रिपोर्टर: अनुज कुमार
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय (Lucknow University) के भीतर स्थित लाल बारादरी को प्रशासन ने अचानक सील कर दिया, जिसके बाद छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई। यह विवाद 22 फ़रवरी 2026 को सामने आया जब छात्रों ने देखा कि लाल बारादरी के गेट वेल्डिंग से बंद किए जा रहे हैं और आसपास बाड़ लगाई जा रही थी। बुलडोज़र भी इमारत के पास खड़ा था। लाल बारादरी 200 साल पुरानी ऐतिहासिक संरचना है, जिसका दशकों से मुस्लिम छात्र, कर्मचारी और शिक्षक नमाज़ के लिए उपयोग करते आए हैं।
प्रशासनिक कार्रवाई और छात्रों की मांग:
छात्रों ने तत्काल रजिस्ट्रार भावना मिश्रा (Registrar Bhavana Mishra) से लिखित आदेश और निरीक्षण रिपोर्ट की मांग की। छात्रों का कहना था कि किसी ने उन्हें नहीं बताया कि कार्रवाई क्यों की जा रही है और प्रशासन ने कोई वैध लिखित आदेश प्रस्तुत नहीं किया। रजिस्ट्रार ने कार्रवाई के समय कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया, जिससे छात्रों में आक्रोश फैल गया।
सांप्रदायिक और जातिगत पहलू:
छात्र आंदोलन में शामिल अधिकांश छात्र अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से थे। प्रशासन द्वारा पुलिस बल तैनात करना और छात्रों पर आरोप लगाना कि वे “सरकारी काम में बाधा” डाल रहे हैं, विवाद को और गहरा करता है। एबीवीपी (ABVP) और अन्य संगठनों से जुड़े बाहरी लोग परिसर में प्रवेश करके नारेबाज़ी और भड़काऊ गतिविधियों में शामिल हुए।
लिखित आदेश और निरीक्षण रिपोर्ट की अनुपस्थिति:
छात्रों ने लगातार 48 घंटे तक प्रशासन से लिखित आदेश, संरचनात्मक निरीक्षण रिपोर्ट और प्रधानमंत्री-उषा योजना (Prime Minister-Usha Scheme) के अंतर्गत 5 करोड़ रुपये के उपयोग का लेखा-जोखा मांगा, लेकिन कोई दस्तावेज़ प्रदान नहीं किया गया। प्रशासन ने छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध करने के बावजूद धमकाया और केस दर्ज किए।
छात्र नेताओं का संघर्ष:
26 फ़रवरी को छात्र परिवर्तन चौक से जिलाधिकारी कार्यालय तक राज्यपाल को ज्ञापन देने निकले, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। छात्रों का कहना था कि यह केवल एक इमारत का मामला नहीं, बल्कि विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का प्रतीक है।
संवैधानिक और राजनीतिक सवाल:
छात्रों और पूर्व छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल राजनीतिक दलों के वैचारिक प्रयोग का स्थान नहीं है। कार्रवाई बिना लिखित आदेश और पारदर्शिता के हुई। जेएनयू (JNU) सहित अन्य विश्वविद्यालयों में छात्रों पर किए गए झूठे मुकदमे और दमन से इस घटना की तुलना की जा रही है।
छात्रों की अंतिम मांगें:
- लाल बारादरी को सील करने का लिखित आदेश तुरंत सार्वजनिक किया जाए।
- स्वतंत्र संरचनात्मक निरीक्षण रिपोर्ट जारी की जाए।
- प्रधानमंत्री-उषा योजना के 5 करोड़ रुपये का लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए।
- छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे और नोटिस वापस लिए जाएँ।
- छात्र प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और नागरिक समाज को शामिल करते हुए स्वतंत्र जांच समिति बनाई जाए।
- यदि कोई तत्काल खतरा नहीं है, तो आवश्यक सुरक्षा उपायों के साथ लाल बारादरी खोली जाए।
इस पूरे विवाद ने विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच गहरा तनाव पैदा किया है। छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल पारदर्शिता और संविधान के अनुसार जवाबदेही की मांग करना था।
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