बलिया के बांसडीह में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद (Dr. Sanjay Nishad) का बयान चर्चा का कारण बन गया। कार्यक्रम में उन्होंने संबोधन देते हुए कहा कि “बलिया में अंग्रेजों के दलाल बहुत थे और दलाली का सिस्टम आज भी चल रहा है।” उनके इस कथन ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया और कुछ संगठनों ने इसे बलिया की ऐतिहासिक पहचान पर टिप्पणी बताते हुए आपत्ति जताई। बयान के विवाद में घिरते ही सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद मंत्री को सफाई देनी पड़ी। उन्होंने बाद में कहा कि “बलिया बागी बलिया है, जिसने अंग्रेजों को भगाया था।”
विवादित बयान पर नाराजगी: मंत्री द्वारा दिए गए इस वक्तव्य के बाद कई स्थानीय संगठनों में नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि यह टिप्पणी बलिया के वीर सेनानियों के योगदान को कमतर दर्शाती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी कई लोगों ने इसे अनुचित और ऐतिहासिक तथ्यों से खिलवाड़ बताते हुए प्रतिक्रिया व्यक्त की। विरोध बढ़ने के साथ ही मंत्री की टिप्पणी मुद्दा बन गई और जिले भर में इस पर चर्चा तेज हो गई।
करणी सेना की इनाम घोषणा: इस विवाद के बीच करणी सेना (Karni Sena) के जिलाध्यक्ष कमलेश (Kamlesh) का बयान मामला और भड़का गया। कमलेश ने मंत्री के बयान पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि मंत्री ने शहीद सेनानियों का अपमान किया है। उन्होंने दावा किया कि डॉ. संजय निषाद के “जीभ काटने वाले” को 5 लाख 51 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा। इस घोषणा ने पूरे जिले में हलचल मचा दी और राजनीतिक बहस और तीखी होती चली गई।
सोशल मीडिया पर बढ़ती प्रतिक्रिया: डॉ. संजय निषाद का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। लोग अपनी-अपनी राय जाहिर कर रहे हैं। कुछ इसे चुनावी माहौल से जुड़ा बयान बता रहे हैं, जबकि कई उपयोगकर्ता इसे अनुचित और असंवेदनशील बताते हुए निंदा कर रहे हैं। जिला और प्रदेश स्तर पर भी यह बयान चर्चा का विषय बन गया है।
स्थानीय स्तर पर तनावपूर्ण माहौल: बयान और उसके बाद की इनाम घोषणा ने स्थानीय राजनीतिक वातावरण को गर्म कर दिया है। कई समूहों ने इसे बलिया के गौरव को ठेस पहुंचाने वाला बताया है, जबकि दूसरी ओर कुछ लोग मंत्री के स्पष्टीकरण को पर्याप्त मान रहे हैं। हालांकि विवाद अब भी शांत नहीं हुआ है और जिले में बहस जारी है।
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