आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव से पहले सपा को झटका?

आजमगढ़ | लोकसभा उपचुनाव में अब गिनती के कुछ दिन बचे हैं. ऐसे में समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) या भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सबने चुनाव जीतने के लिए अपनी सारी ताकत लगा दी हैं. एक ओर बीजेपी प्रत्याशी दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ के प्रचार के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ समेत पूरा मंत्रिमंडल ने आजमगढ़ को मथ दिया है.

वहीं, सपा के रामगोपाल से लेकर आजम खान तक जैसे नेता आजमगढ़ आ चुके हैं. वहीं, बीएसपी प्रत्याशी गुड्डू जमाली अपने पूरे ताम-झाम के साथ माहौल बना रहे हैं. इन सबके बीच बीजेपी ने चुनाव से ठीक पहले अखिलेश यादव की सपा को बड़ा झटका दिया. दरअसल, चुनाव से ठीक पहले बीजेपी ने पूर्व विधायक कल्पनाथ पासवान को अपने पाले में शामिल कर लिया. एक बड़े आयोजन के दौरान ये किया गया. कल्पनाथ को खुद उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने पार्टी ज्वॉइन कराई है.

बता दें कि 2017 में सपा से कल्पनाथ पासवान विधायक थे और वह मेंहनगर इलाके में राजनीतिक पकड़ रखते हैं, जो अपने आप सपा के लिए मजबूत गढ़ माना जाता है. ऐसे में बीजेपी ने आजमगढ़ के अंदर सपा के गढ़ में चोट करने की कोशिश की है. अब रही बात कि कल्पनाथ पासवान के जाने से कितना असर पड़ेगा. आजमगढ़ के अगर जातीय समीकरण को देखें, तो करीब 25 फीसदी आबादी दलित समुदाय की है. इसमें गैर जाटव की संख्या भी अच्छी खासी है. सपा और बीजेपी दोनों इस गैर जाटव वोट पर अपना फोकस कर रही है, क्योंकि जाटव वोट पर बीएसपी की अच्छी पकड़ मानी जाती है.

दलित वोट का महत्व इससे समझ सकते हैं कि चुनाव से पहले सपा ने सुशील आनंद को उम्मीदवार बनाया था. बाद उनके स्थान पर धर्मेंद्र यादव को टिकट दिया गया. ऐसे में कल्पनाथ पासवान का समुदाय काफी महत्वपूर्ण हो जाता है. दरअसल, जाटव, मुस्लिम और यादव के अलावा 40 फीसदी संख्या क्षत्रिय, ब्राह्मण, कायस्थ, भूमिहार, राजभर, पासी, कोइरी, खटिक जैसे समुदाय से आते हैं और कल्पनाथ पासवन पासी समुदाय से आते हैं. आजमगढ़ का कुछ इलाका है, जहां इस समुदाय का काफी महत्व है. ऐसे में बीजेपी गैर जाटव दलित समुदाय को एक किस्म से संदेश देने की कोशिश कर रही है.

हालांकि, ये इतना आसान नहीं है क्योंकि इस समुदाय के नेता इंद्रजीत सरोज सपा के लिए काम कर रहे हैं. अब देखने होगा कि चुनाव से ठीक पहले इस तोड़ से बीजेपी कितना कुछ फायदा उठा पाती है.

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