मेरठ (Meerut) में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में हुई घटना पर 17 दिन बाद प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस की महिला सांसदों द्वारा कुर्सी घेरने के मामले पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि किसी भी पद पर बैठने से पहले जनता का विश्वास और दिल जीतना आवश्यक है। उनका कहना था कि केवल सीट पर कब्जा कर लेने से कोई प्रधानमंत्री नहीं बन सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते महिला सांसदों को आगे कर इस प्रकार की रणनीति अपनाई गई।
जनता का दिल जीतने की नसीहत:
प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि किसी को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचना है तो पहले जनता का भरोसा जीतना होगा। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि क्या वह इतनी कमजोर हो गई है कि माताओं और बहनों को आगे कर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रही है। उनके अनुसार, महिला सांसदों को आगे कर सीट घेरने से लोकतांत्रिक मर्यादाएं मजबूत नहीं होतीं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस देश के लिए बोझ बन चुकी है और उसकी राजनीति जनभावनाओं से कट गई है।
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया पर टिप्पणी:
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि दिल्ली में हुई घटना के बाद कांग्रेस के सहयोगी दलों ने खुलकर उसकी आलोचना की। उन्होंने सार्वजनिक रूप से उन विपक्षी साथियों का आभार जताया जिन्होंने इस प्रकरण में स्पष्ट रुख अपनाया। उनका कहना था कि कई बार कांग्रेस के कदमों का खामियाजा अन्य विपक्षी दलों को भुगतना पड़ता है।
मीडिया से की अपील:
प्रधानमंत्री ने मीडिया से अनुरोध करते हुए कहा कि जब ऐसी घटनाओं की आलोचना की जाए तो इसे “विपक्ष पर हमला” जैसी सुर्खियों में न बांधा जाए। उनका कहना था कि विपक्ष के अन्य दल भी समझ चुके हैं कि गलती कांग्रेस करती है और उसकी छवि का असर पूरे विपक्ष पर पड़ता है। उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि मुद्दा केवल सरकार और विपक्ष का नहीं, बल्कि संसदीय गरिमा का है।
लोकसभा में क्या हुआ था:
4 फरवरी को लोकसभा (Lok Sabha) में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने के लिए प्रधानमंत्री को बोलना था। कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्ष की महिला सांसद पोस्टर लेकर वेल में पहुंचीं और प्रदर्शन करने लगीं। इसके बाद वे ट्रेजरी बेंच की ओर बढ़ीं और प्रधानमंत्री की सीट के पास जाकर उसे घेर लिया। हंगामे की स्थिति को देखते हुए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई और उस दिन प्रधानमंत्री का भाषण नहीं हो सका।
स्पीकर ओम बिरला का बयान:
अगले दिन 5 फरवरी को सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री के भाषण को टालने का निर्णय सदन की मर्यादा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में कोई अप्रत्याशित घटना हो सकती थी, जिससे लोकतांत्रिक परंपराएं आहत होतीं। उन्होंने महिला सांसदों का प्रधानमंत्री की सीट तक जाना सदन की गरिमा के अनुकूल नहीं बताया और पोस्टर लेकर आने पर आपत्ति जताई।
घटना के दौरान की गतिविधियां:
प्रधानमंत्री के भाषण से लगभग 15 मिनट पहले विपक्षी सांसदों ने छोटे समूह बनाकर पोस्टर बांटे। महिला सांसद बैनर लेकर सदन के वेल में पहुंचीं और नारेबाजी की। इसके बाद वे सत्ता पक्ष की सीटों की ओर बढ़ीं। इस विरोध में केसी वेणुगोपाल, अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी, डिंपल यादव, जेनीबेन नागाजी ठाकोर, वर्षा गायकवाड़, प्रतिभा सुरेश धनोरकर, ज्योतिमणि और रंजीता कोल सहित कई सांसद शामिल थे।
बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ मंत्रियों के आग्रह के बावजूद महिला सांसद अपनी सीटों पर नहीं लौटीं और प्रधानमंत्री की सीट तक पहुंच गईं। वहीं कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत और निराधार बताया।
तीन बड़े संदेश:
इस पूरे प्रकरण के जरिए प्रधानमंत्री ने तीन प्रमुख संदेश देने की कोशिश की। पहला, सत्ता से पहले जनता का भरोसा जरूरी है। दूसरा, महिला प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाना। तीसरा, विपक्षी खेमे में मतभेदों को रेखांकित करना।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में सदन की गरिमा और शालीनता को बनाए रखना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है। इस घटना और उसके बाद आए बयानों ने संसदीय आचरण और राजनीतिक रणनीतियों पर नई बहस को जन्म दिया है।
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