‘हिंदू 3 बच्चे पैदा करें, घर वापसी का काम तेज होना चाहिए’, लखनऊ में RSS प्रमुख मोहन भागवत का बयान

रिपोर्टर: अनुज कुमार

लखनऊ (Lucknow) के निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक Mohan Bhagwat ने हिंदू समाज के संगठन और सशक्तिकरण पर बल दिया। उन्होंने कहा कि समाज को संगठित और जागरूक रहने की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी से भय का प्रश्न नहीं है, लेकिन सावधानी और सजगता आवश्यक है। बैठक में विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

A group of three men seated at a table during a social conference in Lucknow, India, with a colorful banner in the background featuring symbols of Indian culture.

जनसंख्या और मतांतरण पर चिंता:
अपने संबोधन में उन्होंने हिंदू समाज की घटती जनसंख्या पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने लालच या जबरदस्ती से होने वाले मतांतरण पर रोक लगाने की बात कही। साथ ही कहा कि जो लोग पुनः हिंदू धर्म में लौटना चाहते हैं, उनके प्रति समाज को जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने परिवारों में नव दंपतियों को अधिक संतानों के महत्व के विषय में जागरूक करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

घुसपैठ और सजगता का संदेश:
उन्होंने बढ़ती घुसपैठ को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि ऐसे तत्वों की पहचान कर विधिसम्मत कार्रवाई की जानी चाहिए। समाज को सतर्क रहने और राष्ट्रीय हितों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया गया। उन्होंने कहा कि समाज की एकता और अनुशासन ही सुरक्षा का आधार है।

सद्भाव और समन्वय की आवश्यकता:
बैठक में उन्होंने कहा कि भेदभाव की प्रवृत्ति समाज को कमजोर करती है। सभी नागरिक एक ही मातृभूमि के पुत्र हैं और आपसी सद्भाव ही राष्ट्र को मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा कि सनातन विचारधारा समन्वय और सद्भाव का संदेश देती है। विरोधियों को समाप्त करने की नहीं, बल्कि सत्य को समझकर आचरण में उतारने की आवश्यकता है।

मातृशक्ति की भूमिका पर विचार:
उन्होंने परिवार और समाज में मातृशक्ति की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। कहा कि भारतीय परंपरा में महिला को शक्ति का स्वरूप माना गया है। महिलाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिए जाने की आवश्यकता पर भी उन्होंने जोर दिया। उनके अनुसार परिवार की संरचना और संस्कारों की धुरी मातृशक्ति ही होती है।

कानून और सामाजिक संतुलन:
एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि कानून का पालन सभी को करना चाहिए। यदि किसी कानून में सुधार की आवश्यकता हो तो उसके लिए संवैधानिक उपाय उपलब्ध हैं। समाज में जातीय या अन्य आधारों पर संघर्ष नहीं, बल्कि समन्वय की भावना होनी चाहिए। जो कमजोर हैं, उन्हें सहयोग देकर ऊपर उठाना समाज का कर्तव्य है।

भारत की वैश्विक भूमिका:
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत भविष्य में विश्व को मार्गदर्शन देने की क्षमता रखता है। अनेक वैश्विक समस्याओं के समाधान भारतीय चिंतन में निहित हैं। इसके लिए समाज को संगठित और मूल्य आधारित जीवनशैली अपनानी होगी।

सामाजिक संगठनों की सहभागिता:
कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक और आध्यात्मिक संगठनों के प्रतिनिधि सम्मिलित हुए, जिनमें Ramakrishna Mission, ISKCON, Art of Living, Arya Samaj सहित अनेक संस्थाओं के सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने सामाजिक सद्भाव और सहयोग की भावना को मजबूत करने पर बल दिया।


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