यूपी की राजनीति में इस समय मंत्री आशीष पटेल और उनकी साली पल्लवी पटेल की लड़ाई चर्चा में है। सपा विधायक पल्लवी पटेल तकनीकी कॉलेजों में 177 लेक्चरर को डायरेक्ट प्रमोशन देकर हेड ऑफ डिपार्टमेंट बनाने में गड़बड़ी का आरोप लगा रही हैं। उनके निशाने पर विभाग के मंत्री और जीजा आशीष पटेल हैं। पल्लवी ने 25-25 लाख रुपए लेने का आरोप लगाया है।इस पर आशीष पटेल अपनी ही सरकार को घेर रहे हैं। वह कह रहे हैं कि पल्लवी पटेल को कोई और चाबी भर रहा है। उनके निशाने पर योगी सरकार के दो बड़े अफसर हैं। हालांकि 4 जनवरी को आशीष पटेल ने सीएम योगी से मुलाकात की। इससे सरकार और उनके बीच तल्खी कम हो सकती है। जीजा-साली की लड़ाई अब व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक जा पहुंची है। यह जंग नई नहीं, 11 साल पहले शुरू हुई लड़ाई का ही हिस्सा है। जिसकी वजह से सोनेलाल पटेल की बनाई पार्टी अपना दल दो हिस्सों में बंट गई थी। यह लड़ाई यादव के बाद सबसे बड़े जातिगत वोट बैंक कुर्मी के लिए है। कुर्मियों की प्रदेश में 6% आबादी है।
अब एक नज़र पटेल परिवार भी डाल लीजिय. सोनेलाल पटेल का जन्म 2 जुलाई 1950 को कन्नौज के बगुलीहाई गांव में कुर्मी परिवार में हुआ था। उन्होंने राजनीतिक सफर चौधरी चरण सिंह के साथ शुरू किया। फिर कांशीराम के साथ गए और बसपा के संस्थापक सदस्य रहे। मायावती का कद बढ़ने पर बसपा छोड़ दी और 4 नवंबर 1995 को अपना दल बनाया। सोनेलाल पटेल की शादी कृष्णा पटेल से हुई थी। दोनों की चार संतानें हैं। चारों बेटियां हैं। सबसे बड़ी बेटी पारुल, फिर पल्लवी पटेल, उसके बाद अनुप्रिया और अमन पटेल हैं। अनुप्रिया पटेल का विवाह आशीष पटेल से हुआ है। पल्लवी पटेल की शादी पंकज पटेल निरंजन से हुई। अनुप्रिया ने अमन की शादी समीर से 2023 में कराई। इस शादी में पल्लवी पटेल और मां कृष्णा शामिल नहीं हुई। पारुल और अमन पटेल राजनीति से दूर हैं। अनुप्रिया पटेल लगातार तीन बार से मोदी सरकार में मंत्री हैं, जबकि उनके पति आशीष पटेल अपना दल (एस) के कार्यकारी अध्यक्ष और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। पल्लवी पटेल सपा से सिराथू से विधायक हैं, जबकि उनके पति अपना दल (कमेरावादी) के राष्ट्रीय महासचिव रहे हैं। लेकिन फिलहाल पल्लवी पटेल का सपा से मोहभंग है.
पटेल परिवार में दरार कैसे बन गया इसको भी समझ लेते हैं.
17 अक्टूबर 2009 को कानपुर के कंपनीबाग चौराहे के पास बेकाबू कार ने डॉ. सोनेलाल पटेल की कार में टक्कर मार दी। हादसे में सोने लाल गंभीर रूप से घायल हो गए। डॉ. पटेल को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं पाए। सोनेलाल पटेल के निधन के बाद पार्टी की कमान उनकी पत्नी कृष्णा के हाथों में आ गई। उस समय पार्टी में अनुप्रिया पटेल ज्यादा सक्रिय थीं, इसलिए उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय सचिव का पद मिला। 2012 के विधानसभा चुनाव में अपना दल और भाजपा से गठबंधन हुआ। दो सीटें मिलीं। वाराणसी की रोहनिया सीट से अनुप्रिया पटेल लड़ीं और जीत दर्ज की। 2014 में लोकसभा चुनाव में विधायक रहते अनुप्रिया पटेल मिर्जापुर से सांसद बनीं। मिर्जापुर लोकसभा सीट से कृष्णा पटेल चुनाव लड़ना चाहती थीं, लेकिन अनुप्रिया पटेल के आगे उन्हें झुकना पड़ा। यहां से मां-बेटी के बीच अनबन की शुरुआत हुई।
लेकिन बड़ा सवाल है कि आखिर ये कहें और चौड़ी कैसे हो गयी ?
दरअसल अनुप्रिया पटेल के सांसद बनने के बाद उनका और पति का कद पार्टी में बढ़ने लगा। इससे मां कृष्णा पटेल असहज होने लगीं। वह हर हाल में आशीष पटेल को रोकना चाहती थीं।अनुप्रिया अपनी छोड़ी सीट रोहनिया से पति आशीष पटेल को उपचुनाव लड़वाना चाहती थीं, लेकिन कहा जाता है है कि मां और पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा पटेल अड़ गई। वह नहीं चाहती थीं कि आशीष का पार्टी में कद और बढ़े। कृष्णा देवी ने खुद रोहनिया से उपचुनाव लड़ने के लिए सबको तैयार कर लिया। हालांकि वह उपचुनाव में हार गईं। उन्होंने हार की वजह अनुप्रिया पटेल को माना। भितरघात का आरोप भी लगाया। इसके बाद दोनों के बीच खाई काफी चौड़ी हो गई। अनुप्रिया पटेल से चिढ़ने के बाद मां कृष्णा पटेल का झुकाव पल्लवी की तरफ ज्यादा हो गया। पल्लवी भी पार्टी में अपना कद बढ़ाने लगीं। कृष्णा सार्वजनिक तौर पर कहने लगीं कि आशीष पटेल उनके पारिवारिक मामले में अनुचित रूप से दखल देते हैं।
मां-बेटी में बढ़ते अविश्वास से पार्टी के दो हिस्से हो गये.
परिवार में पार्टी पर कब्जे को लेकर तनाव बढ़ता गया। एक तरफ मां कृष्णा और पल्लवी पटेल तो दूसरी तरफ अनुप्रिया पटेल और उनके पति आशीष थे। अनुप्रिया पटेल और आशीष पार्टी को भाजपा के खेमे में रखना चाहते थे, जबकि कृष्णा नहीं चाहती थीं। अक्टूबर 2014 में कृष्णा पटेल ने बेटी अनुप्रिया पटेल को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पद से हटा दिया। कृष्णा पटेल ने कहा कि अनुप्रिया पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त थीं। उन्हें पद से हटाया गया है, पार्टी से नहीं। इसी दौरान कृष्णा पटेल ने बड़ी बेटी पल्लवी पटेल को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया। यह बात अनुप्रिया को अच्छी नहीं लगी। यहीं से दोनों बहनों में विवाद ज्यादा बढ़ गया। अनुप्रिया और उनके पति आशीष पटेल ने वर्ष 2016 में अपनी अलग पार्टी अपना दल (एस) का गठन किया। कृष्णा पटेल ने भी अपना दल (कमेरावादी) नाम से एक नई पार्टी का गठन कर लिया। इस समय अपना दल (S) भाजपा के साथ है, जबकि अपना दल (कमेरावादी) सपा के साथ।
केवल पार्टी नहीं विरासत पर भी हुआ था बवाल.
यह झगड़ा सिर्फ सोनेलाल पटेल की विरासत का नहीं, बल्कि संपत्ति से भी जुड़ा है। सोनेलाल पटेल के नाम पर कानपुर में ट्रस्ट और स्कूलों की संपत्ति है। यह संपत्ति करोड़ों की बताई जाती है, जिस पर अभी पल्लवी पटेल काबिज हैं। अक्टूबर 2021 में सोनेलाल पटेल की सबसे छोटी बेटी अमन पटेल की विवाद में एंट्री होती है। वह डीजीपी को पत्र लिखती हैं कि उनकी बड़ी बहन और अपना दल (कमेरावादी) की कार्यकारी अध्यक्ष पल्लवी पटेल ने पिता की संपत्ति हड़प ली है। उन्होंने अपनी मां कृष्णा पटेल को तत्काल सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की। आरोप लगाया कि उनकी मां कृष्णा पटेल पर पल्लवी पटेल के पति पंकज निरंजन अनर्गल दबाव बना रहे हैं। अमन के मुताबिक, 2009 में पिता की मृत्यु के बाद मां व सभी बहनों की सहमति पर पल्लवी ने कानपुर स्थित पिताजी के समस्त कारोबार की बागडोर संभाली। पिता की संपत्ति बिना किसी को जानकारी दिए हुए 2015 में ही पल्लवी ने अपने नाम वसीयत करा ली।
ताजा मामला आशीष पटेल पर भ्रष्टाचार के आरोप का है.
इस समय योगी सरकार में अनुप्रिया पटेल के पति और एमएलसी आशीष पटेल टेक्निकल एजुकेशन मिनिस्टर हैं। इस विभाग के अंडर तीन यूनिवर्सिटी, 14 गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज और सभी पॉलिटेक्निक कॉलेज आते हैं। इन कॉलेजों के 177 लेक्चरर को डीपीसी करके हेड ऑफ डिपार्टमेंट बना दिया गया है। ये पद UPPSC से भरे जाने थे, लेकिन विभाग ने डीपीसी करके अपने स्तर पर भर लिए। इनमें आरक्षण नियमों का पालन नहीं हुआ है. पिछले साल जुलाई में बीजेपी विधायक देवेंद्र सिंह लोधी ने CM योगी से शिकायत की। उन्होंने गलत तरीके से भर्ती करने का आरोप लगाया। फिर बीजेपी विधायक पल्टू राम और मीनाक्षी सिंह ने सीएम योगी से शिकायत की। हर साल 50 करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितता होने का आरोप लगाया।
17 दिसंबर को विधानसभा के शीतकालीन सत्र में सपा विधायक पल्लवी पटेल अपने जीजा आशीष को घेरने लगीं। उन्हें विधानसभा में नियम का हवाला देकर बोलने से मना किया गया तो वह धरने पर बैठ गईं। उन्होंने आशीष पटेल पर प्रमोशन के बदले 25-25 लाख रुपए लेने का आरोप लगाया। जांच की मांग की। 18 दिसंबर को आशीष पटेल ने आरोपों पर चुप्पी तोड़ी। सोशल मीडिया पर लिखा- साजिश रचने वाले समझ लें, मैं विधायक योगेश वर्मा नहीं हूं, जो थप्पड़ खाने और अपमानित होने के बावजूद किसी मजबूरी में चुप रह गए। मैं सरदार पटेल का वंशज हूं। डरना नहीं मुकाबला करना मेरी फितरत में है।
दूसरी प्रतिक्रिया 31 दिसंबर को दी। आशीष पटेल ने सोशल मीडिया पर लिखा- यूपी के सबसे ईमानदार IAS अफसर एम देवराज की अध्यक्षता में विभागीय पदोन्नति समिति की संस्तुति हुई। फिर शीर्ष स्तर पर सहमति पर प्रमोशन हुआ। आशीष पटेल ने कहा- मुख्यमंत्री जी यदि उचित समझें तो मेरी सीबीआई जांच करा लें। मेरी और मेरी पत्नी की संपत्ति की जांच करा लें। आशीष और अनुप्रिया पटेल ने 2 जनवरी को पार्टी नेताओं की बैठक बुलाकर अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। आशीष पटेल ने कहा- मैं थप्पड़ खाकर चुप बैठने वाला नहीं हूं। ईंट का जवाब पत्थर से दूंगा। मेरी गलती बस इतनी है कि 14 में से सात डायरेक्टर वंचित वर्ग के बनाए। आशीष ने चुनौती देते हुए कहा- STF (स्पेशल टास्क फोर्स) ही सारे षड्यंत्र की जड़ है। स्पेशल टास्क फोर्स वाले पैर पर गोली मारते हैं, लेकिन हिम्मत है तो सीने पर गोली मारो। अगर, अब उनके खिलाफ षड्यंत्र रचा गया तो वह लड़ेंगे, डरेंगे नहीं।
लेकिन भैया अगर जांच हुई तो आशीष पटेल की मुसीबत बढ़ सकती है.
सपा विधायक पल्लवी पटेल ने अपने जीजा और मंत्री आशीष पटेल की शिकायत 1 जनवरी को राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से की है। उन्होंने एसआईटी जांच की मांग की है। जानकारों का मानना है कि यदि राज्यपाल ने पल्लवी का शिकायत पत्र सरकार को संस्तुति के साथ फॉरवर्ड किया तो सरकार SIT गठित कर जांच करा सकती है। हालांकि वे इसके लिए केंद्र सरकार से बात करेंगी, जहां से हरी झंडी मिलने की संभावना नहीं है। पूर्व आईपीएस अभिताभ ठाकुर ने लोकायुक्त में इस मामले की शिकायत की है। लोकायुक्त चाहे तो मामला दर्ज करके जांच शुरू कर सकता है। आशीष पटेल ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इसलिए इसकी संभावना बन सकती है। पल्लवी पटेल या दूसरा कोई पक्ष इस मामले को कोर्ट तक ले जाए तो वहां के आदेश के बाद जांच शुरू हो सकती है। यदि जांच में कहीं भी गड़बड़ी मिली तो आशीष पटेल की मुश्किल बढ़ सकती है। यदि जांच होती है और एक भी आरोप साबित नहीं हुआ तो आशीष पटेल सरकार पर दबाव बना सकते हैं।


