रिपोर्टर: अनुज कुमार
मेटा (Meta) कंपनी के अलर्ट पर पुलिस मुख्यालय लखनऊ (Lucknow) के निर्देश से जनपद इटावा (Etawah) की पुलिस ने महज 15 मिनट में मौके पर पहुंचकर एक युवक की जान बचा ली। यह घटना उत्तर प्रदेश पुलिस (Uttar Pradesh Police) और मेटा के बीच वर्ष 2022 से लागू समन्वय व्यवस्था की प्रभावशीलता को दर्शाती है, जिसके तहत सोशल मीडिया पर आत्मघाती संकेत मिलने पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। समय रहते की गई पुलिस की सक्रियता और मानवीय संवेदनशीलता से एक परिवार को बड़ा आघात झेलने से बचा लिया गया।
मेटा और पुलिस की समन्वय व्यवस्था:
उत्तर प्रदेश पुलिस और मेटा के बीच वर्ष 2022 से एक विशेष व्यवस्था लागू है। इस व्यवस्था के तहत यदि कोई व्यक्ति फेसबुक (Facebook) या इंस्टाग्राम (Instagram) पर आत्महत्या से संबंधित कोई पोस्ट या स्टोरी साझा करता है, तो मेटा कंपनी उस पोस्ट की जानकारी ई-मेल और फोन के माध्यम से उत्तर प्रदेश पुलिस को तत्काल उपलब्ध कराती है। इस सूचना के आधार पर पुलिस संबंधित जनपद को अलर्ट कर त्वरित कार्रवाई करती है। आंकड़ों के अनुसार 01 जनवरी 2023 से 10 दिसंबर 2025 के बीच ऐसे अलर्ट के आधार पर 1720 व्यक्तियों के प्राणों की रक्षा की जा चुकी है।
इंस्टाग्राम स्टोरी से मिला अलर्ट:
12 दिसंबर 2025 को जनपद इटावा के थाना जसवंतनगर (Jaswantnagar) क्षेत्र निवासी 20 वर्षीय बीएससी छात्र ने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी साझा की। इस स्टोरी में युवक ने अपनी तस्वीर के साथ रस्सी का उल्लेख करते हुए भावनात्मक संदेश लिखा था। इस पोस्ट को मेटा कंपनी के सिस्टम ने संवेदनशील मानते हुए उसी दिन रात 10:16 बजे पुलिस महानिदेशक कार्यालय स्थित सोशल मीडिया सेंटर को ई-मेल के माध्यम से अलर्ट भेजा।
मुख्यालय से त्वरित निर्देश:
मेटा से प्राप्त अलर्ट का संज्ञान लेते हुए पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश राजीव कृष्ण (Rajeev Krishna) द्वारा तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। मुख्यालय के सोशल मीडिया सेंटर ने अलर्ट में उपलब्ध मोबाइल नंबर के आधार पर युवक की लोकेशन ट्रेस की और संबंधित जानकारी तुरंत जनपद इटावा पुलिस को भेजी गई, ताकि समय रहते मदद पहुंचाई जा सके।
15 मिनट में मौके पर पहुंची पुलिस:
मुख्यालय से प्राप्त सूचना और लोकेशन के आधार पर थाना जसवंतनगर के थानाध्यक्ष कमल भाटी (Kamal Bhati) अपनी टीम के साथ महज 15 मिनट के भीतर युवक के निवास स्थान पर पहुंच गए। परिजनों से पूछताछ में पता चला कि युवक घर से बाहर निकल चुका है। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए पुलिस ने परिजनों के साथ तत्काल तलाश शुरू की।
जंगल की ओर जाते समय रोका गया युवक:
तलाश के दौरान पुलिस टीम ने युवक को जंगल की ओर जाते हुए देखा, जिसके हाथ में रस्सी थी। हालात की नजाकत को भांपते हुए पुलिस कर्मियों ने तुरंत युवक को रोका और सुरक्षित स्थान पर लाकर उससे बातचीत शुरू की। शांतिपूर्ण तरीके से की गई बातचीत में युवक ने बताया कि गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप के कारण वह मानसिक अवसाद में था और भावावेश में आकर आत्मघाती कदम उठाने जा रहा था।
काउंसलिंग से बदली सोच:
स्थानीय पुलिस ने न केवल युवक को आत्मघाती कदम उठाने से रोका, बल्कि उसे समझाइश देकर मानसिक संबल भी प्रदान किया। मौके पर की गई काउंसलिंग के दौरान युवक को जीवन के महत्व, परिवार की भूमिका और भविष्य की संभावनाओं के बारे में समझाया गया। काउंसलिंग के बाद युवक ने भविष्य में ऐसा कोई कदम न उठाने का आश्वासन दिया।
परिजनों ने जताया आभार:
युवक की जान बचने पर परिजनों ने उत्तर प्रदेश पुलिस की तत्परता, मानवीय संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई के लिए आभार व्यक्त किया। परिजनों का कहना था कि यदि समय पर पुलिस न पहुंचती, तो परिणाम बेहद दुखद हो सकता था। इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि तकनीक और प्रशासनिक सतर्कता के समन्वय से कई अनमोल जिंदगियों को बचाया जा सकता है।
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