Mukhtar Factor: गाज़ीपुर सदर से सपा का ब्राह्मण कार्ड?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर पूर्वांचल चर्चाओं में है। कौन सी पार्टी किसको टिकट देगी जी अभी पूर्णत: स्पष्ट नहीं है। कहां जाता रहा है कि पूर्वांचल की राजनीति में अंसारी परिवार का दखल रहता है लेकिन दूसरा पक्ष ऐसा भी है जो कहता है कि पूर्वांचल की राजनीति में राजनीति करने वाले कई लोग अंसारी परिवार सलाह और समर्थन मांगते हैं इसलिए लोगों को लगता है कि पूर्वांचल की राजनीति में अंसारी परिवार का दखल रहता है।

वैसे यदि बात गाजीपुर की करें तो गाजीपुर में समाजवादी पार्टी ने जमानिया सीट से ओमप्रकाश सिंह और जंगीपुर सीट से मौजूदा विधायक डॉ वीरेंद्र यादव पर एक बार फिर भरोसा जताया है। इधर खबर यह भी आ रही है की मोहम्मदाबाद सीट से मुख्तार अंसारी के बड़े भाई सिबगतुल्लाह अंसारी का नाम फाइनल हो गया है। लोगों का कहना है कि डॉ वीरेंद्र यादव और ओमप्रकाश सिंह के संबंध अंसारी परिवार से काफी अच्छे हैं और राजनीति में यह समय-समय पर एक दूसरे की मदद लेते रहते हैं।

इन 3 सीटों के अलावा यह लगभग तय है की 4 सीटों में से 2 सीटें जहुराबाद और जखनियां समाजवादी पार्टी के समझौते में जाएंगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल सदर और सैदपुर किस सीट को लेकर बना हुआ है। सैदपुर की सीट से कई दावेदार है अब तक फैसला सामने नहीं आया है लेकिन सदर सीट का गणित बदल सकता है और इस सीट पर भी अंसारी परिवार का असर नजर आ सकता है। सूत्रों के अनुसार गाजीपुर सदर विधानसभा की सीट समाजवादी पार्टी या सपा गठबंधन की तरफ से ब्राह्मण चेहरे को जा रही है और वह ब्राह्मण चेहरा कोई और नहीं कानून की किताब में मुख्तार अंसारी से संबंध रखने वाले गणेश दत्त मिश्र हो सकते हैं। यदि सूत्रों को छोड़ दे तो लोगों का यह भी मानना है कि वह ब्राह्मण चेहरा एस पी पाण्डेय का भी हो सकता है। लेकिन सूत्रों से मिली अब तक जानकारी सही रही है इसलिए सूत्र यह भी उम्मीद कर रहे हैं कि सदर से सपा एंड गठबंधन का उम्मीदवार गणेश दत्त मिश्र के रूप में होगा।

कानून की किताब में गणेश दत्त मिश्र को मुख्तार अंसारी का करीबी बताया गया और मुख्तार अंसारी को माफिया। कानूनी कार्यवाही में गणेश दत्त मिश्र के पिता के नाम की 6 मंजिला इमारत को गिरा दिया गया, गणेश दत्त मिश्र का नाम लेकर करोड़ों की जमीन भी कुर्क की गई, गणेश दत्त मिश्र का शस्त्र लाइसेंस भी निरस्त किया गया था। जानकारी के अनुसार गणेश दत्त मिश्र लगातार कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं और उनको शस्त्र लाइसेंस मामले में सफलता भी मिली है। जानकारों का मानना है कि गणेश दत्त मिश्र व्यापारी है और ब्राह्मण चेहरा है और गाजीपुर सदर विधानसभा क्षेत्र में वह जोरदार टक्कर दे सकते हैं। गाजीपुर सदर क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ भी है। वही गाजीपुर सदर विधानसभा क्षेत्र में बसपा के टिकट से राजकुमार सिंह गौतम मैदान में है और वही भाजपा से राज्य सहकारिता मंत्री डॉ संगीता बलवंत का नाम करीब-करीब फाइनल है। ऐसे में सदर विधानसभा क्षेत्र की लड़ाई दिलचस्प होने वाली है।

लेकिन मऊ जनपद के घोसी सीट से सपा के उम्मीदवार का नाम चौकाने वाला है। वह नाम है योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री का पद छोड़कर सपा में आए दारा सिंह चौहान का पिछले चुनाव में वह भाजपा के टिकट पर मऊ की मधुबन सीट से विधानसभा पहुंचे थे। इस बार सपा में घोसी सीट पर मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी की दावेदारी मानी जा रही थी पिछले चुनाव में अब्बास घोषित सीट पर बसपा के टिकट पर लड़े थे और भाजपा को कड़ी चुनौती भी दिया था। लेकिन समाजवादी पार्टी ने घोषित सीट से दारा सिंह चौहान को उम्मीदवार बना दिया है। अब देखने वाली बात यह है कि इस विधानसभा चुनाव में अब्बास अंसारी का क्या रोल रहता है?

अब जैसा कि मैंने पहले कहा सिर्फ पूर्वांचल की राजनीति में लोग कहते हैं कि अंसारी परिवार का दखल रहता है? अब विधानसभा चुनाव के साथ-साथ स्थानीय निकाय के भी चुनाव हो रहे हैं यानी एमएलसी का चुनाव। निर्वाचन आयोग की ओर से घोषित कार्यक्रम के तहत गाजीपुर सहित प्रदेश की कुल 35 सीटों के लिए यह चुनाव दो चरणों में होगा। गाजीपुर में चुनाव पहले चरण में होगा इसके लिए 4 फरवरी से नामांकन काम शुरू हो जाएगा और 11 फरवरी तक चलेगा नामांकन पत्रों की जांच 14 फरवरी को होगी और नाम वापसी के लिए अंतिम तारीख 16 फरवरी तय है जबकि मतदान 3 मार्च को सुबह 8:00 से शाम 4:00 बजे तक होगा मतगणना 12 मार्च को शुरू होगी।

एमएलसी के चुनाव को लेकर भाजपा और सपा तैयारी में जुट गई मौजूदा वक्त में गाजीपुर की सीट पर भाजपा का कब्जा है हालांकि पिछले चुनाव में भाजपा का अधिकृत तौर पर कोई उम्मीदवार नहीं था। सपा से बगावत कर चुनाव मैदान में उतरे विशाल सिंह चंचल को इस तरह से भाजपा ने समर्थन और सहयोग दिया। कहा जाता है कि चंचल को अंसारी बंधुओं का भी पूरा साथ मिला। उस वक्त सपा के उम्मीदवार थे डॉ सानंद सिंह और उनको अकेले पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह ने पूर्ण समर्थन दिया। डॉ सानंद सिंह, चुनाव भी मात्र 65 वोट से हारे। विशाल सिंह चंचल को 1186 वोट मिले थे। जबकि डॉ सानंद सिंह को 1121 मत प्राप्त हुए थे। अब विशाल सिंह चंचल भाजपा में है और योगी सरकार के एंटी माफिया मुहिम की तारीफ करते हुए भी नजर आ जाते हैं। खैर अब अंसारी परिवार का एक खेमा सपा में और दूसरा खेमा शांति मुद्रा में। राजनीति की अजीब विडंबना है कब कौन मेरा है कब कौन तेरा यह जनता कभी समझ ही नहीं पाती।

कल 30 जनवरी है कल महात्मा गांधी के सिद्धांतों को याद करना और उसे अपने जीवन में अमल करना बिल्कुल ना भूलें और हां इसी बार की तरह इस बार भी कल कुछ लोग या बहुत लोग ट्विटर सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक हत्यारे का समर्थन करते नजर आ सकते हैं। यदि आप अपने देश की तरक्की शांति और सुख चाहते हैं तो सोशल मीडिया से नही, सोशल मीडिया पर फैलाए जाने वाले ज़हर से बिल्कुल दूर रहिएगा। तो फिर देखते हैं आप का क्या रुख रहता है। तब तक आप पढ़ते और देखते रहिए ABT न्यूज़।

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