प्रयागराज। कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने वाराणसी की एमपी/एमएलए कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। वाराणसी की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट ने 21 जुलाई को दिए अपने आदेश में राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग करने वाली निगरानी याचिका स्वीकार की थी। यह मामला राहुल गांधी द्वारा अमेरिका में दिए गए एक बयान से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर एक विशेष समुदाय पर टिप्पणी की गई थी।
मामले के अनुसार, वाराणसी कोर्ट ने राहुल गांधी के उस बयान को गंभीर मानते हुए एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया था। इसके बाद, राहुल गांधी की कानूनी टीम ने इस आदेश के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल की। याचिका में कहा गया है कि एमपी/एमएलए कोर्ट का आदेश कानून के अनुरूप नहीं है और राहुल गांधी का बयान तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया है।
सूत्रों के अनुसार, हाईकोर्ट से अपेक्षा की जा रही है कि वह इस मामले में जल्द सुनवाई कर सकता है। राहुल गांधी ने अपने आवेदन में कहा है कि वाराणसी कोर्ट ने बिना पर्याप्त आधार के एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया, जो न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
कांग्रेस पार्टी ने भी इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रेरित बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी के बयानों को चुनावी लाभ के लिए गलत तरीके से मुद्दा बनाया जा रहा है। वहीं, भाजपा नेताओं ने कहा है कि राहुल गांधी के बयानों से समाज में तनाव पैदा करने की कोशिश की गई, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई ज़रूरी है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हाईकोर्ट का फैसला इस मामले में अहम होगा, क्योंकि इससे यह तय होगा कि क्या राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज़ करने का आदेश कायम रहेगा या रद्द किया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मामला कांग्रेस और भाजपा के बीच पहले से ही गर्माए राजनीतिक माहौल में नई हलचल ला सकता है। चुनावी वर्ष में किसी बड़े नेता के खिलाफ इस तरह के कानूनी विवाद का असर न केवल पार्टी की छवि पर पड़ेगा, बल्कि विपक्ष और सत्ताधारी दल की रणनीति पर भी सीधा असर डालेगा।
अब निगाहें इलाहाबाद हाईकोर्ट के अगले आदेश पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि वाराणसी की अदालत के आदेश को बरकरार रखा जाएगा या उसे निरस्त कर दिया जाएगा।
राहुल गांधी ने वाराणसी में दर्ज केस के आदेश को हाईकोर्ट में दी चुनौती…