योगी सरकार का बड़ा फैसला, 50 साल से कम के ही करेंगे पुलिसकर्मी माघ मेला में ड्यूटी

रिपोर्टर: अनुज कुमार

लखनऊ (Lucknow) में 1 जनवरी 2026 से शुरू होने जा रहे माघ मेले को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद माघ मेले में 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुलिस और फायर विभाग के कर्मचारियों की तैनाती की जा रही है। यह स्थिति तब सामने आई है जब पहले ही यह कहा गया था कि उम्रदराज कर्मियों को इस तरह की कठिन और लंबी ड्यूटी से दूर रखा जाए। इसके बावजूद नियमों को नजरअंदाज कर ड्यूटी लगाई जा रही है, जिससे संबंधित कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

माघ मेला हर वर्ष लंबी अवधि तक चलने वाला आयोजन होता है, जिसमें सुरक्षा, यातायात और आपात सेवाओं की अहम भूमिका रहती है। ऐसे में उम्रदराज कर्मचारियों पर अतिरिक्त शारीरिक और मानसिक दबाव पड़ने की आशंका रहती है। यही कारण है कि पहले से ही इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए थे, ताकि स्वास्थ्य और कार्यक्षमता दोनों को संतुलित रखा जा सके।

मुख्यमंत्री के आदेशों की अनदेखी:
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री के आदेशों में साफ तौर पर यह कहा गया था कि 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुलिस और फायर विभाग के कर्मचारियों को माघ मेले की ड्यूटी में न लगाया जाए। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य यह था कि बुजुर्ग कर्मियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर न पड़े। बावजूद इसके, वर्तमान तैनाती सूची में बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी शामिल किए गए हैं, जो इस आयु सीमा से अधिक हैं।

नियमों को ताक पर रखकर ड्यूटी:
माघ मेले की तैयारियों के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर ड्यूटी लगाए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि उम्रदराज होने के कारण उन्हें लंबे समय तक खड़े रहना, भीड़ नियंत्रण और लगातार सतर्कता जैसे कार्यों में कठिनाई होती है। फिर भी उनसे वही जिम्मेदारियां निभाने की अपेक्षा की जा रही है, जो अपेक्षाकृत युवा कर्मियों से की जाती हैं।

उम्रदराज कर्मियों की चिंता:
ड्यूटी में लगाए गए बुजुर्ग कर्मचारियों के बीच चिंता का माहौल है। उनका मानना है कि ठंड, भीड़ और लंबे समय तक ड्यूटी करने से उनकी सेहत बिगड़ने की आशंका काफी बढ़ जाती है। पहले से ही कई कर्मचारी उच्च रक्तचाप, शुगर और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, ऐसे में माघ मेले जैसी ड्यूटी उनके लिए जोखिम भरी साबित हो सकती है।

सीएम से गुहार लगाने की तैयारी:
इस स्थिति से परेशान होकर उम्रदराज कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि पहले से तय नियमों का पालन किया जाए तो न केवल उनकी सेहत सुरक्षित रहेगी, बल्कि ड्यूटी का संचालन भी बेहतर ढंग से हो सकेगा। उनका आग्रह है कि निर्देशों के अनुसार ही तैनाती की जाए और बुजुर्ग कर्मियों को अपेक्षाकृत हल्की जिम्मेदारियां दी जाएं।

माघ मेले की तैयारी और सवाल:
1 जनवरी 2026 से शुरू होने वाले माघ मेले की तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन तैनाती को लेकर उठ रहे सवाल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं। मेला क्षेत्र में सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है, लेकिन इसके साथ-साथ कर्मचारियों के स्वास्थ्य और कल्याण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

स्वास्थ्य जोखिम की आशंका:
उम्रदराज कर्मचारियों की तैनाती से उनके स्वास्थ्य खराब होने की संभावना अधिक बताई जा रही है। ठंड के मौसम में लंबे समय तक ड्यूटी, भीड़भाड़ और आपात स्थितियों का सामना करना उनके लिए गंभीर खतरा बन सकता है। ऐसे में निर्देशों का पालन न होना केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टि से भी चिंता का विषय माना जा रहा है।

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