गाजीपुर। विजयादशमी के पर्व पर गाजीपुर का लंका मैदान भक्तिभाव और उत्साह से सराबोर नजर आया। दशहरा महोत्सव के अंतर्गत आयोजित रावण दहन कार्यक्रम ने लोगों को एक ऐतिहासिक और धार्मिक वातावरण से जोड़े रखा। परम्परागत परंपरा का निर्वाह करते हुए पहले रामलीला का मंचन किया गया, जिसमें राम और रावण के बीच हुए युद्ध का जीवंत चित्रण प्रस्तुत किया गया। युद्ध दृश्य देखकर उपस्थित भीड़ मंत्रमुग्ध हो गई और वातावरण जयघोष से गूंज उठा। इसके बाद पूरे उत्साह और जोश के साथ रावण का पुतला दहन किया गया, जिसे देखने के लिए हजारों लोग मौजूद थे।
रामलीला का मंचन:
रावण दहन से पहले की परंपरा के अनुसार रामलीला का आयोजन किया गया। मंच पर कलाकारों ने श्रीराम और रावण के बीच हुए युद्ध को मंचित किया। तीर-कमान से सजे दृश्य और पात्रों की अदायगी ने वातावरण को भक्ति और ऊर्जा से भर दिया। दर्शकों ने इस अद्भुत प्रस्तुति का आनंद लिया और राम के विजय की प्रतीक्षा करते रहे।
60 फीट ऊंचे रावण का दहन:
रामलीला मंचन के उपरांत मैदान में तैयार 60 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। रावण के साथ-साथ आतिशबाजी की गूंज और रोशनी ने पूरे माहौल को दिव्य और उल्लासमय बना दिया। पुतले के जलते ही मैदान जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा और हजारों की भीड़ ने इस दृश्य को अपनी आंखों में संजो लिया।
डीएम ने दबाया स्विच:
रावण दहन कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वह क्षण रहा जब गाजीपुर के जिलाधिकारी ने इलेक्ट्रिक स्विच दबाकर रावण के पुतले का दहन किया। जैसे ही पुतले में आग लगी, लोगों का उत्साह चरम पर पहुंच गया और हर ओर खुशी का माहौल छा गया।
जनता की भारी भागीदारी:
इस धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। मैदान में उपस्थित जनता ने अपने जयघोष और उत्साह से पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सभी इस पावन अवसर का हिस्सा बने।
हर्ष और उल्लास का माहौल:
पूरे आयोजन के दौरान गाजीपुर का लंका मैदान आनंद और उत्साह से भरा रहा। रावण दहन के क्षण ने न केवल बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया बल्कि समाज को यह भी याद दिलाया कि परंपराएं और संस्कृति आज भी जनमानस के जीवन का अहम हिस्सा हैं।