प्रयागराज: उमा और परमहंस ने शंकराचार्य के समर्थन में सरकार पर साधा निशाना

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद (Shankaracharya Avimukteshwaranand) और माघ मेला प्रशासन के बीच चल रहा विवाद सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया है। इस विवाद में अब BJP की फायरब्रांड नेता उमा भारती (Uma Bharti) ने भी शंकराचार्य का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने शंकराचार्य से सबूत मांगकर अपनी मर्यादा का उल्लंघन किया।

उमा भारती का समर्थन:
उमा भारती ने स्पष्ट किया कि शंकराचार्य का अपमान किसी भी सूरत में सहन नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “शंकराचार्य का सम्मान हर हिंदू के लिए अहम है। प्रशासन द्वारा उनके अधिकारों और मर्यादा का उल्लंघन गंभीर है।” उनका यह बयान सरकार के लिए नई राजनीतिक चुनौती बन गया है।

सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे का असर:
बरेली (Bareilly) में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri) के इस्तीफे के बाद शंकराचार्य ने सरकार पर हमलावर रुख अपना लिया है। उन्होंने कहा कि आज की लड़ाई हिंदू-मुसलमान या अंग्रेज-भारतीय की नहीं है, बल्कि नकली और असली हिंदू के बीच है। शंकराचार्य ने बताया कि उनकी सिटी मजिस्ट्रेट से फोन पर बातचीत हुई, जिसमें अधिकारी ने कहा कि अत्याचारी सरकार का अंग बनना उन्हें भी पाप में डाल देगा। इसलिए सरकार का हिस्सा बनकर काम करना मुश्किल हो गया था।

माघ मेला प्रशासन की प्रतिक्रिया:
अयोध्या (Ayodhya) के छावनी धाम के परमहंस महाराज ने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद और सतुआ बाबा ने माघ मेले की छवि को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने मांग की कि दोनों पर माघ मेले में आने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। परमहंस महाराज ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की आवश्यकता है।

विवाद की पृष्ठभूमि:
माघ मेला प्रशासन और शंकराचार्य के बीच विवाद लगभग 10 दिनों से चल रहा है। 18 जनवरी को शंकराचार्य पालकी में स्नान करने जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें रोककर पैदल जाने को कहा। इस दौरान शिष्यों और प्रशासन के बीच धक्का-मुक्की और मारपीट हुई। इसके बाद प्रशासन ने शंकराचार्य को दो नोटिस जारी किए। एक में उनकी पदवी और दूसरे में मौनी अमावस्या के दिन हंगामा करने के आरोप थे। चेतावनी दी गई कि माघ मेले से उन्हें बैन किया जा सकता है। शंकराचार्य ने दोनों नोटिसों का जवाब दिया और अपनी स्थिति स्पष्ट की।

वकीलों और समाजिक समर्थन:
प्रयागराज (Prayagraj) हाईकोर्ट के वकील भी शंकराचार्य के समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने पोस्टर जारी करके कहा कि असहमति हो सकती है, अपमान नहीं। इस कदम से विवाद में और भी जोर आ गया है।

UGC नियम और मजिस्ट्रेट का इस्तीफा:
UGC (University Grants Commission) के नए नियमों के विरोध में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने 26 जनवरी को इस्तीफा दे दिया। हालांकि, रात में उनके इस्तीफे को नामंजूर कर उन्हें सस्पेंड कर दिया गया और जांच के आदेश जारी किए गए। शंकराचार्य और मजिस्ट्रेट का यह कदम प्रशासन और सरकार के लिए नई चुनौती बन गया है।

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