सांसदों और विधायकों के लंबित मुकदमों पर जून 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि ऐसे मामलों का निपटारा 1 साल के भीतर होगा लेकिन वर्तमान परिस्थितियां कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट के दहलीज पर पहुंच चुका है भारतीय जनता पार्टी के नेता और वकील अश्वनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की। उन्होंने कहा कि सांसदों और विधायकों से जुड़े लंबित मामलों का निपटारा जल्द होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों और विधायकों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को लेकर बुधवार यानी 25 अगस्त 2021 को जो महत्वपूर्ण आदेश दिया है,उसकी तारीफ इसलिये भी की जानी चाहिए अब राज्य सरकारों पर एक तरह से शिकंजा कस गया कि वे ऐसे मामलों में अब कोई राजनीतिक पक्षपात न कर सकें. शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि हाई कोर्ट की इजाजत के बिना अब राज्य सरकारें सांसदों और विधायकों के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस नहीं ले सकेंगी. यानी अब मुकदमे वापस लेने में राज्य सरकार की नहीं बल्कि हाइकोर्ट की मर्ज़ी ही चलेगी. दूसरे शब्दों में कहें, तो सुप्रीम कोर्ट ने देश के सारे मुख्यमंत्रियों को तगड़ा झटका देते हुए संदेश दिया है कि न्यायपालिका को मिले अधिकारों में उनका दखल बर्दाश्त नहीं होगा. तो क्या अब इसका असर सांसद अतुल राय और विधायक मुख्तार अंसारी के केस पर भी पड़ेगा देखें पूरा वीडियो:

