सावधान! पितृपक्ष आज पूर्णिमा पर नहीं होगा शुरू…

हिंदू पंचांग के अनुसार पितृपक्ष की शुरुआत हर वर्ष भाद्रपद मास की शुक्ल पूर्णिमा के अगले दिन से मानी जाती है। इस वर्ष 2025 में एक विशेष स्थिति बनी, जिसमें 7 सितंबर को पूर्णिमा और उसी रात 11:38 बजे से कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि प्रारंभ हो गई। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, जब प्रतिपदा तिथि पूर्णिमा से युक्त हो तो उस दिन पितृपक्ष की शुरुआत नहीं मानी जाती। इसी कारण जानकारों और पंचांगों से निष्कर्ष के आधार पर इस बार पितृपक्ष की वास्तविक शुरुआत 8 सितंबर 2025 से मानी जा रही है।

परंपरा और धार्मिक मान्यता

हिंदू धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि पितरों के श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान का कार्य केवल कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तक करना चाहिए। पूर्णिमा तिथि पर श्राद्ध का फल मान्य नहीं माना जाता। मान्यता है कि पितृपक्ष में पूर्वज धरती पर आते हैं और अपने वंशजों से तर्पण, पिंडदान व भोजन की अपेक्षा रखते हैं। इसी वजह से इस अवधि को श्राद्ध पक्ष या महालय भी कहा जाता है।

इस वर्ष की तिथियाँ

पंचांग के अनुसार 7 सितंबर की रात 11:38 बजे तक पूर्णिमा रही। इसके बाद प्रतिपदा तिथि शुरू हुई, जो 8 सितंबर को पूरे दिन तक रही। इसी दिन से पितृपक्ष के श्राद्ध संस्कार शुरू होंगे। यह पक्ष 21 सितंबर 2025, रविवार को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा। इस दिन उन सभी पितरों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है।

क्या करें और क्या न करें

पितृपक्ष में पिंडदान, तर्पण, ब्राह्मण भोज और दान का विशेष महत्व है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दौरान किए गए श्राद्ध कर्म से पितर तृप्त होते हैं और परिवार पर आशीर्वाद बरसाते हैं। वहीं, इस अवधि में मांगलिक कार्य, विवाह या शुभ संस्कार करने की मनाही होती है।

पितृपक्ष 2025: दिनवार श्राद्ध तिथियाँ

1. 8 सितंबर (सोमवार) – प्रतिपदा श्राद्ध


2. 9 सितंबर (मंगलवार) – द्वितीया श्राद्ध


3. 10 सितंबर (बुधवार) – तृतीया श्राद्ध


4. 11 सितंबर (गुरुवार) – चतुर्थी श्राद्ध


5. 12 सितंबर (शुक्रवार) – पंचमी श्राद्ध


6. 13 सितंबर (शनिवार) – षष्ठी श्राद्ध


7. 14 सितंबर (रविवार) – सप्तमी श्राद्ध


8. 15 सितंबर (सोमवार) – अष्टमी श्राद्ध


9. 16 सितंबर (मंगलवार) – नवमी श्राद्ध


10. 17 सितंबर (बुधवार) – दशमी श्राद्ध


11. 18 सितंबर (गुरुवार) – एकादशी श्राद्ध


12. 19 सितंबर (शुक्रवार) – द्वादशी श्राद्ध


13. 20 सितंबर (शनिवार) – त्रयोदशी श्राद्ध


14. 21 सितंबर (रविवार) – सर्वपितृ अमावस्या (महालय अमावस्या)

निष्कर्ष

इस वर्ष पितृपक्ष की शुरुआत को लेकर कई लोग भ्रमित रहे क्योंकि 7 सितंबर को पूर्णिमा और प्रतिपदा साथ पड़ी थी। लेकिन ज्योतिषाचार्यों और पंचांगों के मतानुसार, श्राद्ध पक्ष की वास्तविक शुरुआत 8 सितंबर 2025 से हो चुकी है और यह 21 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान अपने पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने का अवसर मिलेगा।

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