Video: IAS संतोष वर्मा के बयान पर ब्राह्मण समाज का प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर की कार्रवाई की मांग


रिपोर्टर: हसीन अंसारी

उत्तर प्रदेश, गाज़ीपुर ।
ब्राह्मण जनसेवा मंच (रजि.), गाज़ीपुर द्वारा एक पूर्व आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा (Santosh Verma), जो वर्तमान में AJAJKS (SC-ST अधिकारी-कर्मचारी संगठन) के प्रांत अध्यक्ष, मध्य प्रदेश बताए जाते हैं, के विवादित और आपत्तिजनक कथनों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई। मंच ने इन टिप्पणियों को सामाजिक विद्वेष, स्त्री-विरोध और जातिगत हिंसा को बढ़ावा देने वाला बताते हुए कहा कि यह बयान संविधान के मूल्यों पर गंभीर प्रहार है। इसी मुद्दे को लेकर मंच ने भारत की राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक पत्रक गाज़ीपुर के जिलाधिकारी के प्रतिनिधि एएसडीएम विनोद जोशी को प्रेषित किया।

विवादित बयान पर गहरा आक्रोश:
मंच के संयोजक प्रदीप कुमार चतुर्वेदी की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया कि विभिन्न समाचार माध्यमों में प्रसारित संतोष वर्मा के कथन—
“जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान न कर दे या उससे संबंध न बना दे, तब तक आरक्षण मिलना चाहिए।”
—ने पूरे समाज में आक्रोश पैदा किया है। ज्ञापन में इस कथन को पूरी तरह निंदनीय, अशोभनीय और सामाजिक ताने-बाने पर हमला बताया गया।

महिला-सम्मान पर गंभीर चोट:
ज्ञापन में कहा गया कि यह बयान न केवल ब्राह्मण समाज की बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और स्वतंत्रता पर गहरा प्रहार करता है, बल्कि भारतीय समाज की सांस्कृतिक मर्यादा और महिला-सम्मान को चोट पहुँचाने वाला है। मंच ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक मंच से दिया गया ऐसा बयान समाज में महिलाओं की गरिमा को कमतर करता है और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत है।

कानून और संविधान का उल्लंघन:
मंच ने इस टिप्पणी को स्त्री-विरोधी, जातिगत उकसावे वाली और सामाजिक वैमनस्य फैलाने वाली टिप्पणी बताते हुए कहा कि यह संविधान द्वारा प्रदत्त समानता तथा सामाजिक सद्भाव की भावना के विरुद्ध है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि ऐसा कथन दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है और कानून-व्यवस्था पर दुष्प्रभाव डाल सकता है।

राष्ट्रीय एकता पर खतरे का संकेत:
मंच ने कहा कि एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी द्वारा दिया गया यह बयान समाज के विभिन्न वर्गों के बीच अविश्वास, कटुता और संघर्ष की भावना को बढ़ावा दे सकता है, जिससे राष्ट्रीय एकता और सामाजिक शांति प्रभावित होने का खतरा है। मंच ने चेतावनी दी कि ऐसे विचार लोकतांत्रिक ढांचे के लिए चुनौती उत्पन्न करते हैं।

ज्ञापन के माध्यम से उठाई गई प्रमुख मांगें:

  1. संतोष वर्मा के बयान पर उपयुक्त धाराओं में कठोर दण्डात्मक कार्रवाई की जाए।
  2. समाज में शांति और सामंजस्य बनाए रखने के लिए एहतियातन उनकी गिरफ्तारी पर विचार किया जाए।
  3. भविष्य में महिलाओं की गरिमा के विरुद्ध सार्वजनिक रूप से दिए जाने वाले अपमानजनक बयानों के खिलाफ कठोर नीति बनाई जाए।

जिलाधिकारी को सौंपा गया पत्रक:
ब्राह्मण जनसेवा मंच ने राष्ट्रपति और जिलाधिकारी से अनुरोध किया कि महिला-सम्मान, सामाजिक सद्भावना और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा हेतु इस मामले में शीघ्र, निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसी क्रम में सरजू पाण्डेय पार्क से जिलाधिकारी कार्यालय तक मंच से जुड़े लोगों ने विरोध मार्च निकाला और “संतोष वर्मा मुर्दाबाद”, “संतोष वर्मा माफी मांगो” तथा “कड़ी कार्रवाई की मांग” जैसे नारे लगाए।

पत्रक सौंपने वालों में मनोज बाबा, वीरेंद्र नाथ पाण्डेय, दीपक उपाध्याय, शिवम उपाध्याय, अमित पाण्डेय, राजू उपाध्याय, सुधाकर पाण्डेय, विनीत दुबे, अंशु पाण्डेय, विनोद मिश्रा, सुधांशु तिवारी, दीपक पाण्डेय, निमेष पाण्डेय, बृजेन्द्र पाण्डेय, उमेश पाण्डेय मिठ्ठू पाण्डेय, गणेश तिवारी, अतुल पाण्डेय, अमित उपाध्याय, विक्की पाण्डेय, पप्पू पाण्डेय, रत्नाकर दुबे सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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