रिपोर्टर: सुरेश भाष्कर
पंडित गोविंद बल्लभ पंत स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित सांसद खेल महोत्सव का समापन विवाद और हंगामे के बीच हुआ। समापन कार्यक्रम के दौरान खिलाड़ियों ने अव्यवस्थाओं और कथित धांधली के आरोप लगाते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया, जिससे स्टेडियम का माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। देखते ही देखते स्थिति बेकाबू होती चली गई और आयोजन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
आयोजन में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों का कहना था कि खेल प्रतियोगिताओं के दौरान तो सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन पुरस्कार वितरण के समय अव्यवस्थाएं खुलकर सामने आ गईं। खिलाड़ियों के अनुसार, जिन पुरस्कारों की घोषणा पहले की गई थी, उनमें से कई नकद पुरस्कार उन्हें नहीं दिए गए। इससे खिलाड़ियों में भारी नाराजगी फैल गई और उन्होंने मंच के सामने विरोध जताना शुरू कर दिया।
पुरस्कार वितरण में अनियमितताओं के आरोप:
खिलाड़ियों ने आरोप लगाया कि पुरस्कार वितरण में गंभीर अनियमितताएं की गईं। कुछ खिलाड़ियों का कहना था कि उनके नाम घोषित होने के बावजूद उन्हें नकद पुरस्कार नहीं मिले। वहीं कई खिलाड़ियों ने आरोप लगाया कि आयोजकों ने पुरस्कारों को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती। इससे खिलाड़ियों में यह भावना गहराती गई कि उनके साथ अन्याय किया गया है।
खेल किट की गुणवत्ता पर उठे सवाल:
विरोध कर रहे खिलाड़ियों ने आयोजन के दौरान वितरित की गई लोवर और टी-शर्ट की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए। खिलाड़ियों का कहना था कि खेल महोत्सव जैसे बड़े आयोजन में दी गई खेल किट बेहद घटिया स्तर की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोजकों ने गुणवत्ता की अनदेखी करते हुए केवल औपचारिकता निभाई है।
नेताओं ने संभालने की कोशिश की स्थिति:
विवाद बढ़ता देख कार्यक्रम में मौजूद राज्यसभा सांसद नवीन जैन और पूर्व सांसद राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया। दोनों नेताओं ने खिलाड़ियों से बातचीत कर उन्हें शांत कराने की कोशिश की, लेकिन नाराज खिलाड़ियों का गुस्सा कम नहीं हुआ। हालात लगातार बिगड़ते चले गए, जिसके बाद दोनों नेताओं को कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा।
स्टेडियम में मचा हंगामा:
नेताओं के जाने के बाद खिलाड़ियों का विरोध और तेज हो गया। स्टेडियम में काफी देर तक नारेबाजी और हंगामा होता रहा। कुछ समय के लिए अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई, जिससे आयोजन की व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गईं। मौजूद दर्शक भी इस अप्रत्याशित स्थिति से हैरान नजर आए।
पुलिस बल बुलाकर संभाले गए हालात:
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आयोजन स्थल पर अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। पुलिस की मौजूदगी के बाद धीरे-धीरे हालात पर काबू पाया जा सका। पुलिस ने खिलाड़ियों को समझा-बुझाकर शांत कराया और स्थिति को नियंत्रण में लिया, जिससे कार्यक्रम का औपचारिक समापन संभव हो सका।
खिलाड़ियों में दिखी निराशा:
पुरस्कार वितरण के बाद कई खिलाड़ी बेहद मायूस नजर आए। उन्होंने खुलकर आयोजकों के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि इतने बड़े आयोजन में इस तरह की अव्यवस्थाएं स्वीकार्य नहीं हैं। खिलाड़ियों का कहना था कि मेहनत और प्रदर्शन के बाद भी यदि उन्हें उचित सम्मान और पुरस्कार न मिले, तो ऐसे आयोजनों का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
निष्पक्ष जांच की मांग:
खिलाड़ियों ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जो भी लोग अव्यवस्थाओं और अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। खिलाड़ियों का कहना है कि यदि समय रहते इस तरह की घटनाओं पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में खेल आयोजनों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।
आयोजन के अंत में यह स्पष्ट हो गया कि सांसद खेल महोत्सव का समापन खेल भावना से ज्यादा विवादों और नाराजगी के साथ हुआ, जिसने आयोजन की छवि को नुकसान पहुंचाया है।
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