प्रयागराज (Prayagraj) के धमोह गांव (Dhamoh Village) में सुबह 6:30 बजे 8 अक्टूबर को एक भयावह हादसा हुआ। गांव के प्राइमरी स्कूल (Primary School) का मुख्य गेट भरभराकर गिर गया और 7 साल का इशू पाल (Ishu Pal) इसके नीचे दब गया। पिता मनोज पाल (Manoj Pal) के पहुँचते ही उन्होंने देखा कि बेटा अभी सांसें ले रहा था और वे चीख उठे। आसपास के 4-5 लोग दौड़कर आए और मिलकर दरवाजे को उठाकर इशू को बाहर निकाला। पिता ने बच्चे को गोद में लेकर CHC (Community Health Centre) की ओर दौड़ लगाई, लेकिन रास्ते में ही इशू की मृत्यु हो गई।
गांव में मातम और विरोध:
इशू की शवावस्था में जब उसे घर लाया गया, तो पूरे गांव के लोग एकत्र हो गए। गांववालों ने बताया कि स्कूल प्रबंधन ने हादसे के तुरंत बाद गेट की मरम्मत करवा दी, लेकिन बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होने तक वे अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे।
स्कूल का हाल और बच्चों की संख्या:
इस प्राइमरी स्कूल में आठवीं तक की कक्षाएं चलती हैं और लगभग 165 बच्चे पढ़ते हैं। जर्जर लोहे का भारी गेट (250 किलो) और सुरक्षा में लापरवाही के कारण बड़ा हादसा हो सकता था। इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए BSA (Basic Shiksha Adhikari) प्रयागराज ने स्कूल के प्रिंसिपल (Principal) को सस्पेंड कर दिया।
पंचायत और प्रशासन की कार्रवाई:
ADO (Assistant Development Officer) पंचायत ने प्रधान और सचिव के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी है। DM (District Magistrate) मनीष कुमार वर्मा (Manish Kumar Verma) ने CDO (Chief Development Officer) हर्षिका सिंह (Harshika Singh) को मामले की जांच 24 घंटे में पूरी करके रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।
परिवार का दुख और पिता की कहानी:
प्रयागराज से लगभग 30 किलोमीटर दूर बहरिया ब्लॉक (Baharia Block) के धमोह गांव में मनोज पाल अपने परिवार के साथ रहते थे। परिवार में पत्नी कांति देवी (Kanti Devi), बेटा इशू और बेटी परी उर्फ अनुष्का शामिल हैं। एक महीने पहले मनोज को पैरालाइसिस (Paralysis) का अटैक पड़ा था। डॉक्टर की सलाह के अनुसार सुबह जल्दी टहलने जाना उनकी दिनचर्या में शामिल था। इशू रोज अपने पिता को सहारा देकर टहलने ले जाता था। आज वही सुबह का सहारा उनकी आखिरी बन गई।
कांति देवी ने रोते हुए कहा, “अब किसके सहारे जिएंगे, हमारा अकेला बेटा हमें छोड़कर चला गया। वह गेट हमारे परिवार को ही खत्म कर दिया।”
हादसे के कारण और स्कूल की लापरवाही:
स्कूल में दो पल्लों वाला भारी लोहे का गेट था। एक तरफ का गेट सुरक्षित था, लेकिन दूसरी तरफ का गेट जिस लोहे के हुक पर टिका हुआ था, वह जर्जर था। स्कूल प्रबंधन को इस स्थिति की जानकारी थी, लेकिन प्रिंसिपल ने मरम्मत नहीं करवाई। इसके अलावा स्कूल के पास जमीन का विवाद होने के कारण गेट की मरम्मत समय पर नहीं कराई जा सकी।
पिता के शब्द:
मनोज पाल ने बताया, “जैसा रोज सुबह होता था, आज भी इशू ने मुझे सहारा देकर उठाया। हम घर से निकले, वह मेरे पीछे-पीछे चल रहा था। अचानक पीछे से आवाज आई और मेरी आंखों के सामने मेरा इकलौता बेटा गेट के नीचे दब गया। मैंने उसे निकालने की कोशिश की, लेकिन गेट मुझसे नहीं उठा। मामा और गांव के लोग आए, उसे गोद में लेकर अस्पताल भागे, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।”
गांववालों की चिंता और मांग:
गांव के लोगों का कहना है कि यदि यह गेट किसी और समय कई बच्चों के ऊपर गिरता, तो बड़ा हादसा हो सकता था। उन्होंने स्पष्ट किया कि लापरवाही करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
निष्कर्ष:
धमोह गांव में यह हादसा बच्चों की सुरक्षा के प्रति स्कूल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है। हादसे के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की, लेकिन एक छोटे बच्चे की जान जाने से परिवार और गांव में गहरा शोक है।
#Tag: #Prayagraj #SchoolAccident #ChildSafety
डिस्क्लेमर: यह खबर सूचना पर आधारित है।