नई दिल्ली | विभिन्नताओं के देश में इस वक्त विभिन्न मसलों पर जमकर बहस हो रही है, उसमे एक मुद्दा मुसलमान है। जी हाँ, अब औरंगजेब की बहस के बाद आरक्षण की बहस जोरो पर है। राज्यसभा में सोमवार को कर्नाटक में सरकारी ठेकों में मुस्लिमों को आरक्षण देने के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ सदन में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर एक के बाद एक आरोप लगाए। जिनका कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान को कोई नहीं बदल सकता। हम संविधान की रक्षा करने वाले लोग हैं। हम ही वे लोग हैं जिन्होंने कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत जोड़ो यात्रा की थी और भाजपा वाले वे लोग हैं जो भारत तोड़ो में विश्वास करते हैं। उन्होंने आगे बोलने की कोशिश की लेकिन भाजपा सांसदों की नारेबाजी के कारण बार-बार उनकी बात बाधित हुई। खरगे ने कहा कि हम भारतीय संविधान के रक्षक हैं।
खरगे के जवाब के बाद भी हंगामा जारी रहा। इसके बाद कार्यवाही को दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। फिर सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सभापति जगदीप धनखड़ ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को बोलने का मौका दिया। रिजिजू ने कहा कि एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता जो सांविधानिक पद पर हैं, ने कहा है कि पार्टी मुसलमानों को आरक्षण देने के लिए संविधान बदल देगी। हम इस बयान को हल्के में नहीं ले सकते। यह बयान किसी आम पार्टी नेता की ओर से नहीं बल्कि सांविधानिक पद पर बैठे किसी व्यक्ति की ओर से आया है। यह बेहद गंभीर है।
उन्होंने कहा कि धर्म आधारित आरक्षण देने के लिए संविधान में बदलाव करना बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। कांग्रेस नेता संविधान की किताब जेब में रखते हैं, लेकिन इसे कमजोर करने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष को पार्टी की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और सदन और देश को बताना चाहिए कि कांग्रेस मुसलमानों को आरक्षण देने के लिए संविधान में बदलाव क्यों करना चाहती है?