तो हो गया मोख्तार को उम्रकैद!

03 अगस्त 1991, वो दिन जब वाराणसी ही पूरा उत्तर प्रदेश दहल गया था. वाराणसी का लहुराबीर इलाका. सुबह का समय था. अवधेश राय और उनके छोटे भाई कांग्रेस नेता अजय राय घर के बाहर बातचीत कर रहे थे. सब कुछ सामान्य था. तभी अचानक गोलियों के आवाज़ से पूरा वातावरण गूंज उठा, ये कोई सामान्य गोलियों की आवाज नहीं. ये गोलियां अत्याधुनिक हथियार से बरसाई गयीं थी. लोगों को कुछ समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या? तभी खून की धारा बहती हुई दिखाई दी. ये खून अवधेश राय का था. जी हाँ कांग्रेस नेता अजय राय के भाई अवधेश राय.

बताया जाता है कि जब अवधेश राय अपने भाई अजय राय के साथ अपने घर के बहार खड़े होकर बात कर रहे थे. उनकी कार भी बाहर खड़ी थी। तभी उसी वक्त एक वैन वहां तेजी से आई। हथियारबंद अपराधियों ने संभलने का मौका दिए बिना ही अवधेश राय पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। पूरा इलाका गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा था। इस घटना के बाद दहशत फैल गई थी। इससे पहले कि अजय राय कुछ कर पाते, हमलावर वहां से फरार हो गए। बदमाशों ने अत्याधुनिक हथियारों का प्रयोग किया और अवधेश के शरीर को गोलियों से छलनी कर दिया था। वो लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े थे। आननफानन अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

हत्या का आरोप मुख्तार अंसारी और मुख्तार अंसारी के सहयोगियों पर लगा था। मृतक के भाई अजय राय की तहरीर पर हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। अवधेश राय हत्याकांड के दो आरोपियों कमलेश सिंह और पूर्व विधायक अब्दुल कलाम की मौत हो चुकी है। मामले के दो अन्य आरोपी राकेश न्यायिक और भीम सिंह हैं। इस प्रकरण की सुनवाई पहले बनारस के एडीजे कोर्ट में चल रही थी। 23 नवंबर 2007 को सुनवाई के दौरान अदालत से चंद कदमों की दूरी पर बम ब्लास्ट हुआ। आरोपी राकेश न्यायिक ने सुरक्षा का हवाला देकर हाईकोर्ट की शरण ली।

इसके बाद लंबे समय तक इस मुकदमे की सुनवाई पर रोक लगी रही। विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए कोर्ट का गठन होने पर प्रयागराज में मुकदमे की सुनवाई फिर शुरू हुई। वाराणसी में एमपी-एमएलए की विशेष कोर्ट के गठन होने पर यहां मुख्तार अंसारी के खिलाफ सुनवाई शुरू हुई। राकेश न्यायिक और भीम सिंह की पत्रावली अभी भी प्रयागराज में ही लंबित है।

केस की सुनवाई के दौरान जून 2022 में पता चला कि मूल केस डायरी ही गायब है। वाराणसी से प्रयागराज तक केस डायरी की तलाशी हुई। मूल केस डायरी नहीं मिली। इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कराया है। मूल केस डायरी के गायब कराने के मामले में मुख्तार अंसारी पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने का आरोप लगा।

अब इस मामले में बांदा जेल में बंद पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी दोषी साबित किया जा चुका है. मुख्तार अंसारी को धारा 148, 149 और 302 के तहत दोषी पाया गया है. 05 जून 2023 का दिन मुख्तार अंसारी के लिए बेहद अहम था. वाराणसी की एमपी-एमएलए कोर्ट ने अवधेश राय हत्याकांड में मुख्तार अंसारी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. उम्रकैद की सजा के साथ ही एक लाख का जुर्माना भरने को भी कहा गया है. जुर्माना न भरने की दशा में 6 महीने की अतिरिक्त सजा सुनाई गई है. इसके अलावा 20 हजार रुपये का एक और जुर्माना भी लगाया गया है, जिसे न चुकाने पर सजा में 3 महीने और जोड़ दिए जाएंगे.

Related Post

Leave a Reply

Discover more from Apna Bharat Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading