पीजी कॉलेज के अंग्रेजी विभाग द्वारा एक अकादमिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

पीजी कॉलेज (PG College) के अंग्रेजी विभाग (English Department) के तत्वावधान में एक अकादमिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें शोध पद्धति (Research Methodology) के महत्व पर जोर दिया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों और शिक्षकों में शोध की सही चेतना और विधिवत अनुसंधान के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

संगोष्ठी का उद्घाटन और अध्यक्षता:
संगोष्ठी की अध्यक्षता अर्थशास्त्र विभाग (Department of Economics) के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर श्रीकांत पांडेय (Professor Shrikant Pandey) ने की। कार्यक्रम का प्रारंभ मुख्य वक्ता प्रोफेसर विश्वनाथ मिश्रा (Professor Vishwanath Mishra) का स्वागत कर किया गया। उनका संबोधन आर्य महिला पीजी कॉलेज (Arya Mahila PG College), वाराणसी (Varanasi) से जुड़ा हुआ था। स्वागत समारोह में युवादर्द (YuvaDard) के संपादक असितांग कुमार सिंह (Asitang Kumar Singh) तथा सह-संपादक गौरव दुबे (Gaurav Dubey) ने प्रोफेसर मिश्रा को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।

मुख्य व्याख्यान: शोध पद्धति पर विचार:
प्रोफेसर विश्वनाथ मिश्रा ने “शोध पद्धति” विषय पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आज की शोध प्रक्रियाओं में शोध की चेतना (Research Awareness) पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया जा रहा है, जबकि तथ्यों (Facts) पर अधिक जोर दिया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप शोध कार्य कई बार शोधात्मक (Analytical) नहीं रहकर केवल सूचनात्मक (Informational) बनकर रह जाता है। उन्होंने विशेष रूप से ऐतिहासिक (Historical) और नारीवादी (Feminist) शोध पद्धतियों पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

छात्र और शिक्षक दोनों के लिए संदेश:
प्रोफेसर मिश्रा ने कहा कि छात्रों में शोध की वास्तविक चेतना विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही शिक्षकों से भी अनुरोध किया कि वे शोध कराते समय विधिवत पद्धतियों को लागू करें। उनका मानना था कि सही शोध पद्धति अपनाने से न केवल छात्रों की क्षमता बढ़ती है, बल्कि शोध का परिणाम भी अधिक प्रभावशाली और वैज्ञानिक बनता है।

संगोष्ठी का संचालन और समापन:
संगोष्ठी का संचालन अंग्रेजी विभाग (English Department) के डॉ. रामनारायण तिवारी (Dr. Ramnarayan Tiwari) द्वारा किया गया। कार्यक्रम में डॉ. आस्था सिंह (Dr. Astha Singh) ने क्लोजिंग रिमार्क प्रस्तुत किया। अंत में प्रोफेसर शिखा तिवारी (Professor Shikha Tiwari) ने संगोष्ठी का समापन करते हुए सभी प्रतिभागियों और आयोजकों का आभार व्यक्त किया।

छात्रों की सक्रिय भागीदारी:
इस संगोष्ठी में सुश्री सान्या उपाध्याय (Sanya Upadhyay), सुश्री ईशी राय (Ishi Rai), अदिति (Aditi), सान्वी (Sanvi), सर्वेश (Sarvesh), प्रियदर्शन (Priyadarshan), सुधांशु (Sudhanshu) सहित अनेक छात्र-छात्राओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने सवाल-जवाब और चर्चाओं के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किए और कार्यक्रम की सफलता में योगदान दिया।

शोध की वास्तविक चेतना की आवश्यकता:
कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि छात्रों और शिक्षकों दोनों को शोध पद्धति की मूल अवधारणा और प्रयोगात्मक विधियों की जानकारी होना आवश्यक है। प्रोफेसर मिश्रा ने बताया कि सही शोध पद्धति अपनाने से छात्रों में तार्किक सोच (Analytical Thinking) और समस्या समाधान (Problem Solving) की क्षमता बढ़ती है।

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