गाज़ीपुर (Ghazipur) जिले के मोहम्मदाबाद (Mohammadabad) तहसील गोलंबर और महिला अस्पताल क्षेत्र की यातायात व्यवस्था अब आम अव्यवस्था नहीं, बल्कि गंभीर जनसंकट का रूप ले चुकी है। यहां लगने वाला भीषण जाम रोज़मर्रा की समस्या बन गया है, जिससे आम नागरिकों के साथ-साथ आपात सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। हालात इतने खराब हैं कि घंटों तक वाहन रेंगते रहते हैं और पूरा इलाका ठप नजर आता है।

महिला अस्पताल के सामने की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है। यह अस्पताल क्षेत्र प्रसव और गंभीर महिला रोगों से जुड़ी आपात सेवाओं का प्रमुख केंद्र है, लेकिन जाम के कारण यहां पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एंबुलेंस की सायरन भीषण जाम में दबकर रह जाती है और मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। कई बार गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भारी मशक्कत करनी पड़ती है।
महिला अस्पताल के सामने हालात बदतर:
स्थानीय नागरिकों के अनुसार महिला अस्पताल के ठीक सामने सड़क पर दिनभर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। जाम की वजह से अस्पताल में आने-जाने वाले मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार तो अस्पताल के गेट तक पहुंचने में भी लंबा समय लग जाता है, जिससे इलाज में देरी का खतरा बना रहता है।
अतिक्रमण बना जाम की मुख्य वजह:
स्थानीय लोगों का कहना है कि तहसील गोलंबर, महिला अस्पताल और आसपास के क्षेत्रों में सड़क की पटरियों पर ठेले-खोमचे, दुकानदारों और अस्थायी कब्जों की भरमार है। इन अतिक्रमणों के कारण सड़क की चौड़ाई काफी कम हो गई है। जब दोनों ओर से बड़े वाहन आमने-सामने आ जाते हैं, तो कुछ ही मिनटों में जाम विकराल रूप ले लेता है।
पटरी निर्माण न होने से बढ़ी परेशानी:
नगर पालिका क्षेत्र में गाज़ीपुर-बलिया मार्ग (Ghazipur-Ballia Road), पोस्ट ऑफिस से हाटा रोड (Hata Road) तक सड़क किनारे पटरी यानी फुटपाथ का समुचित निर्माण अब तक नहीं हो सका है। जो पटरी मौजूद है, वह भी कई जगहों पर 4 से 6 इंच तक धंसी हुई और बेहद जर्जर हालत में है। इसके चलते पैदल यात्री, साइकिल सवार और दोपहिया वाहन चालक मजबूरी में मुख्य सड़क पर चलने को विवश हैं।
भारी वाहनों से बिगड़ती है स्थिति:
जैसे ही संकरी सड़क पर दोनों ओर से भारी वाहन आ जाते हैं, यातायात पूरी तरह अव्यवस्थित हो जाता है। पैदल यात्रियों और दोपहिया चालकों को जगह नहीं मिल पाती, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन जाता है। नतीजतन कुछ ही देर में पूरा इलाका जाम की चपेट में आ जाता है।
रोज़ का संकट, नहीं अस्थायी समस्या:
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या किसी एक दिन या विशेष मौके की नहीं है। रोज़ सुबह से लेकर देर शाम तक यही हालात बने रहते हैं। स्कूली बच्चे, दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, मरीज और व्यापारी सभी जाम से परेशान हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा।
जनता को समाधान की उम्मीद:
नगरवासियों का साफ कहना है कि यदि सड़क किनारे पटरी का समुचित और समतल निर्माण कराया जाए और अतिक्रमण को सख्ती से हटाया जाए, तो स्थिति में काफी सुधार हो सकता है। पैदल यात्री और दोपहिया वाहन पटरी का उपयोग कर सकेंगे, जिससे मुख्य सड़क पर वाहनों का दबाव कम होगा और जाम की समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।
प्रशासन की अनदेखी पर सवाल:
फिलहाल प्रशासन की अनदेखी ने मोहम्मदाबाद को जाम के ऐसे दलदल में धकेल दिया है, जहां हर दिन आमजन परेशान और यातायात व्यवस्था बेबस नजर आती है। स्थानीय लोगों का सवाल साफ है कि क्या किसी बड़ी दुर्घटना या जानमाल के नुकसान के बाद ही ठोस कदम उठाए जाएंगे।
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