Video :अवैध अस्पताल बना मौत का अड्डा…गर्भवती की गई जान!

रिपोर्टर: जुम्मन कुरैशी

कासगंज जनपद में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। जिले में अवैध अस्पतालों और झोलाछाप डॉक्टरों के कारण लोगों की जान खतरे में है। इसी कड़ी में एक चार माह की गर्भवती महिला की मौत ने स्वास्थ्य तंत्र की पोल खोल दी। बताया गया कि एक निजी हेल्थ केयर सेंटर (Health Care Centre) पर इलाज के दौरान महिला की हालत बिगड़ गई, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। घटना के बाद गुस्साए परिजनों ने गंजडुंडवारा-बदायूं हाईवे (Ganjdundwara–Badaun Highway) पर शव रखकर जाम लगा दिया, जिससे करीब एक घंटे तक यातायात ठप रहा। पुलिस प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद ही स्थिति पर काबू पाया जा सका।

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गर्भवती महिला की मौत के बाद हंगामा:
मामला थाना सिकंदरपुर वैश्य (Sikandarpur Vaishya) क्षेत्र के गांव बहरोजपुर छितैरा (Bahrojpur Chhitaira) का है। यहां की रहने वाली 35 वर्षीय अनीता देवी पत्नी गिरीश चंद्र चार माह की गर्भवती थी। तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे राधा रानी हेल्थ केयर सेंटर (Radha Rani Health Care Centre) लेकर पहुंचे। प्रारंभिक इलाज के बाद भी महिला को राहत नहीं मिली। देर रात उसकी हालत और बिगड़ गई तो परिजन उसे दोबारा अस्पताल लेकर पहुंचे। उपचार के दौरान अचानक तेज रक्तस्त्राव शुरू हो गया। डॉक्टरों ने परिजनों को अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी, लेकिन रास्ते में ही अनीता की मौत हो गई। मौत की सूचना मिलते ही घर में कोहराम मच गया और परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया।

परिजनों का आरोप और हाईवे जाम:
गुस्साए परिजनों ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों की लापरवाही और गलत इलाज के कारण अनीता की जान गई है। उनका कहना था कि इलाज के दौरान महिला की बच्चादानी को गंभीर नुकसान पहुंचा, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके विरोध में परिजनों और ग्रामीणों ने गंजडुंडवारा-बदायूं हाईवे पर शव रखकर जाम लगा दिया। करीब एक घंटे तक हाईवे पर लंबा जाम लग गया और यातायात पूरी तरह ठप हो गया। मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्रशासन और पुलिस ने संभाली स्थिति:
घटना की सूचना मिलते ही सीओ (CO) संदीप वर्मा, एसडीएम (SDM) पटियाली प्रदीप विमल, थाना प्रभारी चंचल सिरोही और नायब तहसीलदार (Naib Tehsildar) मुकेश कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों को समझाया और कार्रवाई का भरोसा दिलाकर जाम खुलवाया। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।

अवैध हेल्थ केयर सेंटर पर हुई कार्रवाई:
घटना की जानकारी मिलने पर स्वास्थ्य विभाग (Health Department) के नोडल प्रभारी डॉ. उत्कर्ष यादव टीम के साथ मौके पर पहुंचे। जांच में पाया गया कि राधा रानी हेल्थ केयर सेंटर का कोई पंजीकरण नहीं था, फिर भी वहां गर्भपात और प्रसव जैसी गंभीर चिकित्सीय सेवाएं दी जा रही थीं। टीम ने अस्पताल को अवैध संचालन में पाए जाने पर तुरंत सील कर दिया।

स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल:
यह मामला केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं है। बताया जा रहा है कि पूरे जिले में करीब 250 अस्पताल संचालित हैं, लेकिन इनमें से केवल 55 ही पंजीकृत हैं। बाकी बिना अनुमति के चल रहे हैं। सवाल यह उठता है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ऐसे अस्पतालों पर कार्रवाई क्यों नहीं करती? हर बार किसी की जान जाने के बाद अस्पताल सील करने की औपचारिकता पूरी कर विभाग अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है। इस घटना ने फिर साबित कर दिया कि कासगंज में स्वास्थ्य सुरक्षा भगवान भरोसे है।


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डिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

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