रिपोर्टर: अमित कुमार
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बलिया (Ballia) जनपद के सिकंदरपुर (Sikanderpur) से जुड़ी सियासत एक बार फिर गरमा गई है। 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के चुनावी अभियान पर भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के पूर्व विधायक संजय यादव (Sanjay Yadav) ने तीखा तंज कसा है। उनके बयान के बाद क्षेत्रीय राजनीति में चर्चा तेज हो गई है।
अखिलेश यादव पर सीधा हमला:
पूर्व विधायक संजय यादव ने कहा कि अखिलेश यादव शुरू से ही सोशल मीडिया जैसे ट्विटर और फेसबुक पर राजनीति करने में विश्वास रखते हैं। उनका आरोप है कि अखिलेश यादव ने कभी जनता की वास्तविक समस्याओं को लेकर न तो कोई आंदोलन किया और न ही कोई ठोस कार्यक्रम आयोजित किया। संजय यादव का कहना है कि अखिलेश यादव चुनाव के समय ही सक्रिय दिखाई देते हैं और चुनाव संपन्न होते ही वह लंदन (London) चले जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जनता के मुद्दों से उनका सीधा जुड़ाव नजर नहीं आता।
जन समस्याओं से दूरी का आरोप:
संजय यादव ने आगे कहा कि प्रदेश की जनता महंगाई, बेरोजगारी और विकास जैसे मुद्दों से जूझ रही है, लेकिन इन विषयों पर समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से कोई ठोस पहल देखने को नहीं मिलती। उनके अनुसार, सोशल मीडिया के माध्यम से राजनीति करना आसान है, लेकिन जमीनी स्तर पर संघर्ष करना कहीं अधिक जरूरी होता है।
सिकंदरपुर विधायक पर गंभीर सवाल:
सिकंदरपुर विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के विधायक जियाउद्दीन रिजवी (Jiyauddin Rizvi) को लेकर भी पूर्व विधायक ने गंभीर आरोप लगाए। संजय यादव ने कहा कि जनता ने तीसरी बार उन्हें मौका दिया, लेकिन चुनाव जीतने के बाद उनका क्षेत्र की जनता से कोई सरोकार नहीं रहता। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास कार्यों और स्थानीय समस्याओं के समाधान में विधायक की कोई सक्रिय भूमिका दिखाई नहीं देती।
विकास कार्यों को लेकर नाराजगी:
पूर्व विधायक के अनुसार, क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े कई मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन विधायक की ओर से इन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि का दायित्व केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना भी होता है।
फॉर्म-7 विवाद पर प्रतिक्रिया:
अखिलेश यादव द्वारा फॉर्म-7 को लेकर लगातार सवाल उठाए जाने पर संजय यादव ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची से नाम हटाने की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी नाम को लेकर आपत्ति दर्ज कराई जाती है तो उसकी जांच होती है, उसके बाद संबंधित व्यक्ति को नोटिस भेजा जाता है। बिना प्रक्रिया के किसी का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जा सकता।
राजनीतिक बयानबाजी तेज:
इस पूरे मामले के बाद सिकंदरपुर सहित आसपास के इलाकों में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। आने वाले समय में चुनावी माहौल के और गर्म होने की संभावना जताई जा रही है।
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