Ghazipur News: राशन कार्ड में हेराफेरी! कोटेदार पर फर्जीवाड़े का आरोप…

गाजीपुर जनपद के मुहम्मदाबाद तहसील क्षेत्र में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। भांवरकोल विकासखंड के ग्राम महेशपुर द्वितीय में राशन कार्ड से जुड़ी अनियमितताओं और अवैध वसूली के आरोप लगाए गए हैं। गांव निवासी शिवशंकर सिंह यादव ने पूरे मामले की लिखित शिकायत उपजिलाधिकारी मुहम्मदाबाद को सौंपते हुए कोटेदार की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। शिकायत में राशन वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश और चिंता का माहौल है।

गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन का दावा:
शिकायतकर्ता शिवशंकर सिंह यादव ने अपने शिकायती पत्र में उल्लेख किया है कि वह गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाला व्यक्ति है और सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाले राशन पर उसका परिवार निर्भर है। आरोप है कि इसी स्थिति का लाभ उठाते हुए ग्राम के कोटेदार रामजी सिंह यादव ने उसके राशन कार्ड में हेराफेरी की। शिकायतकर्ता के अनुसार राशन कार्ड से संबंधित रिकॉर्ड में जानबूझकर बदलाव कर उसे योजनाओं के वास्तविक लाभ से वंचित किया गया।

फर्जी कुटुंब रजिस्टर की नकल का आरोप:
शिकायत में कहा गया है कि कोटेदार द्वारा फर्जी कुटुंब रजिस्टर की नकल तैयार की गई। इस कथित फर्जीवाड़े के तहत शिकायतकर्ता के पुत्र का नाम कोटेदार के स्वयं के राशन कार्ड में दर्ज कर दिया गया। वहीं शिकायतकर्ता की बहू का नाम किसी अन्य परिवार के राशन कार्ड में अंकित कर दिया गया। आरोप है कि इस तरह की गई हेराफेरी से वर्षों तक गलत तरीके से राशन उठाया जाता रहा।

पांच वर्षों से अवैध रूप से राशन लेने का दावा:
शिकायतकर्ता का कहना है कि फर्जी प्रविष्टियों के आधार पर बीते लगभग पांच वर्षों से अवैध रूप से राशन का लाभ लिया जा रहा है। इस दौरान वास्तविक पात्र परिवार को उसका हक नहीं मिल पाया। आरोपों के अनुसार यह पूरा मामला सुनियोजित तरीके से किया गया, जिससे सरकारी अनाज का दुरुपयोग हुआ और पात्र व्यक्ति को नुकसान झेलना पड़ा।

राशन कार्ड बनवाने के नाम पर अवैध वसूली:
मामले में अवैध वसूली का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार कोटेदार ने उसका राशन कार्ड निरस्त कर नया राशन कार्ड बनवाने के नाम पर 1600 रुपये की मांग की और यह राशि वसूल भी ली। इसके बावजूद न तो नया राशन कार्ड बनाया गया और न ही नियमित रूप से राशन उपलब्ध कराया गया। इस आरोप ने पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया है।

मृत व्यक्तियों के नाम पर लाभ लेने का आरोप:
शिकायती पत्र में यह भी कहा गया है कि कोटेदार द्वारा अपने राशन कार्ड में कई मृत व्यक्तियों के नाम अब तक दर्ज दिखाए जा रहे हैं। आरोप है कि इन नामों के सहारे भी राशन उठाकर उसका लाभ लिया जा रहा है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सार्वजनिक वितरण प्रणाली के नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग:
पीड़ित ने उपजिलाधिकारी मुहम्मदाबाद से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषी पाए जाने पर संबंधित कोटेदार के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता ने यह भी मांग की है कि उसका नया राशन कार्ड तत्काल बनवाया जाए, ताकि उसे और उसके परिवार को योजनाओं का लाभ मिल सके।

प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी नजरें:
इस प्रकरण के सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। ग्रामीणों की नजरें अब प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली में विश्वास बहाल होने की उम्मीद की जा रही है।

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