संजय निषाद का 160 सीटों पर फोकस, चुनाव से पहले केवट-मल्लाह वोट बैंक साधने की रणनीति

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में निषाद पार्टी (Nishad Party) ने आगामी चुनावों को लेकर अपनी रणनीति तेज कर दी है। पार्टी गोरखपुर (Gorakhpur) से चुनावी रैलियों की शुरुआत करने जा रही है, जिसके बाद प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में तीन और बड़ी रैलियां आयोजित की जाएंगी। इन रैलियों के जरिए पार्टी राज्य की करीब 160 केवट-मल्लाह बहुल सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी में है। इस अभियान के माध्यम से पार्टी अपने प्रमुख मुद्दों को जनता तक पहुंचाने और सामाजिक आधार को सशक्त करने का प्रयास करेगी।

चार प्रमुख स्थानों से सियासी संदेश:
निषाद पार्टी ने जिन चार स्थानों को रैलियों के लिए चुना है, उनका विशेष राजनीतिक और सामाजिक महत्व है। गोरखपुर पार्टी का जन्मस्थल है और यहीं से उसे पहली बड़ी सफलता भी मिली थी। प्रयागराज (Prayagraj) के श्रृंगवेरपुर क्षेत्र में गंगा-यमुना संगम होने के साथ-साथ निषाद राज से जुड़ी ऐतिहासिक आस्था भी है। वाराणसी (Varanasi), जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) का संसदीय क्षेत्र है, वहां की रैली राष्ट्रीय स्तर पर संदेश देने में अहम मानी जा रही है। वहीं मेरठ (Meerut) और आसपास का क्षेत्र कश्यप और मल्लाह समुदाय की बड़ी आबादी के कारण राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

केवट-मल्लाह समाज पर विशेष फोकस:
पार्टी का मुख्य लक्ष्य केवट-मल्लाह समाज को एकजुट करना है। उत्तर प्रदेश में इस समाज की बड़ी आबादी है, जो कई विधानसभा सीटों पर चुनावी परिणाम को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। रैलियों के माध्यम से पार्टी इस वर्ग को संगठित कर अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत करना चाहती है।

चार प्रमुख मांगों को बनाएगी मुद्दा:
निषाद पार्टी इन रैलियों में चार बड़ी मांगों को प्रमुखता से उठाने जा रही है। पहली और सबसे महत्वपूर्ण मांग केवट-मल्लाह समाज को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से हटाकर अनुसूचित जाति (SC) में शामिल करने की है। पार्टी लंबे समय से इस मांग को लेकर आंदोलनरत है। इसके अलावा ताल-घाट और बालू के ठेकों में प्राथमिकता देने, पुश्तैनी जमीनों पर अधिकार बहाल करने और विमुक्त जनजाति से जुड़ी सुविधाएं दिलाने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई जाएगी।

जनगणना और आरक्षण पर रणनीति:
पार्टी नेतृत्व का कहना है कि आगामी जनगणना में जातिगत आंकड़ों का विशेष महत्व होगा। ऐसे में समाज के लोगों को जागरूक किया जाएगा कि वे अपने वर्गीकरण को लेकर सजग रहें। यह मुद्दा भी रैलियों में प्रमुख रूप से उठाया जाएगा, जिससे समाज के बीच राजनीतिक चेतना बढ़ाई जा सके।

राजनीतिक दलों पर साधा निशाना:
पार्टी नेतृत्व ने पूर्ववर्ती सरकारों पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विभिन्न सरकारों ने निषाद समाज के अधिकारों की अनदेखी की है। उनका कहना है कि समाज को उसका हक तभी मिलेगा जब वह संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद करेगा। रैलियों के जरिए पार्टी अपने समर्थकों को इसी दिशा में प्रेरित करने का प्रयास करेगी।

आगामी चुनावों की तैयारी तेज:
इन रैलियों को आगामी चुनावों की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। निषाद पार्टी अपने जनाधार को मजबूत करने और राजनीतिक समीकरणों में अपनी भूमिका को बढ़ाने के लिए यह अभियान चला रही है। पार्टी को उम्मीद है कि इन रैलियों से उसे प्रदेश की राजनीति में मजबूत स्थान मिलेगा।

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