क्या बिल्कुल आप किसी ऐसे को नहीं जानते जो दूसरी लहर के समय ऑक्सीजन के लिए मारे मारे फिर रहे थे। बिल्कुल भी आप ऐसे किसी को नहीं जानते जिनकी मौत अस्पताल के भीतर ऑक्सीजन की सप्लाई ठप्प हो जाने के कारण हुई। फिर सोशल मीडिया पर ऑक्सीजन सिलेंडर और ऑक्सीजन बेड मांगने वाले वे लोग कौन थे? फिर गंगा में बहती लाशों की सच्चाई क्या है? फिर कोरोना की दूसरी लहर में क्यों लोग ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए मारी मारी फिर रहे थे? फिर क्यों डॉक्टर कह रहे थे कि हमारे पास ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं है और हम लोगों को मरते हुए नहीं देख सकते?
मोदी सरकार के स्वास्थ्य राज्य मंत्री डॉ प्रवीण भारती पवार के एक जवाब ने आप सभी को फेक न्यूज़ में बदल दिया है। पहले फेक न्यूज़ ने आपको बदला अब आपको ही फेक न्यूज़ ने बदल दिया गया। क्या राज्य सरकारें जो लिख कर देंगे, उसे संसद में जस का तस रख दिया जाएगा? क्या ऑक्सीजन ना मिलने से हुई मौत को पता करने का कोई संसाधन हमारे देश में है? बहुत सारे कोरोना संक्रमित मरीजों को अलग-अलग तरह की बीमारियां थी, तो क्या वह ऑक्सीजन से नहीं मरे? ईद झूठ को हजार बार बोलने से वह सच में बदल जाएगा लेकिन ऑक्सीजन की कमी की यह सच्चाई जमीनी है जिसे कोने कोने का हर एक जनमानस बखूबी जानता है लेकिन फिर भी वह सरकार के इस तर्क पर बहस ना करें सवाल ना करें तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। जिस संसद को जनता की आवाज कहा जाता है क्या यह वाकई जनता की आवाज है कि कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से किसी की मौत नहीं हुई?
एक तरफ जहां ऑक्सीजन पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है तुम ही करो ना कि दूसरी लहर में गाजीपुर का एक लाल ऐसा भी था जिसने कई लोगों की जान बचाई। यह शख्स जनपद गाजीपुर के नंदगंज का रहने वाला है इनका नाम यशवंत सिंह यादव है। यशवंत ने कई लोगों की प्लाज्मा की जरूरत को पूरा किया। यशवंत ने सारी जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से वायरल कर दिया था। जिन लोगों को प्लाज्मा की जरूरत थी यशवंत उनकी हर मुमकिन मदद करते थे।

