रिपोर्टर: अमित कुमार
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बलिया (Ballia) जनपद में सुभासपा (SBSP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के बयानों ने राजनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। बलिया जिले के फेफना (Fefna) विधानसभा क्षेत्र के करनई गांव में आयोजित एक निजी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सरकार से डिप्टी सीएम पद को संवैधानिक दर्जा देने की मांग उठाई। इसके साथ ही मनरेगा का नाम बदलने को लेकर कांग्रेस के देशव्यापी आंदोलन पर उन्होंने महात्मा गांधी से जुड़े नाम परिवर्तन को लेकर विवादित टिप्पणी भी की। उनके इन बयानों के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
डिप्टी सीएम पद को संवैधानिक बनाने की मांग:
कार्यक्रम के दौरान ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि डिप्टी सीएम का पद केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक होना चाहिए। उनका कहना था कि अब जनता पहले से अधिक शिक्षित हो चुकी है और लोगों में राजनीतिक चेतना भी बढ़ी है। ऐसे में यह मांग स्वाभाविक है कि डिप्टी सीएम के पद को भी संवैधानिक मान्यता मिले। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ किसी दल की नहीं, बल्कि आम जनता की उठती हुई आवाज है, जिसे गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
राजभर ने यह भी कहा कि जब देश में प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की बात होती है, तो डिप्टी सीएम जैसे अहम पद को संवैधानिक आधार मिलना समय की जरूरत है। इससे शासन व्यवस्था में स्पष्टता आएगी और जिम्मेदारियों का बेहतर निर्वहन संभव हो सकेगा।
मनरेगा नाम परिवर्तन पर विवादित टिप्पणी:
मनरेगा का नाम बदले जाने को लेकर कांग्रेस द्वारा 5 जनवरी से शुरू किए जाने वाले देशव्यापी आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए ओमप्रकाश राजभर ने तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रपिता हैं और उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अब 100 दिन के काम को बढ़ाकर 325 दिन किया जा रहा है और मजदूरी का भुगतान, जो पहले महीनों में होता था, अब सात दिनों में हो रहा है।
राजभर ने कहा कि जब दुनिया राम-राम कर रही है और अगर किसी योजना का नाम “जी राम जी” रखा गया है, तो इसमें बुरा क्या है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी सभी के पिता समान हैं, उन्हें इग्नोर करने की बात सही नहीं है। साथ ही उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कपड़े पुराने हो जाने पर बदले जाते हैं, वैसे ही समय के अनुसार बदलाव जरूरी होता है। इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है।
घोसी उपचुनाव पर भी रखी राय:
घोसी (Ghosi) उपचुनाव को लेकर भी ओमप्रकाश राजभर ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि एनडीए (NDA) जिसे भी उम्मीदवार बनाएगा, वही चुनाव लड़ेगा। इस दौरान उन्होंने यह भी साफ किया कि उनके बेटे अरविंद राजभर घोसी से चुनाव नहीं लड़ेंगे। उनके इस बयान से उपचुनाव को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगता नजर आया।
राजभर ने कहा कि गठबंधन में सभी दल मिलकर फैसला लेते हैं और एनडीए का निर्णय ही अंतिम होगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि गठबंधन की एकजुटता ही चुनावी सफलता की कुंजी है।
राजनीतिक बयान से बढ़ी चर्चा:
ओमप्रकाश राजभर के इन बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। डिप्टी सीएम पद को संवैधानिक बनाने की मांग हो या मनरेगा नाम परिवर्तन को लेकर दी गई टिप्पणी, दोनों ही मुद्दे आने वाले समय में राजनीतिक बहस का केंद्र बने रह सकते हैं। वहीं घोसी उपचुनाव को लेकर उनके बयान से सियासी समीकरणों पर भी असर पड़ता दिख रहा है।
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