राजधानी दिल्ली (Delhi) की पटियाला हाउस कोर्ट (Patiala House Court) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट के दौरान विरोध प्रदर्शन करने के आरोप में गिरफ्तार इंडियन यूथ कांग्रेस (Indian Youth Congress) के नौ कार्यकर्ताओं को जमानत दे दी है। न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि ने आदेश सुनाते हुए दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की उन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना, जिनमें प्रदर्शन को सुरक्षा में गंभीर सेंध या बड़ा आपराधिक कृत्य बताया गया था। अदालत ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आरोपियों को लंबी अवधि तक हिरासत में रखना उचित नहीं है।
राजनीतिक असहमति पर अदालत की टिप्पणी:
जमानत आदेश देते समय न्यायालय ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट के अनुसार संबंधित कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान प्रतीकात्मक राजनीतिक आलोचना का हिस्सा प्रतीत होता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इसे हिंसा या संगठित अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि आरोपियों द्वारा किसी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या विदेशी प्रतिनिधियों के बीच दहशत फैलाने का कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।
अनुच्छेद 21 का हवाला:
न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अपने निर्णय में संविधान के अनुच्छेद 21 का संदर्भ देते हुए कहा कि जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार सर्वोपरि है। अदालत ने कहा कि बिना ठोस जांच की आवश्यकता के किसी व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में रखना उचित नहीं है। न्यायालय के अनुसार न्याय का आधार संभावित सजा की आशंका नहीं, बल्कि व्यक्ति की स्वतंत्रता की वास्तविकता होनी चाहिए।
घटना का विवरण:
प्रकरण 20 फरवरी का है, जब इंडियन यूथ कांग्रेस (Indian Youth Congress) के कुछ कार्यकर्ता एआई समिट के आयोजन स्थल पर पहुंच गए थे। बताया गया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की तस्वीरों वाली टी-शर्ट पहन रखी थी, जिन पर विभिन्न नारे लिखे थे। पुलिस ने सुरक्षा में सेंध और हाथापाई के आरोप लगाते हुए कुल 14 लोगों को गिरफ्तार किया था। पुलिस की ओर से यह भी दावा किया गया कि वहां राष्ट्र-विरोधी नारे लगाए गए, हालांकि अदालत ने जमानत पर विचार करते समय इन दलीलों को पर्याप्त आधार नहीं माना।
इन कार्यकर्ताओं को मिली राहत:
कोर्ट ने कृष्ण हरि, नरसिम्हा यादव, कुंदन कुमार यादव, अजय कुमार सिंह, जितेंद्र सिंह यादव, राजा गुर्जर, अजय कुमार विमल, सौरभ सिंह और अरबाज खान को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। न्यायालय ने यह भी ध्यान दिया कि जिन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है, उनमें अधिकतम सजा सात वर्ष से कम है। इस आधार पर अदालत ने माना कि जमानत याचिका स्वीकार की जा सकती है।
विधिक प्रक्रिया जारी:
मामले में आगे की सुनवाई नियमानुसार जारी रहेगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत का अर्थ आरोपों से मुक्ति नहीं है, बल्कि यह केवल न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अस्थायी राहत है। संबंधित एजेंसियां साक्ष्यों के आधार पर अपनी जांच जारी रखेंगी और न्यायालय के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगी।
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