रिपोर्टर: जफ़र इकबाल
जमानियाँ (Zamania) से शुरू होकर नंदगंज (Nandganj) तक पहुंची गांधीवादी युवाओं की ‘मनरेगा बचाओ यात्रा’ ने मंगलवार 10 फरवरी को विभिन्न गांवों और बाजारों में जनसंपर्क कर ग्रामीणों को जागरूक किया। मोदी सरकार द्वारा मनरेगा में किए गए बदलावों के विरोध में निकाली जा रही इस यात्रा के माध्यम से युवाओं ने अधिकार आधारित कानून को बहाल करने की मांग उठाई और ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों के बीच संवाद स्थापित किया।

जमानियाँ से नंदगंज तक यात्रा का क्रम:
यात्रा जमानियाँ (Zamania) से निकलकर बूढ़ाडीह, बघरी, धरम्मरपुर, बड़सरा बाजार, दीनापुर चट्टी, मेदनीपुर और चोचकपुर होते हुए नंदगंज (Nandganj) पहुंची। रास्ते में जगह-जगह सभाएं आयोजित की गईं, जहां गांधीवादी युवाओं ने ग्रामीणों को मनरेगा से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने को साकार करने के लिए रोजगार आधारित योजनाओं को मजबूत करना आवश्यक है।
चौरी-चौरा से बनारस तक साइकिल यात्रा:
यह साइकिल यात्रा 17 जनवरी को चौरी-चौरा (Chauri Chaura), गोरखपुर (Gorakhpur) से प्रारंभ हुई थी। यात्रा गोरखपुर, देवरिया, बलिया, मऊ और गाजीपुर (Ghazipur) से होते हुए 17 फरवरी को बनारस (Varanasi) में प्रधानमंत्री संसदीय कार्यालय (PMO) के घेराव के साथ समाप्त होगी। युवाओं का कहना है कि नए कानून के बाद मनरेगा मजदूरों में जो आशंकाएं और अनिश्चितताएं पैदा हुई हैं, उन्हें पीएमओ (PMO) तक पहुंचाया जाएगा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मजदूर, महिलाएं, छात्र-छात्राएं और नागरिक समाज के लोग शामिल होकर मांगपत्र सौंपेंगे।
सभा में उठी मजदूर हितों की आवाज:
सभा को संबोधित करते हुए यात्री रजत ने कहा कि सरकार VB-G RAM-G जैसे प्रावधानों के माध्यम से मनरेगा को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, जिससे ग्रामीण मजदूरों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यात्री नीरज ने कहा कि एक ओर बड़े उद्योगपतियों को राहत दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर मनरेगा जैसी योजना में बदलाव से श्रमिक वर्ग प्रभावित होगा। यात्री राजू ने कहा कि मनरेगा लागू होने के बाद महिलाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिला था, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई थी।
यात्रा की प्रमुख मांगें:
यात्रा के दौरान युवाओं ने तीन मुख्य मांगें रखीं। पहली, काम के संवैधानिक अधिकार को बहाल किया जाए। दूसरी, VB-G RAM G जैसे मजदूर विरोधी कानून को वापस लिया जाए। तीसरी, मनरेगा की न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन निर्धारित की जाए।
यात्रा में शामिल प्रमुख लोग:
इस अभियान में मृत्युंजय मौर्या, अक्षय यादव, सतीश साहनी, प्रवीण, राहुल पवारा (महाराष्ट्र), हिमांशु, रजत सिंह, प्रियेश, विवेक मिश्र, नीरज कुमार, नजम शमीम, तौहीद बेग, सूफी सलीम, विवेक विराट (समस्तीपुर), सुमन आनंद, कन्हैया साहनी, गौरव पुरोहित (पश्चिम बंगाल), बृजेश साहनी, गौरव, संगम गुप्ता, राशिद (बेगूसराय), राजू कुमार (सहरसा) और विवेक कुमार (नालंदा) सहित कई युवा शामिल रहे। यात्रा के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा और संवाद का सिलसिला जारी है।
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