अयोध्या (Ayodhya) के राम मंदिर में 25 नवंबर 2025 को होने वाला ध्वजारोहण कार्यक्रम ऐतिहासिक और आस्था से परिपूर्ण क्षण माना जा रहा है। इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा मंदिर के शिखर पर केसरिया धर्मध्वज फहराया जाएगा। यह आयोजन विवाह पंचमी के पावन दिन पर संपन्न हो रहा है, जो राम–सीता विवाह की दिव्य स्मृति से जुड़ा है। मंदिर निर्माण की पूर्णता का प्रतीक यह अनुष्ठान भक्तों की आस्था, श्रद्धा और सनातन संस्कृति की भव्यता को दर्शाता है। ऐसा माना जाता है कि ध्वजारोहण से मंदिर परिसर में दैवीय ऊर्जा का संचार होता है, जो हिंदू परंपराओं में अत्यंत शुभ मानी जाती है।
ध्वजारोहण का निर्धारण किया गया मुहूर्त:
यह अनुष्ठान 25 नवंबर 2025 को अभिजीत मुहूर्त में आयोजित हो रहा है। यह मुहूर्त दिन का अत्यंत शुभ काल माना जाता है, जिसमें कार्य सिद्ध और निर्विघ्न संपन्न होते हैं। निर्धारित समय के अनुसार यह अवधि दोपहर लगभग 11:45 बजे से प्रारंभ होकर 12:29 बजे तक चलेगी। ज्योतिषीय गणनाओं में इस समय की अवधि 44 मिनट बताई गई है। अयोध्या (Ayodhya) में यह मुहूर्त विशेष रूप से इसी कारण चुना गया है कि अभिजीत काल में किए गए धार्मिक कार्य अत्यंत फलदायी माने जाते हैं।
धर्मध्वज का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व:
धर्मध्वज, जिसे केसरिया ध्वज कहा जाता है, मंदिर की पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार मंदिर का शिखर वह स्थान है जहां दिव्य ऊर्जा का संचार सर्वाधिक रहता है और यहीं पर ध्वज फहराना आस्था और शक्ति का संकेत होता है। यह ध्वज नकारात्मक शक्तियों को दूर करने वाला माना जाता है तथा दूर से ही देवता की उपस्थिति का संकेत देता है। राम मंदिर में फहराया जाने वाला ध्वज सूर्यवंशी राम की परंपरा और मर्यादा का द्योतक है, जिसमें ‘ओम’, सूर्य का प्रतीक चिन्ह और कोविदार वृक्ष जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक चिह्न अंकित हैं। ध्वज की लंबाई 22 फीट और चौड़ाई 11 फीट है, जिसे 42 फीट ऊंचे ध्वजदंड पर स्थापित किया जाएगा। ध्वजदंड में 360 डिग्री घूमने की व्यवस्था भी की गई है, जिससे ध्वज हर दिशा में लहराता दिखाई देगा।
धार्मिक ग्रंथ श्रीरामचरितमानस में भी ध्वज को मंगल और कल्याणकारी बताया गया है, जो त्रेता युग की स्मृतियों को पुनर्जीवित करता है और जनमानस को दिव्यता का अनुभव कराता है।
ध्वजारोहण से जुड़े सांस्कृतिक संदेश:
राम मंदिर में होने वाला यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि देश की सांस्कृतिक अस्मिता, परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक भी है। विवाह पंचमी के शुभ अवसर पर होने वाला यह ध्वजारोहण विश्वभर के राम भक्तों के लिए गौरव का क्षण है। यह कार्यक्रम मंदिर निर्माण के पूर्ण होने और वर्षों से चली आ रही आस्थाओं के साकार होने का प्रतीक माना जा रहा है।
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