SHO जयपाल सिंह रावत अपने ऑफिस में फरियादियों की शिकायतें सुन रहे थे। उसी दौरान अचानक चार लोग उनके कमरे में दाखिल हुए। सभी ने शॉल ओढ़ रखी थी और चेहरे ढके हुए थे। इंस्पेक्टर ने उनमें से एक व्यक्ति को पहचान लिया। इसके बाद उन्होंने पहले से मौजूद फरियादियों को बाहर बैठने के लिए कह दिया। कमरे का माहौल सामान्य लग रहा था, लेकिन यहीं से पूरी कार्रवाई की पटकथा शुरू हो चुकी थी।
कमरे में आए व्यक्ति ने शॉल के अंदर से 500 रुपये के नोटों की एक गड्डी निकालकर SHO के सामने रख दी। उसने कहा कि पूरे 50 हजार रुपये हैं और गिन लेने को कहा। इंस्पेक्टर ने यह कहते हुए कि “पूरे तो हैं न”, नोटों की गड्डी अपनी पैंट की दाहिनी जेब में रख ली। इसी पल के साथ विजिलेंस टीम के ट्रैप की कार्रवाई सफल हो गई।
फरियादी नहीं, विजिलेंस टीम निकली मौजूद भीड़:
रुपये जेब में रखते ही एक इशारा हुआ और थाने में बैठे करीब 13-14 लोग, जिन्हें अब तक फरियादी या किसान समझा जा रहा था, अचानक हरकत में आ गए। सभी ने अपने शॉल और मफलर हटा दिए। ये सभी मेरठ विजिलेंस (Meerut Vigilance) की टीम के सदस्य थे। तीन लोग सीधे SHO के कमरे में दाखिल हुए।
इंस्पेक्टर घबरा गए और बोले कि कौन हो, बाहर निकलो। उसी समय बाहर तैनात गनर ने भी उन्हें भगाने की कोशिश की, लेकिन विजिलेंस टीम के एक सदस्य ने अपना आईकार्ड दिखा दिया। इसके बाद साफ हो गया कि यह विजिलेंस का ट्रैप है।
थाने में ही मुल्जिम बना SHO:
विजिलेंस टीम ने इंस्पेक्टर को उसी के थाने में मुल्जिम की तरह पकड़ लिया। रिश्वत की रकम टीम ने अपने कब्जे में ले ली और थाने में ही इंस्पेक्टर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। वर्दी में गिरफ्तारी नहीं हो सकती थी, इसलिए SHO के घर से सादे कपड़े मंगवाए गए। वर्दी उतारने के बाद उन्हें सिविल ड्रेस पहनाई गई और फिर विजिलेंस की गाड़ी में बैठाया गया।
पूर्व प्रधान से मांगी थी रिश्वत:
इस पूरे ट्रैप में पूर्व प्रधान राकेश कुमार भी शामिल थे, जिनसे SHO 50 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहे थे। विजिलेंस टीम में कृष्णवीर, DSP आजाद सिंह और इंस्पेक्टर भूपेंद्र सिंह भी मौजूद थे। पूर्व प्रधान ने थाने के पहरेदार से कहा कि इंस्पेक्टर ने बुलाया है। सिपाही ने अंदर जाकर जानकारी दी और SHO ने यह सोचकर सभी को अंदर आने दिया कि रिश्वत की रकम लाई गई है।
पैसे लेते ही इशारे पर कार्रवाई:
जैसे ही नोटों की गड्डी जेब में गई, बाहर मौजूद टीम को संकेत मिला। विजिलेंस के सभी सदस्य तुरंत सक्रिय हो गए और इंस्पेक्टर के कमरे में पहुंचकर उन्हें दबोच लिया। थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों को भी तब यह अहसास हुआ कि यह पूरी कार्रवाई एक ट्रैप के तहत की गई थी।
भ्रष्टाचार अधिनियम में केस दर्ज:
विजिलेंस ने SHO जयपाल सिंह रावत के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। इसके साथ ही अब आय से अधिक संपत्ति की जांच भी शुरू कर दी गई है। विजिलेंस टीम उन्हें गाजियाबाद (Ghaziabad) से मेरठ (Meerut) स्थित विजिलेंस कार्यालय लेकर गई है, जहां आगे की पूछताछ की जाएगी।
संपत्तियों की भी होगी जांच:
सूत्रों के अनुसार, विजिलेंस अब SHO की चल-अचल संपत्तियों का भी ब्यौरा जुटा रही है। यह देखा जाएगा कि उनकी आय के स्रोत और संपत्ति में कहीं असंतुलन तो नहीं है। कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में भी हलचल तेज हो गई है और इसे एक बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
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