यूपी के मेरठ जिले की सरधना विधानसभा सीट से विधायक रह चुके संगीत सोम एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार वजह शाहरुख खान की IPL टीम केकेआर में शामिल बांग्लादेशी खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान को लेकर दिया गया बयान है, जिसमें उन्होंने खिलाड़ी को बाहर किए जाने की मांग की। इसके बाद बांग्लादेश से जुड़े विरोध और प्रतिक्रियाओं के बीच सरधना से मौजूदा सपा विधायक अतुल प्रधान ने संगीत सोम के अतीत के कारोबारी रिकॉर्ड को लेकर उन पर तीखा हमला बोला। अतुल प्रधान ने दस्तावेज सामने रखकर सवाल उठाए कि क्या संगीत सोम कभी मीट कारोबार से जुड़े रहे हैं और अगर हां, तो उनकी भूमिका क्या थी।
कॉर्पोरेट रिकॉर्ड में संगीत सोम का नाम: मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स (Ministry of Corporate Affairs) के उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, संगीत सिंह सोम अल दुआ फूड प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (Al Dua Food Processing Private Limited) में 22 दिसंबर 2005 से 27 मार्च 2008 तक डायरेक्टर रहे। यह कंपनी मोइनुद्दीन कुरैशी और योगेश रावत के साथ मिलकर स्थापित की गई थी। कंपनी की गतिविधियों में भैंस, भेड़ और बकरी के मीट व खाल का प्रसंस्करण और निर्यात शामिल बताया गया है, जिसकी सप्लाई मुख्य रूप से अरब देशों में की जाती थी।
रिकॉर्ड बताते हैं कि वर्ष 2005-06 में कंपनी को 4 लाख रुपए का अन-सिक्योर्ड लोन भी मिला था। मार्च 2008 में संगीत सोम ने अपने 20 हजार शेयर नसीरा बेगम को ट्रांसफर कर दिए, जिसके बाद कंपनी से उनका प्रत्यक्ष संबंध समाप्त हो गया।

अन्य फूड और एग्रो कंपनियों से जुड़ाव: दस्तावेजों के अनुसार, संगीत सोम अल-अनम एग्रो फूड्स प्राइवेट लिमिटेड (Al Anam Agro Foods Private Limited) में भी अतिरिक्त निदेशक रहे हैं। यह कंपनी भी मोइनुद्दीन कुरैशी से जुड़ी बताई जाती है। इसके अलावा तेजस ऑयल कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (Tejas Oil Company Private Limited) में उनके डायरेक्टर होने का रिकॉर्ड सामने आता है। यह कंपनी मांस, मछली, फल, सब्जियां, तेल और वसा के प्रसंस्करण और संरक्षण के कार्य से जुड़ी बताई जाती है।

निर्माण और फिल्म कंपनियों में डायरेक्टरशिप: फूड सेक्टर के अलावा संगीत सोम का नाम ब्लूमिंग बिल्ड टेक प्राइवेट लिमिटेड (Blooming Build Tech Private Limited), बाबा फैब्रिकेशन प्राइवेट लिमिटेड (Baba Fabrication Private Limited), तेजर्शिता बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड (Tejarshita Builders Private Limited) और तेज फिल्म प्रोडक्शन प्राइवेट लिमिटेड (Tej Film Production Private Limited) जैसी कंपनियों में भी डायरेक्टर के तौर पर दर्ज है। इससे यह संकेत मिलता है कि उनका कारोबारी अनुभव सिविल वर्क और फिल्म प्रोडक्शन तक फैला हुआ रहा है।
संगीत सोम फरवरी 2011 से दिसंबर 2016 तक यमुना बेवरेज प्राइवेट लिमिटेड (Yamuna Beverage Private Limited) में भी डायरेक्टर रहे। इस कंपनी का काम वाइन मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ा बताया गया है।

परिवार के सदस्यों की भूमिका: दस्तावेजों के मुताबिक, संगीत सोम की पत्नी सिमरन ठाकुर भी कई कंपनियों में डायरेक्टर रह चुकी हैं। इनमें तेजस ऑयल कंपनी के साथ जय साईं फूड एंड बेवरेज प्राइवेट लिमिटेड (Jai Sai Food and Beverage Private Limited), तेजर्शिता बिल्डर्स, श्री हंस ग्लासेस प्राइवेट लिमिटेड (Shri Hans Glasses Private Limited) शामिल हैं। इसके अलावा वे यमुना बेवरेज और बाबा फैब्रिकेशन जैसी कंपनियों में भी डायरेक्टर रही हैं।
जमीन कब्जे और सुरक्षा दुरुपयोग के आरोप: समाजवादी पार्टी विधायक अतुल प्रधान ने आरोप लगाया कि संगीत सोम की कंपनियां मीट प्रोसेसिंग से जुड़ी रही हैं और उन्होंने गरीबों की जमीन व सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा किया। अतुल प्रधान का दावा है कि करीब 66 करोड़ रुपए की सरकारी जमीन पर कब्जा किया गया और इसके लिए केंद्र सरकार से मिली सुरक्षा का दुरुपयोग हुआ, जिस पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च होते हैं। उन्होंने संगीत सोम की राजनीतिक छवि पर सवाल उठाते हुए जांच और सुरक्षा वापस लेने की मांग भी की।
सरधना सीट का राजनीतिक समीकरण: सरधना विधानसभा सीट पश्चिमी यूपी की अहम सीटों में गिनी जाती है। यहां कुल मतदाता लगभग साढ़े तीन लाख हैं। मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 85 से 90 हजार के बीच बताई जाती है, जबकि ठाकुर मतदाता 60 से 65 हजार और दलित मतदाता 40 से 45 हजार के करीब हैं। इसके अलावा जाट, गुर्जर, ब्राह्मण और त्यागी समुदाय की भी अच्छी उपस्थिति है।
संगीत सोम ने 2012 और 2017 में यहां से जीत दर्ज की थी, लेकिन 2022 के चुनाव में अतुल प्रधान ने उन्हें 18,200 वोटों के अंतर से हराया। इसके बाद से दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक टकराव लगातार बना हुआ है।
ताजा विवाद की पृष्ठभूमि: कपसाड़ कांड, जिसमें दलित मां-बेटी पर हमला हुआ और मां की हत्या व बेटी के अपहरण का मामला सामने आया, के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया। अतुल प्रधान पीड़ित परिवार के समर्थन में खड़े हुए और इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर संगीत सोम पर गंभीर आरोप लगाए। इसी कड़ी में उनके पुराने कारोबारी रिकॉर्ड एक बार फिर सियासी बहस का विषय बन गए हैं।
2015 में भी प्रकाशित हुई थी रिपोर्ट:
09 अक्टूबर 2015 को हिंदुस्तान टाइम्स में एक खबर प्रकाशित हुई जिसमें लिखा था: हिंदुस्तान टाइम्स द्वारा प्राप्त रजिस्ट्री दस्तावेजों के अनुसार, बीजेपी के फायरब्रांड नेता Sangeet Som ने वर्ष 2005 में दो अन्य लोगों के साथ मिलकर अलीगढ़ में एक मीट प्रोसेसिंग यूनिट के लिए जमीन खरीदी थी।
दस्तावेजों के मुताबिक, Sangeet Som मार्च 2008 तक Al Dua Food Processing Private Limited के निदेशकों (Director) में शामिल थे। इस कंपनी में उनके साथ Moinuddin Qureshi और Yogesh Rawat भी निदेशक थे। रजिस्ट्री रिकॉर्ड से यह भी सामने आया है कि कंपनी के लिए जमीन Som द्वारा ही खरीदी गई थी।

इस मामले पर Hindustan Times से बातचीत में Sangeet Som ने स्वीकार किया कि उन्होंने कुछ वर्ष पहले जमीन खरीदी थी, लेकिन यह दावा किया कि उन्हें कंपनी का निदेशक बनाए जाने की जानकारी नहीं थी।
उन्होंने कहा, “मैंने जमीन खरीदी थी, जिसे कुछ महीनों बाद Al Dua Food Processing Private Limited को बेच दिया गया। जमीन खरीदना कोई गैरकानूनी काम कैसे हो सकता है?”
Som ने यह भी कहा कि जमीन खरीदने का मतलब यह नहीं है कि वह मीट फैक्ट्री की स्थापना में शामिल थे।
उन्होंने खुद को “कट्टर हिंदू” बताते हुए कहा, “मैं एक Hindu hardliner हूं, इसलिए मेरे धर्म के खिलाफ किसी भी गतिविधि में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता।”
Som ने यह दावा भी किया कि यदि फैक्ट्री में उनकी भूमिका साबित हो जाती है तो वह राजनीति छोड़ देंगे।
हालांकि, Al Dua की वर्ष 2007 की वार्षिक रिपोर्ट (Annual Report) में यह दर्ज है कि Sangeet Som 12 दिसंबर 2005 से कंपनी के निदेशक थे और उन्होंने मार्च 2008 में इस पद से इस्तीफा दिया। रजिस्ट्री दस्तावेज यह भी बताते हैं कि अलीगढ़ की जमीन 26 दिसंबर 2005 को खरीदी गई थी, उस समय Som कंपनी के निदेशकों में शामिल थे।
Al Dua की वेबसाइट के अनुसार, यह कंपनी खुद को भारत से “हलाल मीट का अग्रणी उत्पादक और निर्यातक” बताती है। वेबसाइट पर यह भी कहा गया है कि कंपनी “गुणवत्तापूर्ण हलाल भैंस, भेड़/लैम्ब, बकरी के मांस और खाल के निर्यात” में विशेषज्ञ है।
इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए Sangeet Som ने समाजवादी पार्टी के नेता Atul Pradhan पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि Pradhan ने पिछले विधानसभा चुनाव में Sardhana सीट से उनके खिलाफ चुनाव लड़ा था और चुनाव से पहले उनकी छवि खराब करने के लिए इसी तरह का विवाद खड़ा किया गया था।
Som का यह भी दावा है कि आरोप लगने के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच की थी, लेकिन उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला। गौरतलब है कि Sangeet Som पहले भी कई विवादों में रहे हैं और वह वर्ष 2013 के Muzaffarnagar riots मामले में भी आरोपियों में शामिल हैं।
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Disclaimer: यह खबर स्थानीय संवाददाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एक प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म के पत्रकार ने संगीत सोम से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com।
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