2023 के विधानसभा चुनाव में राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा को बम्पर जीत मिली, जीत ऐसी कि मानो कि राजनीति के नक़्शे में विपक्ष शुन्य हो गया हो.
चुनाव परिणाम को लेकर कई सवाल उठे, एग्जिट पोल पर भी सवाल उठे और एक बार फिर EVM भी गंभीर आरोपों में घिर गया. लेकिन चिंतन, मंथन में व्यस्त विपक्ष को प्रधानमंत्री मोदी का काट न मिल सका.
विपक्ष सोचता रहा और इधर मुख्यमंत्री के नाम का एलान कर भाजपा ने एक बार फिर चौंका दिया. रमन सिंह, शिवराज सिंह चौहान और वसुन्द्रा राजे के समर्थकों की निगाह टकटकी लगाये देख रही थी और और शीर्ष नेतृत्व ने नए चेहरों को नया मौका दे दिया.
इधर तीन राज्यों के नए मुख्यमंत्रीयों पर चर्चा हो रही थी और उधर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने नयी चर्चा को जन्म दे दिया. फैसला जम्मू कश्मीर में 370 को लेकर था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने केंद्र सरकार की सोच को बल दे दिया. भाजपा के तमाम नेताओं ने फैसले का स्वागत किया, स्वागत तो उस नेता ने भी किया जो कभी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की रेस में था. जिसका नाम मुख्यमंत्री के रेस में आने के बाद पूर्वांचल में जश्न का माहौल हो गया था.
खैर ये पहली बार नहीं है जब भाजपा ने मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर चौकाया हो. 2017 में मोदी मैजिक के सहारे यूपी में प्रचंड बहुमत से जीतकर सत्ता में आई बीजेपी ने सीएम के नाम पर फैसला करने में एक हफ्ता लगाया. लखनऊ से लेकर दिल्ली तक खूब मंथन हुआ. तमाम दावेदारों के नामों पर चर्चा हुई और योगी आदित्यनाथ के नाम पर मुहर लग गई. इस रेस में मनोज सिन्हा भी थे जो अब जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल हैं. अब सवाल मनोज सिन्हा के राजनितिक भविष्य को लेकर खड़ा हो गया है. गाजीपुर से सांसद और केन्द्रीय मंत्री की महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर सीएम की रेस में शामिल होने वाले मनोज सिन्हा एक बार फिर चर्चा में तब आ गये जब उन्होंने ये कह दिया कि मैं जम्मू कश्मीर में चुनाव कराकर ही यहाँ से जाऊंगा.
अब चर्चा और चिंतन हो भी क्यों न ? इधर जिस लोकसभा सीट से मनोज सिन्हा सांसद थे यानि गाजीपुर के समर्थक उन्हें एक बार फिर सांसद बनाना चाहते हैं. लेकिन मनोज सिन्हा के इस बयान ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए कि क्या मनोज सिन्हा 2024 लोकसभा चुनाव से दूर रहने वाले हैं?
इन सवालों का जवाब सुप्रीम कोर्ट के 370 पर दिए गये फैसले में छुपा हुआ था. जिसमे चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा जल्द बहाल होना चाहिए। यहां चुनाव के लिए भी जल्द से जल्द कदम उठाए जाएं। उन्होंने चुनाव आयोग को निर्देश देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में 30 सितंबर 2024 से पहले विधानसभा चुनाव सुनिश्चित किए जाएं।
आपको बता दें कि जम्मू कश्मीर में आखिरी बार विधानसभा चुनाव 2014 में हुए थे। यह सरकार जून 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के इस्तीफे के बाद गिर गई थी और वहां राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटा दिया था।
अब क्या मनोज सिन्हा लोकसभा का चुनाव लड़ेंगें या नहीं ये चुनाव आयोग के निर्णय पर टिका है. यदि चुनाव आयोग लोकसभा चुनाव के बाद जम्मू कश्मीर में चुनाव करवाता है और मनोज सिन्हा अपने बयान पर कायम रहते हैं तो इस लोकसभा में मनोज सिन्हा के समर्थकों को झटका लग सकता है, लेकिन यदि चुनाव आयोग जम्मू कश्मीर के चुनाव के बाद लोकसभा का चुनाव करवाता है तो मनोज सिन्हा के समर्थक रहत की साँस ले सकते हैं. जितना समर्थक मनोज सिन्हा को अपने सांसद और केन्द्रीय मंत्री के रूप में पुन: देखना चाहते हैं, उतना ही भाजपा का शीर्ष नेतृत्व मनोज सिन्हा पर विश्वास करता है, शायद इसीलिए मनोज सिन्हा को जम्मू कश्मीर जैसे संवेदनशील राज्य का उप राज्यपाल बनाया गया. लेकिन इन प्रश्नों का पूर्ण उत्तर तो मनोज सिन्हा के निर्णय पर निर्भर करता है…

