष प्राचीन है।
अलंकार अग्निहोत्री से मुलाकात का उल्लेख:
बरेली के पूर्व मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री से मुलाकात पर शंकराचार्य ने बताया कि मौन काल के दौरान वे उनसे मिलने आए थे। संवाद नहीं हो पाया, लेकिन उनकी बात सुनी गई और आशीर्वाद दिया गया। मठ के पंडितों ने तिलक लगाकर सम्मान किया और उनके लक्ष्य में सफलता की कामना की।
आगे की रणनीति और संतों को पत्र:
शंकराचार्य ने कहा कि जनता से संवाद लगातार जारी है और अब देशभर के संतों को पत्र लिखने की योजना है। 11 और 12 फरवरी को लखनऊ (Lucknow) जाकर आगे की रणनीति तय की जाएगी। पत्र के माध्यम से संतों से पूछा जाएगा कि उनकी सनातन यात्रा सही दिशा में है या नहीं।
महाकुंभ और शिवलिंग पर स्थिति स्पष्ट:
महाकुंभ में स्थापित शिवलिंग हटाए जाने के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि जब शिविर ही नहीं रहेगा, तो शिवलिंग वहां क्यों रहेंगे। जानकारी दी गई कि इन शिवलिंगों को छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बेमेतरा (Bemetara) जिले में शिवगंगा नदी के किनारे स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम (Sapaad Laksheshwar Dham) में स्थापित किया जाएगा, जहां सवा लाख शिवलिंगों की प्रतिष्ठा प्रस्तावित है।
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