रिपोर्टर: हसीन अंसारी
गाजीपुर में रेलवे ने अपनी जमीन पर किए गए अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की। जोनल रेलवे ट्रेनिंग सेंटर के पास स्थित रेलवे भूमि पर बने अस्थायी ढांचों को बुलडोजर की मदद से हटाया गया। यह कार्रवाई पूर्व सूचना और नोटिस के बावजूद अतिक्रमण न हटाने के बाद की गई। पूरे अभियान के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न उत्पन्न हो।
कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम:
अतिक्रमण हटाने की इस कार्रवाई में रेलवे पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की मौजूदगी रही। अधिकारियों ने पहले से ही इलाके को घेराबंदी में ले लिया था। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया था। कार्रवाई के समय आम लोगों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया, ताकि अभियान बिना बाधा के पूरा किया जा सके।
जोनल रेलवे ट्रेनिंग सेंटर के पास हटाया गया कब्जा:
यह पूरी कार्रवाई जोनल रेलवे ट्रेनिंग सेंटर के आसपास की जमीन पर की गई। इस स्थान पर रेलवे की जमीन पर कई लोगों ने अस्थायी दुकानें और ढांचे खड़े कर लिए थे। समय के साथ ये अवैध निर्माण स्थायी रूप लेने लगे थे, जिससे रेलवे की संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा था। अधिकारियों के अनुसार, यह जमीन रेलवे उपयोग के लिए सुरक्षित है और इस पर किसी भी तरह का निजी कब्जा नियमों के खिलाफ है।
नोटिस के बावजूद नहीं हटाया गया अतिक्रमण:
रेलवे प्रशासन ने अतिक्रमणकारियों को पहले ही नोटिस जारी किया था। बताया गया कि करीब पांच दिन पहले सभी संबंधित लोगों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वे स्वयं अपने अवैध निर्माण हटा लें। नोटिस में यह भी कहा गया था कि निर्धारित समय के भीतर अतिक्रमण न हटाने की स्थिति में रेलवे बलपूर्वक कार्रवाई करेगा। इसके बावजूद कब्जा नहीं हटाया गया, जिसके बाद बुलडोजर कार्रवाई का फैसला लिया गया।
पुरानी रेलवे लाइन की जमीन पर था कब्जा:
जानकारी के अनुसार, जिस जमीन पर अतिक्रमण किया गया था, वह एक पुरानी रेलवे लाइन की भूमि है। यह रेलवे लाइन गाजीपुर रेलवे स्टेशन से अफीम फैक्ट्री तक बिछाई गई थी। अंग्रेजी शासनकाल में बनी इस लाइन पर लगभग तीन से चार दशक पहले ट्रेनों का संचालन बंद हो गया था। इसके बाद धीरे-धीरे स्थानीय लोगों ने इस जमीन पर कब्जा करना शुरू कर दिया और अस्थायी ढांचे खड़े कर लिए।
पिछले वर्ष भी हो चुकी है कार्रवाई:
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब इस क्षेत्र से अतिक्रमण हटाया गया हो। पिछले साल भी इसी इलाके में अवैध कब्जों को हटाया गया था। हालांकि, कुछ समय बाद फिर से कुछ लोगों ने दोबारा रेलवे की जमीन पर कब्जा कर लिया। बार-बार चेतावनी के बावजूद अतिक्रमण जारी रहने के कारण इस बार सख्त कार्रवाई की गई।
बुलडोजर पहुंचते ही मची अफरा-तफरी:
जैसे ही बुलडोजर और रेलवे की टीम मौके पर पहुंची, अतिक्रमणकारियों में अफरा-तफरी मच गई। कई लोगों ने स्थिति को भांपते हुए खुद ही अपने अवैध निर्माण हटाने शुरू कर दिए। हालांकि, जिन लोगों ने ढांचे नहीं हटाए, उनके निर्माण बुलडोजर से ध्वस्त कर दिए गए। कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में प्रशासन की सख्त निगरानी बनी रही।
स्थानीय लोगों ने की कार्रवाई की पुष्टि:
स्थानीय लोगों ने भी माना कि यह जमीन रेलवे की थी और कुछ लोगों ने इस पर अवैध कब्जा कर रखा था। उन्होंने बताया कि रेलवे की ओर से पहले ही नोटिस दिए जा चुके थे। बावजूद इसके, अतिक्रमण नहीं हटाया गया, जिससे यह कार्रवाई जरूरी हो गई। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कब्जा हटा लिया जाता तो बुलडोजर चलाने की जरूरत नहीं पड़ती।
रेलवे संपत्ति की सुरक्षा पर जोर:
रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि रेलवे की जमीन सार्वजनिक संपत्ति है और इसकी सुरक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है। अवैध कब्जों के कारण न सिर्फ रेलवे की योजनाएं प्रभावित होती हैं, बल्कि भविष्य में विकास कार्यों में भी बाधा आती है। इसी कारण समय-समय पर ऐसे अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाया जाता है और आगे भी यह कार्रवाई जारी रहेगी।
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