मीराबाई चानू ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में जीता सिल्वर



नॉर्वे के फोर्डे में हुए वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भारत की स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने 48 किलो कैटेगरी में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। उन्होंने कुल 199 किलो वजन (84 किग्रा स्नैच + 115 किग्रा क्लीन एंड जर्क) उठाया।

स्नैच में मुश्किलें, क्लीन एंड जर्क में दमखम:


स्नैच में मीराबाई के दो प्रयास 87 किग्रा पर सफल नहीं हो पाए, लेकिन क्लीन एंड जर्क में उन्होंने शानदार वापसी की। अपने तीनों प्रयास 109 किग्रा, 112 किग्रा और 115 किग्रा में सफल रहीं। खास बात यह है कि 115 किग्रा का वजन उन्होंने आखिरी बार 2021 के टोक्यो ओलिंपिक में उठाया था, जहां भी उन्हें सिल्वर मेडल मिला था।

गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल:


उत्तर कोरिया की रि सोंग गुम ने 213 किग्रा (91 किग्रा स्नैच + 122 किग्रा क्लीन एंड जर्क) उठाकर गोल्ड मेडल और नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। थाईलैंड की थनयाथोन सुक्चारो ने 198 किग्रा (88 + 110 किग्रा) वजन उठाकर ब्रॉन्ज मेडल जीता।

चानू का तीसरा वर्ल्ड मेडल:


मीराबाई चानू का यह वर्ल्ड चैंपियनशिप में तीसरा मेडल है। 2017 में वह वर्ल्ड चैंपियन रही थीं और 2022 में भी सिल्वर मेडल अपने नाम किया था।

कैटेगरी में बदलाव:


31 साल की चानू पहले 49 किलो वर्ग में वेटलिफ्टिंग करती थीं। 2024 के पेरिस ओलिंपिक में 49 किलो वर्ग हट जाने के कारण उन्हें 48 किलो वर्ग में शिफ्ट होना पड़ा।

हाल ही में कॉमनवेल्थ गोल्ड:


मीराबाई ने एक महीने पहले अहमदाबाद में हुए कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में 48 किलो कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीता था। उन्होंने कुल 193 किग्रा वजन उठाया, जिसमें स्नैच 84 किग्रा और क्लीन एंड जर्क 109 किग्रा था। यह पेरिस ओलिंपिक के बाद उनका पहला इंटरनेशनल प्रदर्शन था।

पर्सनल बेस्ट से अभी दूर:


चानू का पर्सनल बेस्ट स्नैच में 88 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 119 किग्रा है। इसका कंबाइंड पर्सनल बेस्ट 207 किग्रा है। वर्ल्ड चैंपियनशिप में 199 किग्रा वजन उठाकर उन्होंने पेरिस ओलिंपिक के स्तर की बराबरी की, जबकि टोक्यो ओलिंपिक में उनका कंबाइंड वेट 202 किग्रा था।



अंतरराष्ट्रीय मंच पर अनुभव:


2020 टोक्यो ओलिंपिक की सिल्वर मेडलिस्ट चानू ने पेरिस ओलिंपिक में मेडल जीतने से चूकने के बाद अब अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में वापसी की है। उनका अनुभव और निरंतर प्रदर्शन उन्हें भारतीय वेटलिफ्टिंग का प्रमुख चेहरा बनाता है।

मीराबाई की इस सफलता ने भारतीय खेल प्रेमियों में उत्साह बढ़ा दिया है और अगले अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के लिए उम्मीदें बढ़ा दी हैं।

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