प्रयागराज (Prayagraj) में चल रहे माघ मेले का बुधवार को 12वां दिन रहा। मकर संक्रांति के पर्व के चलते मेले में पहली बार जबरदस्त भीड़ देखने को मिली। सुबह से ही संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। दोपहर 12 बजे तक करीब 40 लाख श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगा चुके थे। बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने मेला क्षेत्र को नो-व्हीकल जोन घोषित कर दिया, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु बनी रहे और किसी तरह की अव्यवस्था न हो।
सुरक्षा और व्यवस्था पर प्रशासन का फोकस:
माघ मेले में अचानक बढ़ी भीड़ के कारण प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। संगम क्षेत्र और आसपास के सेक्टरों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। श्रद्धालुओं से अपील की गई कि वे निर्धारित मार्गों का ही उपयोग करें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। नो-व्हीकल जोन लागू होने से पैदल श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था नियंत्रित रही।

पुष्पा अवतार में पहुंचे युवक ने बटोरी सुर्खियां:
भीड़ के बीच एक युवक अपने अनोखे अंदाज के कारण चर्चा का केंद्र बन गया। पुष्पा अवतार में हाथ में नकली रिवॉल्वर लेकर पहुंचे रवि किशन मिश्रा (Ravi Kishan Mishra) (21) ने मेले में मौजूद लोगों और मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के कटनी (Katni) के रहने वाले रवि किशन मिश्रा ने पुष्पा स्टाइल में संवाद बोलते हुए कहा कि वह कहीं भी रहे, झुकेगा नहीं। उनके इस अंदाज ने मेले में मौजूद लोगों के बीच कौतूहल पैदा कर दिया।
एक्टिंग का शौक और तैयारी में लगते हैं घंटे:
रवि किशन मिश्रा वर्तमान में ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बचपन से ही उन्हें एक्टिंग का शौक है और वह पहले भी विभिन्न किरदारों की नकल कर चुके हैं। पुष्पा के अवतार में सजने-संवरने में उन्हें करीब 2 से 3 घंटे का समय लगता है। उन्होंने यह भी बताया कि वह बुधवार को ही बस के माध्यम से माघ मेले में पहुंचे थे और यहां आकर अपने पसंदीदा किरदार को लोगों के सामने प्रस्तुत किया।
विदेशी श्रद्धालु भी माघ मेले से अभिभूत:
माघ मेले की भव्यता और आध्यात्मिक वातावरण ने विदेशी श्रद्धालुओं को भी प्रभावित किया। नीदरलैंड (Netherlands) से आए पीटर (Peter) ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने ऐसा अद्भुत नजारा पहले कभी नहीं देखा। कड़ाके की ठंड के बावजूद साधु-संत, अखाड़े और कल्पवासी संगम की रेती पर डेरा जमाए हुए हैं और तपस्या में लीन हैं। उनके अनुसार, आम दिनों में भी करीब 10 लाख श्रद्धालु प्रतिदिन संगम में स्नान करते हैं, जो इस आयोजन की व्यापकता को दर्शाता है।
साधु-संतों और नागा बाबाओं के अनोखे रंग:
माघ मेले में श्रद्धालुओं के साथ-साथ साधु-संतों और नागा बाबाओं के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। कोई तपस्या में लीन है तो कोई अपने विशिष्ट वेश और दिनचर्या के कारण आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मंगलवार रात सतुआ बाबा ने ऊंट की सवारी कर संगम क्षेत्र में भ्रमण किया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। यह दृश्य मेले में मौजूद लोगों के लिए खास रहा।
रील और अनोखी प्रस्तुतियों ने खींचा ध्यान:
माघ मेले में आधुनिक दौर की झलक भी देखने को मिली। रीलबाज खुशी (Khushi) ने संगम नोज पर डांस का वीडियो बनाया, जो लोगों के बीच चर्चा का विषय बना। इसके अलावा 30 किलोग्राम रुद्राक्ष धारण करने वाले रुद्राक्ष वाले बाबा भी मेले में आकर्षण का केंद्र रहे। उनकी मौजूदगी ने श्रद्धालुओं और दर्शकों के बीच कौतूहल पैदा किया।
प्रतियोगी छात्र ने प्रतिमा के साथ किया स्नान:
बुधवार रात प्रतियोगी छात्र अवनीश कुमार (Avnish Kumar) ने संगम में स्नान किया। उन्होंने यह स्नान मुलायम सिंह (Mulayam Singh) की प्रतिमा के साथ किया, जिसे देखने के लिए आसपास मौजूद लोग रुक गए। इस दृश्य ने मेले के आध्यात्मिक और सामाजिक रंग को और गहरा किया।
आस्था, संस्कृति और विविधता का संगम:
प्रयागराज का माघ मेला आस्था, संस्कृति और विविधता का अनूठा संगम बनकर सामने आया है। यहां श्रद्धालुओं की आस्था, साधु-संतों की तपस्या, विदेशी मेहमानों की जिज्ञासा और युवाओं की रचनात्मकता एक साथ देखने को मिल रही है। मकर संक्रांति के अवसर पर उमड़ी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि माघ मेला न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजन है।
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