पुलिस की दबंगई या तंत्र की विफलता?
Lucknow: लखनऊ में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने पूरे प्रशासन को हिला दिया। सेना के हवलदार मनोज कुमार, जो जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में एलओसी पर तैनात हैं, अपने परिवार के साथ विधानसभा के सामने आत्महत्या करने पहुंचे। उनका आरोप है कि उनकी जमीन पर पुलिस विभाग में तैनात एक इंस्पेक्टर ने भू-माफिया के साथ मिलकर कब्जा कर लिया है।
सैनिक का दावा – ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा रहा हूं
मनोज कुमार, पीजीआई के देवीखेड़ा गांव की पवन पुरी कॉलोनी के निवासी हैं। उनका कहना है कि वे ऑपरेशन सिंदूर में शामिल रहे हैं और वर्तमान में 45 आरआर कुपवाड़ा में तैनात हैं। उन्होंने बताया कि लखनऊ में डिफेंस कॉलोनी, तेलीबाग में उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से जमीन खरीदी थी।
इंस्पेक्टर पर जबरन कब्जे का आरोप
मनोज कुमार ने बताया कि उनकी अनुपस्थिति में फतेहपुर जिले के चांदपुर थाने में तैनात इंस्पेक्टर राजेंद्र सिंह, भू-माफिया के सहयोग से उनकी जमीन पर जबरन कब्जा कर रहे हैं। सैनिक के अनुसार, इंस्पेक्टर फर्जी रजिस्ट्री के आधार पर दबंगई दिखाकर उनके प्लॉट पर निर्माण करवा रहे हैं।
“हम न्याय के लिए भटक रहे हैं” – सैनिक की पत्नी
सैनिक की पत्नी पूजा ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने इस जमीन को घर बनाने के लिए खरीदा था, लेकिन अब उनकी पूरी जिंदगी की कमाई दांव पर लगी है। वह कहती हैं, “हमने हर जगह गुहार लगाई—पीजीआई थाने, मुख्यमंत्री पोर्टल, मुख्यमंत्री दरबार—लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। हमारे पति देश की सेवा कर रहे हैं, इतनी ठंड में सीमा पर तैनात हैं, जबकि यहां एसी में बैठे अधिकारी मदद नहीं कर रहे।”
20 दिन से न्याय के लिए दौड़-भाग
पूजा के अनुसार, वे पिछले 20 दिनों से न्याय के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। सेना के कमांडर ऑफिसर द्वारा लिखित पत्र भी डीएम को दिखाया गया, लेकिन उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनके मुताबिक, इंस्पेक्टर लगातार उनके प्लॉट पर तेजी से निर्माण करवा रहा है।
हवलदार मनोज कुमार का आरोप – “सिस्टम हमें बचाने में नाकाम”
मनोज कुमार ने बताया कि उन्होंने गोरखपुर में मुख्यमंत्री से मुलाकात की, लखनऊ के जनता दरबार में गए, पुलिस उपायुक्त से मिले और सैनिक वेलफेयर कार्यालय में डीएम से भी मिले। डीएम ने काम रोकने का आदेश दिया था, लेकिन इंस्पेक्टर पर कोई असर नहीं पड़ा।
“जब तक न्याय नहीं मिलेगा, घर नहीं जाऊंगा”
मनोज कुमार ने साफ कहा कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, वे घर वापस नहीं जाएंगे। उनका कहना है कि वह छुट्टी पर आए थे और बुधवार को ड्यूटी ज्वाइन करनी थी, लेकिन कमांडर साहब से अनुमति लेकर न्याय के लिए रुक गए हैं। “पिछले 20 दिनों से भागदौड़ करते-करते थक चुका हूं। अब मजबूर होकर विधानसभा के सामने परिवार सहित आत्महत्या करने आया हूं,” उन्होंने कहा।
सैनिक की पुकार – “सैनिक की जमीन पुलिस और भूमाफिया से बचाओ”
मनोज कुमार और उनके परिवार ने विधानसभा के सामने तख्तियां उठा रखी थीं, जिन पर लिखा था—“सैनिक की जमीन पुलिस और भूमाफिया से बचाओ”। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए।

