Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) ने एक अनोखी पहल शुरू की है, जो पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में मिसाल साबित हो सकती है। दफ्तर में वर्षों से जमी करीब 5 हजार किलो पुरानी और अनुपयोगी फाइलों को अब रिसाइकिल के लिए पेपर मिल भेजा गया है। इन फाइलों में पुराने ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, परमिट और ट्रांसफर से जुड़े दस्तावेज शामिल थे, जिनका अब कोई आधिकारिक उपयोग नहीं था।
आरटीओ प्रशासनिक अधिकारी प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि यह कदम परिवहन आयुक्त वी.एन. सिंह के निर्देश पर उठाया गया है। इन बेकार दस्तावेजों को कबाड़ की तरह बेचने के बजाय इस बार शर्त रखी गई कि इनका इस्तेमाल केवल रिसाइकिलिंग के लिए ही किया जाएगा। इससे न केवल पर्यावरण को लाभ होगा बल्कि पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर भी अंकुश लगेगा। इस प्रक्रिया से दफ्तर को 78 हजार रुपये की अतिरिक्त आय भी हुई है।
इस पहल के कई फायदे सामने आए हैं। एक ओर तो दफ्तर में बहुमूल्य स्थान खाली हो गया है, वहीं दूसरी ओर कागज को दोबारा उपयोग में लाने का रास्ता भी खुला है। रिसाइकिल किया गया कागज भविष्य में सरकारी कार्यों में काम आएगा, जिससे संसाधनों की बचत होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि लखनऊ आरटीओ का यह प्रयोग राज्य और देश के अन्य सरकारी विभागों के लिए भी आदर्श मॉडल बन सकता है। लंबे समय से फाइलों के बोझ से जूझ रहे कई दफ्तर इस मॉडल को अपनाकर न केवल जगह की समस्या से निजात पा सकते हैं बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी सार्थक योगदान दे सकते हैं।
लखनऊ आरटीओ की यह अनोखी पहल साबित करती है कि यदि चाह हो तो बेकार समझी जाने वाली चीजें भी नए रूप में समाज और पर्यावरण के लिए उपयोगी बन सकती हैं। यह कदम भविष्य में टिकाऊ और जिम्मेदार कार्यशैली की दिशा में एक मजबूत संदेश है।
लखनऊ RTO की पहल: पुरानी फाइलें होंगी रिसाइकिल, बनेगा नया कागज