आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) ने पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि “रोज़गार दो–सामाजिक न्याय दो” अभियान का अंत नहीं, बल्कि शुरुआत हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान अब पूरे उत्तर प्रदेश में आठ चरणों में चलाया जाएगा। पहला चरण 25 दिसंबर से 29 दिसंबर तक रामपुर (Rampur), मुरादाबाद (Moradabad) और अमरोहा (Amroha) में आयोजित होगा। संजय सिंह ने अपील की कि पिछली यात्रा में शामिल न हो पाए लोग इस बार यात्रा का हिस्सा बनें और मिस्ड कॉल नंबर 75000 40004 पर कॉल करके पंजीकरण कराएं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की तानाशाही और एसआईआर जैसे चुनावी घोटालों के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा और संसद के शीतकालीन सत्र में आम आदमी पार्टी इसे पूरी ताकत से उठाएगी।
एसआईआर विवाद पर कड़ा प्रहार:
संजय सिंह (Sanjay Singh) ने एसआईआर को देश का सबसे बड़ा चुनावी घोटाला बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में एसआईआर के नाम पर गंभीर उत्पीड़न हो रहा है। उनके अनुसार, एसआईआर कार्रवाई में 17 बीएलओ की मौत हो चुकी है, 563 लोगों को नोटिस भेजे गए हैं, 181 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नौकरी खत्म कर दी गई है और हजारों परिवार भय और दमन का सामना कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब चुनाव डेढ़ साल बाद हैं तो सरकार को एक ही महीने में एसआईआर पूरा करने की क्या मजबूरी है? क्या यह सुधार है या विपक्ष और वंचित समाज को वोटर लिस्ट से हटाने की साजिश? संजय सिंह का कहना है कि बेरोजगारी, पेपर लीक और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर सरकार जानबूझकर चुप है और लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
पदयात्रा को मिला जबरदस्त जनसमर्थन:
संजय सिंह (Sanjay Singh) ने “रोज़गार दो–सामाजिक न्याय दो” पदयात्रा की सफलता को लेकर कहा कि 13 दिनों की यह यात्रा एक बड़े जनआंदोलन में तब्दील हो गई है। उन्होंने बताया कि छात्रों, नौजवानों, मनरेगा मजदूरों, बुनकरों, आशा बहुओं, वितरित शिक्षकों, रोजगार सेवकों और समाज के हर वर्ग ने इस यात्रा को समर्थन दिया। प्रयागराज (Prayagraj) में इलाहाबाद विश्वविद्यालय (Allahabad University) के छात्रों का मिला विशाल समर्थन और रास्तेभर जनता द्वारा किया गया स्वागत यह साबित करता है कि उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी और सामाजिक न्याय की मांग आज सबसे गंभीर मुद्दा बन चुके हैं। संजय सिंह के अनुसार, जब स्कूल बंद होने लगें, अस्पतालों में मोमबत्ती की रोशनी में ऑपरेशन हों, और पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों पर लाठीचार्ज हो तो ऐसे में सड़क पर उतरना जनता का लोकतांत्रिक अधिकार बन जाता है।
वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर कटौती का आरोप:
एसआईआर प्रकरण को लेकर संजय सिंह (Sanjay Singh) ने कहा कि बिहार से उत्तर प्रदेश तक लाखों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। बिहार में 80 लाख नामों को हटाया गया है, और कई विधानसभा क्षेत्रों में 50 से 60 हजार वोट काटे जा रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रिटायर्ड आईएएस विद्यासागर और उनकी पत्नी का नाम भी वोटर लिस्ट से हटा दिया गया, जबकि वे हमेशा से स्थानीय निवासी रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इसका मतलब यह है कि वे भी ‘घुसपैठिए’ हैं? उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त अज्ञानेश कुमार (Agyanesh Kumar) पर भाजपा सरकार का एजेंडा लागू करने का आरोप लगाया और कहा कि एसआईआर के दबाव में सरकारी कर्मचारी आत्महत्या तक कर रहे हैं। संजय सिंह ने कहा कि 17 बीएलओ की मौत की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
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