उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने स्वामी रामकृष्ण परमहंस को दी श्रद्धांजलि

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) ने स्वामी रामकृष्ण परमहंस (Swami Ramakrishna Paramhansa) की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। लखनऊ (Lucknow) स्थित सात-कालिदास मार्ग पर उनके कैम्प कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने स्वामी रामकृष्ण परमहंस के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके जीवन व विचारों को नमन किया।

A person in traditional attire performing a prayer in front of a floral altar featuring a portrait and decorations.

जयंती पर श्रद्धासुमन अर्पित:
सात-कालिदास मार्ग स्थित कैम्प कार्यालय में आयोजित इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने स्वामी रामकृष्ण परमहंस के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि स्वामी रामकृष्ण परमहंस भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के ऐसे महान संत थे, जिन्होंने अपने जीवन के माध्यम से समाज को नई दिशा दी। उनका संपूर्ण जीवन ईश्वरभक्ति, करुणा और मानव सेवा के लिए समर्पित रहा।

जीवन रहा भक्ति और सेवा का प्रतीक:
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी रामकृष्ण परमहंस का जीवन केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें मानवता के प्रति गहरी संवेदना भी निहित थी। उन्होंने अपने विचारों और आचरण से समाज को प्रेम, सहिष्णुता और आत्मबोध का संदेश दिया। उनके उपदेशों में सभी धर्मों के प्रति सम्मान और समरसता की भावना स्पष्ट दिखाई देती है।

आज भी प्रासंगिक हैं शिक्षाएं:
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि स्वामी रामकृष्ण परमहंस की शिक्षाएं और जीवन दर्शन आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके जीवनकाल में थे। तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश में उनके विचार समाज को नैतिक मूल्यों, सद्भाव और एकता की ओर अग्रसर करने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी जी का संदेश समाज में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक जागरूकता का संचार करता है।

राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा:
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी रामकृष्ण परमहंस के जीवन और विचारधारा से प्रेरणा लेकर प्रत्येक व्यक्ति को समाज के उत्थान और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देना चाहिए। उनका जीवन यह सिखाता है कि आध्यात्मिकता और सामाजिक जिम्मेदारी एक-दूसरे के पूरक हैं। जब व्यक्ति आत्मबोध और नैतिकता को अपने जीवन में उतारता है, तब समाज और राष्ट्र दोनों सशक्त होते हैं।

कार्यक्रम के दौरान स्वामी रामकृष्ण परमहंस के आदर्शों को स्मरण करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया गया। जयंती के इस अवसर पर उनके योगदान को याद करते हुए समाज में सद्भाव, प्रेम और सेवा की भावना को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।


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